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जोधपुर सहित पश्चिमी राजस्थान के 7 जिलों के अस्पतालों की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से जवाब तलब

Rajasthan High Court Sets October 5 Deadline Over Vacancies in Consumer Commissions

जोधपुर के प्रमुख अस्पतालों में बढ़ते मरीजों के दबाव, डॉक्टर-नर्सिंग स्टाफ की कमी और अन्य जिलों की कमजोर स्वास्थ्य सुविधाओं का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

जोधपुर। पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े शहर में शामिल जोधपुर सहित 7 जिलों की चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

जोधपुर शहर के प्रमुख अस्पतालों सहित जैसलमेर, पोकरण, बाड़मेर, बालोतरा, पाली, नागौर और जालोर क्षेत्रों में बदहाल चिकित्सा व्यवस्था और ढांचे की स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

महेंद्र कुमार मेहता की ओर से दायर जनहित याचिका पर जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार सहित अलग-अलग विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और फार्मेसी व्यवस्था की मांगी जानकारी

राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब में विशेष रूप से डॉक्टरों, पैरास्टाफ, फार्मेसी व्यवस्था तथा पश्चिमी राजस्थान के विभिन्न अस्पतालों में स्वच्छता संबंधी स्थितियों की जानकारी शामिल करने के आदेश दिए हैं।

इसके साथ ही जनहित याचिका को आगामी 23 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नरेंद्र सिंह राजपुरोहित कोर्ट में मौजूद रहे।

जोधपुर के अस्पतालों पर लगातार बढ़ रहा मरीजों का दबाव

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक छंगाणी ने अदालत में पैरवी करते हुए बताया कि मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के अनुपात में जोधपुर शहर का मौजूदा चिकित्सा ढांचा पर्याप्त नहीं है। महात्मा गांधी अस्पताल, मथुरा दास माथुर अस्पताल और अन्य प्रमुख अस्पतालों में मरीजों का दबाव बढ़ता जा रहा है।

याचिका में कहा गया कि पश्चिमी राजस्थान के आसपास के कई शहरों और जिलों में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए जोधपुर रेफर किया जाता है।

इससे एक ओर जोधपुर के अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, वहीं दूसरी ओर मरीजों और उनके परिजनों को लंबी दूरी तय करने के कारण अतिरिक्त आर्थिक भार भी उठाना पड़ता है।

नर्सिंगकर्मी और अन्य मानव संसाधन की कमी का भी मुद्दा

याचिका में जोधपुर में मरीजों की संख्या के मुकाबले नर्सिंगकर्मियों और अन्य आवश्यक मानव संसाधनों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के लिए केवल अस्पताल भवन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पर्याप्त संख्या में डॉक्टर, नर्सिंगकर्मी, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध होना भी जरूरी है।

अस्पतालों की सफाई और संक्रमण का खतरा

पश्चिमी राजस्थान के विभिन्न अस्पतालों में साफ-सफाई और हाइजीन की स्थिति को लेकर भी याचिका में गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

याचिका में आशंका जताई गई है कि अस्पतालों में स्वच्छता के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से संक्रमण का खतरा बना रह सकता है।

इसके अलावा अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी हाईकोर्ट के समक्ष उठाए गए हैं।

सरकार को पहले दिया था प्रतिवेदन

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि जनहित याचिका दायर करने से पहले इन समस्याओं को लेकर राज्य सरकार के समक्ष प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया था, लेकिन उस पर अपेक्षित कार्रवाई अथवा जवाब नहीं मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट के समक्ष लाया गया।

अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार को पश्चिमी राजस्थान के अस्पतालों में चिकित्सकीय मानव संसाधन, पैरास्टाफ, फार्मेसी और स्वच्छता व्यवस्था से संबंधित जानकारी अदालत के समक्ष रखनी होगी।

अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी।

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