नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को राहत मिली है।
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी है।
कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र भारद्वाज 10 दिन से ज्यादा समय हिरासत में रह चुके हैं। कोर्ट ने माना कि हिरासत में बिताया गया यह समय जमानत पर विचार करते समय एक अहम बात है।
भारद्वाज पर छात्र कार्यकर्ता के पिता संजय आजाद के साथ कथित मारपीट का आरोप है।
उन्हें इस महीने की शुरुआत में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था और इसके बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
कोर्ट ने किन आधारों पर दी अंतरिम जमानत?
पटियाला हाउस कोर्ट ने फिलहाल नियमित जमानत पर अंतिम फैसला नहीं किया है। इसके बजाय स्वतंत्र भारद्वाज को तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी गई है।
कोर्ट ने यह भी देखा कि स्वतंत्र भारद्वाज से हिरासत में पूछताछ पूरी हो चुकी है। साथ ही, जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें अधिकतम सजा सात साल तक की है।
कोर्ट ने यह भी देखा कि स्वतंत्र भारद्वाज से हिरासत में पूछताछ पूरी हो चुकी है। साथ ही, जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें अधिकतम सजा सात साल तक है। इसलिए फिलहाल उन्हें जेल में रखकर पूछताछ जारी रखने की जरूरत नहीं है।
हालांकि, कोर्ट ने शिकायतकर्ता और उसकी नाबालिग बेटी की सुरक्षा को भी अहम माना।
कोर्ट के सामने एक तरफ उनकी सुरक्षा का सवाल था, तो दूसरी तरफ स्वतंत्र भारद्वाज को अनिश्चित समय तक हिरासत में रखने का सवाल।
इन दोनों बातों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को फिलहाल तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी।
शुरुआत में जमानती धाराओं में दर्ज हुआ था मामला
पटियाला हाउस कोर्ट ने यह भी देखा कि शुरुआत में स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ BNS की धारा 115(2) और 126(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। ये दोनों जमानती अपराध थे।
इन धाराओं में अधिकतम सजा एक साल और एक महीने तक की थी।
कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि पुलिस ने घटना के बाद करीब दो महीने तक स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार नहीं किया था। बाद में उनकी गिरफ्तारी हुई और जांच आगे बढ़ी।
कोर्ट ने जमानत पर फैसला लेते समय इस पूरे घटनाक्रम को भी ध्यान में रखा।
SC/ST एक्ट की धाराएं बाद में जोड़ी गईं
मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं बाद में जोड़ी गई थीं। सुनवाई के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि शुरुआत में दर्ज शिकायत में जातिसूचक टिप्पणी का आरोप नहीं था।
पुलिस की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शुरुआती रिपोर्ट में ऐसी किसी टिप्पणी का जिक्र नहीं था। बाद में दर्ज बयान में जातिसूचक टिप्पणी का आरोप सामने आया। इसके बाद मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं।
पटियाला हाउस कोर्ट ने माना कि किसी आरोप का बाद में सामने आना अपने आप में उसे गलत साबित नहीं करता।
हालांकि, कोर्ट ने जमानत पर विचार करते समय इस बात को भी ध्यान में रखा कि जातिसूचक टिप्पणी का आरोप पहली शिकायत में नहीं था और बाद में सामने आया।
गिरफ्तारी को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को दिल्ली हाईकोर्ट में भी चुनौती दी थी। उन्होंने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर अपनी हिरासत को गैरकानूनी बताया था।
हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रवींद्र डुडेजा की डिवीजन बेंच ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
हाईकोर्ट ने माना था कि याचिका में दिए गए आधार उनकी हिरासत को गैरकानूनी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
इसके बाद मामला पटियाला हाउस कोर्ट में जमानत की सुनवाई तक पहुंचा।
अंतरिम जमानत के दौरान व्यवहार पर रहेगी नजर
पटियाला हाउस कोर्ट ने फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज को तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी है। इस अवधि के बाद उनकी नियमित जमानत की मांग पर आगे सुनवाई होगी।
यानी अभी उन्हें सीमित समय के लिए जेल से बाहर आने की राहत मिली है। इस दौरान कोर्ट की ओर से लगाई गई शर्तों का पालन करना होगा। शिकायतकर्ता और उसकी नाबालिग बेटी की सुरक्षा को लेकर भी कोर्ट ने सावधानी बरती है।