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ओपन-डिस्टेंस से ग्रेजुएशन के बाद रेगुलर LL.B. करने वालों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने प्रोविज़नल एनरोलमेंट की दी अनुमति; तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल को निर्देश

Supreme Court AOR Exam 2026 Schedule Released, Exam on December 19, 20, 22 and 23; Applications From October 1

नई दिल्ली: क्या ओपन या डिस्टेंस मोड से ग्रेजुएशन करने के बाद रेगुलर LL.B. करने वाले लॉ के छात्र एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट नहीं करा सकते? इसी सवाल से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ऐसे लॉ ग्रेजुएट्स को अंतरिम राहत दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल को निर्देश दिया है कि ऐसे आवेदकों का प्रोविज़नल एनरोलमेंट एडवोकेट के तौर पर किया जाए, जिन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थानों से रेगुलर मोड में 3 साल की LL.B. पूरी की है।

दरअसल, तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल ने ओपन/डिस्टेंस मोड से बैचलर डिग्री करने के बाद रेगुलर 3 साल की LL.B. पूरी करने वाले ग्रेजुएट्स का एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट रोक दिया था।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इसी विवाद से जुड़े मामले में यह आदेश दिया है। विवाद इस बात को लेकर है कि बैचलर डिग्री ओपन या डिस्टेंस मोड से करने का असर बाद में रेगुलर LL.B. करने वाले ग्रेजुएट्स के एडवोकेट एनरोलमेंट पर पड़ेगा या नहीं।

हालांकि, यह सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि BCI के लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008 के नियम 5 की व्याख्या पर अंतिम फैसला बाद में होगा

सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला आने तक अस्थायी तौर पर प्रोविज़नल एनरोलमेंट की अनुमति दी है, ताकि अपील लंबित रहने के दौरान लॉ ग्रेजुएट्स को एडवोकेट के तौर पर प्रैक्टिस शुरू करने से सिर्फ इसी विवाद के कारण रोका न जा सके।

रेगुलर LL.B. के बाद भी एनरोलमेंट पर लगी थी रोक

मामला उन आवेदकों से जुड़ा है, जिन्होंने स्कूली शिक्षा के बाद डॉ. बी.आर. अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी, हैदराबाद से बैचलर डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने BCI से मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटीज से रेगुलर मोड में तीन साल की LL.B. पूरी की।

लेकिन जब इन आवेदकों ने एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट के लिए आवेदन किया, तो तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल ने उनकी बैचलर डिग्री ओपन/डिस्टेंस मोड से होने के आधार पर एनरोलमेंट रोक दिया।

हाईकोर्ट ने भी नहीं दी थी राहत

इसी मामले में एक अन्य अपीलकर्ता ने 2006 में मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी से डिस्टेंस मोड में B.Com. किया था। इसके बाद 2020 में उस्मानिया यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेज से रेगुलर मोड में LL.B. पूरी की।

तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल ने नियम 5 की व्याख्या के आधार पर उनका भी एनरोलमेंट आवेदन खारिज कर दिया।

इसके बाद आवेदकों ने तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया। लेकिन 2024 में हाईकोर्ट ने भी तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल के फैसले को बरकरार रखा और एनरोलमेंट की अनुमति नहीं दी।

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब कोर्ट ने अंतिम फैसला आने तक प्रोविज़नल एनरोलमेंट की अनुमति दी है।

BCI के Rule 5 के आधार पर रोका गया एनरोलमेंट

इस पूरे विवाद की वजह लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008 का नियम 5 है। सवाल यह है कि इस नियम के तहत बैचलर डिग्री किस मोड से की गई है, उसका असर बाद में रेगुलर LL.B. करने वाले व्यक्ति के एडवोकेट एनरोलमेंट पर किस तरह पड़ेगा।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस सवाल का अंतिम जवाब नहीं दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर सिविल अपील की अंतिम सुनवाई के दौरान विस्तार से विचार किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने रेगुलर LL.B. पूरी करने वालों को दी अंतरिम राहत

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि आवेदकों ने मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से रेगुलर 3 साल की LL.B. पूरी की है। इसके बावजूद सिर्फ उनकी बैचलर डिग्री ओपन/डिस्टेंस मोड से होने के कारण एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट रुका हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अपील का फैसला आने तक एनरोलमेंट पर रोक जारी रहने से आवेदकों को नुकसान हो सकता है। इसलिए अंतिम फैसला आने तक उन्हें अस्थाई यानी प्रोविज़नल एनरोलमेंट की अनुमति दी जानी चाहिए।

अंतिम फैसला आने तक रहेगा अस्थायी एनरोलमेंट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह एनरोलमेंट पूरी तरह अस्थायी होगा और संबंधित सिविल अपील के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रोविज़नल एनरोलमेंट से आवेदकों के पक्ष में कोई स्थायी अधिकार या इक्विटी पैदा नहीं होगी। यह सुविधा उनके शैक्षणिक और अन्य जरूरी दस्तावेजों के वेरिफिकेशन और लागू शर्तें पूरी करने पर ही मिलेगी।

सबसे अहम बात यह है कि यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट में चल रही सिविल अपील के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगी।

यानी अभी सुप्रीम कोर्ट ने यह अंतिम रूप से तय नहीं किया है कि ओपन या डिस्टेंस मोड से बैचलर डिग्री लेने वाले व्यक्ति नियम 5 के तहत स्थायी रूप से एडवोकेट के तौर पर एनरोल होने के पात्र हैं या नहीं।

फिलहाल, कोर्ट ने मामले में शामिल आवेदकों को प्रोविज़नल एनरोलमेंट के जरिए कानून की प्रैक्टिस में प्रवेश का रास्ता खोल दिया है। मूल विवाद पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।

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