पोस्टरों से सोशल मीडिया तक मुखर हुए वकील; रक्षाबंधन अवकाश के बाद विरोध की रणनीति पर चर्चा, तीनों बार एसोसिएशनों की बैठक के बाद शनिवार को फिर हो सकती है अहम बैठक
जोधपुर/जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत द्वारा इस मामले में बयान जारी किए जाने के बावजूद राजस्थान के अधिवक्ता लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
अब वकीलों के बीच यह मांग तेजी से उठ रही है कि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच पूरी होने तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों से दूर रखा जाए।
अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और उसकी साख को बनाए रखने के लिए इस मामले में स्पष्ट और प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
पोस्टरों और सोशल मीडिया के जरिए विरोध की आवाज
जस्टिस संदीप मेहता के आरोपों को लेकर अधिवक्ता पोस्टरों, बयानों और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। रक्षाबंधन अवकाश के बाद अदालतें खुलने पर विरोध की संभावित रणनीति को लेकर भी सोशल मीडिया ग्रुपों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जयपुर और जोधपुर—हाईकोर्ट के दोनों स्थानों पर अधिवक्ताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर लगातार विचार-विमर्श हो रहा है। वकीलों का कहना है कि जब देश की सर्वोच्च अदालत के एक वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा गंभीर सवाल उठाए गए हैं तो उनकी स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना आवश्यक है।
“सवाल किसी व्यक्ति का नहीं, न्यायपालिका की साख का है”
अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर लगे गंभीर आरोपों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। उनका तर्क है कि जांच के दौरान संबंधित न्यायाधीश के प्रशासनिक और न्यायिक कार्य करते रहने से निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
वकीलों ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा, पारदर्शिता और आम जनता के विश्वास से जुड़ा सवाल है।
तीनों बार एसोसिएशनें हुईं सक्रिय, शनिवार को फिर हो सकती है बैठक
मामले को लेकर गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट की तीनों प्रमुख बार एसोसिएशनें भी सक्रिय नजर आईं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में घटना पर चिंता जताने के साथ ही मामले पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद अब दो दिन बाद फिर बैठक बुलाने पर सहमति बनी है।
सूत्रों के अनुसार शनिवार को तीनों बार एसोसिएशनों की महत्वपूर्ण बैठक हो सकती है, जिसमें सोमवार को रक्षाबंधन अवकाश के बाद अदालतें खुलने पर आगे की रणनीति और संभावित कदमों पर विचार किया जा सकता है।
अधिवक्ताओं और बार पदाधिकारियों के बीच बैठकों और विचार-विमर्श का दौर लगातार जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में बार की ओर से सामूहिक और औपचारिक रुख सामने आने की संभावना है।
राजस्थान बार काउंसिल के कई नवनिर्वाचित सदस्य भी इस मामले में खुलकर अपनी राय रख रहे हैं।खासतौर से जोधपुर हाईकोर्ट से नीरज गुर्जर लगातार इस मामले में आवाज उठा रहे हैं.
सिटिंग जजों के पत्रों की चर्चा ने बढ़ाई हलचल
इस बीच जस्टिस संदीप मेहता के पत्र के बाद पिछले सप्ताह हुए न्यायाधीशों के तबादलों को लेकर न्यायिक हलकों में भी चर्चा तेज है।
सूत्रों के अनुसार, जयपुर और जोधपुर से एक-एक सिटिंग जज द्वारा भी सीजेआई को पत्र लिखे जाने की चर्चा है।
हालांकि, इन कथित पत्रों की पूरी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। सूत्रों का कहना है कि इनका संबंध हाल ही में हुए तबादलों से हो सकता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
न्यायपालिका की साख पर टिकी नजरें
अधिवक्ताओं का कहना है कि न्याय के मंदिर में पारदर्शिता और निष्पक्षता केवल होनी ही नहीं चाहिए, बल्कि जनता को दिखाई भी देनी चाहिए।
ऐसे में गंभीर आरोपों की सच्चाई सामने आने तक निष्पक्ष जांच और उचित कदम उठाना न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए जरूरी है।
अब राजस्थान हाईकोर्ट की तीनों बार एसोसिएशनों की अगली बैठक और सोमवार को अदालतें खुलने के बाद अधिवक्ताओं की रणनीति पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
