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नामांकन खारिज होने को सीधे हाईकोर्ट में नहीं दी जा सकती चुनौती, याचिकाकर्ता को राहत नहीं; इलेक्शन पिटीशन दाखिल करनी होगी

Nomination Rejection in Municipal Polls Cannot Be Directly Challenged in HC, Rajasthan HC Says

जयपुर। नगर निकाय चुनाव में नामांकन खारिज होने से नाराज उम्मीदवार सीधे हाईकोर्ट का रुख नहीं कर सकता। ऐसे मामले में उसे इलेक्शन पिटीशन दाखिल करनी होगी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने वार्ड सदस्य के चुनाव में नामांकन खारिज होने से जुड़े एक मामले में याचिका खारिज करते हुए ये फैसला सुनाया।

नामांकन खारिज होने को चुनौती देने वाले उम्मीदवार की याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने उसे राहत देने से इनकार कर दिया।

दरअसल वार्ड मेंबर पद के लिए याचिकाकर्ता का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर नामांकन बहाल करने और चुनाव लड़ने की अनुमति मांगी थी।

जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि अनुच्छेद 243-ZG के तहत नगर पालिका चुनाव को सीधे हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। नामांकन से जुड़ी शिकायत के लिए इलेक्शन पिटीशन यानी चुनाव याचिका दाखिल करनी होगी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को इलेक्शन पिटीशन दाखिल करने की छूट दी है। यानी नामांकन खारिज किए जाने के खिलाफ वह कानून में तय प्रक्रिया के तहत चुनाव को चुनौती दे सकते हैं।

किस मामले में आया हाईकोर्ट का यह फैसला?

मामला डीग जिले के बृज नगर नगरपालिका के वार्ड सदस्य के चुनाव से जुड़ा है। याचिकाकर्ता कन्हैया लाल ने डीग जिले की ब्रिजनगर नगर पालिका के वार्ड नंबर 35 से सदस्य पद के लिए नामांकन दाखिल किया था।

लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने 1 सितंबर 2026 को उनका नामांकन खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी और चुनाव में शामिल होने की अनुमति मांगी।

क्रिमिनल केस की जानकारी नहीं देने पर नामांकन हुआ था खारिज

रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन खारिज करने की वजह याचिकाकर्ता के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले को बताया था। आरोप था कि उम्मीदवार कन्हैया लाल ने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी।

दरअसल कन्हैया लाल के खिलाफ एक क्रिमिनल केस चल रहा था। संबंधित कोर्ट इस मामले में संज्ञान ले चुकी थी और ऐसे अपराध के आरोप में चार्ज भी तय हो चुके थे, जिसमें 5 साल से ज्यादा की सजा का प्रावधान है।

वहीं कन्हैया लाल का कहना था कि नामांकन खारिज करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। इसलिए कार्रवाई को पूरी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता है।

‘नामांकन की शिकायत भी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा

हाईकोर्ट ने कहा कि नामांकन पत्र को स्वीकार या खारिज करना भी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में चुनाव से जुड़े विवाद को चुनौती देने के लिए कानून में तय प्रक्रिया का ही पालन करना होगा।

हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 243-ZG का हवाला देते हुए कहा कि नगर पालिका के चुनाव को सामान्य रिट याचिका के जरिए हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। चुनाव से जुड़े विवादों के लिए कानून में इलेक्शन पिटीशन का प्रावधान है।

इसके लिए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के N.P. Ponnuswami Vs Returning Officer के फैसले का हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में कहा था कि चुनाव का मतलब सिर्फ अंतिम नतीजा नहीं है, बल्कि पूरी चुनाव प्रक्रिया है। इसमें नामांकन पत्र को स्वीकार या खारिज करने की प्रक्रिया भी शामिल है।

गलत तरीके से नामांकन खारिज होने पर क्या रास्ता है?

हाईकोर्ट ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 31 का भी हवाला दिया। इसके तहत नामांकन पत्र को गलत तरीके से स्वीकार करना या खारिज किया जाना चुनाव को शून्य घोषित करने का आधार बन सकता है।

ऐसी शिकायत के लिए उम्मीदवार को इलेक्शन पिटीशन दाखिल करनी होगी। ये इलेक्शन पिटीशन चुनाव की तारीख से एक महीने के भीतर संबंधित क्षेत्र के डिस्ट्रिक्ट जज के सामने दाखिल की जा सकती है।

इसलिए याचिकाकर्ता अपनी शिकायत लेकर चुनाव याचिका दाखिल कर सकता है।

हाईकोर्ट ने दी चुनाव याचिका दाखिल करने की छूट

इस मामले में हाईकोर्ट ने नामांकन खारिज करने के आदेश की वैधता पर सीधे फैसला देने के बजाय रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-ZG के तहत हाईकोर्ट नगर पालिका के चुनाव से जुड़े इस तरह के विवाद पर रिट पिटीशन के जरिए सुनवाई नहीं कर सकता। इसलिए कन्हैया लाल की रिट पिटीशन का निपटारा कर दिया गया।

हालांकि, हाईकोर्ट ने उन्हें इलेक्शन पिटीशन दाखिल करने की छूट दी है। यानी अगर उसे लगता है कि उसका नामांकन गलत तरीके से खारिज हुआ, तो वह कानून में तय प्रक्रिया के तहत चुनाव को चुनौती दे सकता है।

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