नई दिल्ली। स्टेट बार काउंसिल्स में महिलाओं को 30% प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था के बाद अब यही फार्मूला बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में भी लागू करने की मांग सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में कहा गया है कि अगर स्टेट बार काउंसिल्स में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाई जा रही है, तो इसका असर देश की सबसे बड़ी बार संस्था BCI में भी दिखना चाहिए।
इस याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया का जल्द पुनर्गठन करने और उसमें कम से कम 30% महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को स्टेट बार काउंसिल्स में महिलाओं के लिए 30% प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की थी। लेकिन मौजूदा कानून के तहत हर स्टेट बार काउंसिल्स से BCI में सिर्फ एक सदस्य चुना जाता है।
ऐसे में स्टेट बार काउंसिल्स में 30% महिलाएं होने के बावजूद BCI में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अपने आप 30% नहीं हो जाएगा।
अर्जी में मांग की गई है कि स्टेट बार काउंसिल्स में लागू 30% महिला प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को BCI में भी लागू किया जाए। इसके साथ ही BCI चेयरपर्सन, सेक्रेटरी और ट्रेजरर जैसे अहम पदों पर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
स्टेट बार काउंसिल्स में है 30% महिला प्रतिनिधित्व
सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को एक आदेश दिया था जिसमें हर स्टेट बार काउंसिल में कम से कम 30% महिला प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की थी। इसमें 20% सीटें सीधे चुनाव और 10% सीटें को-ऑप्शन के जरिए भरने का प्रावधान किया गया था।
को-ऑप्शन के जरिए दो महिला सदस्यों को संबंधित हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, निर्वाचित सदस्यों से सलाह के बाद चुनेंगे। इनमें पूर्व महिला हाईकोर्ट जज और सीनियर महिला बार सदस्य शामिल हो सकती हैं।
यानी सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पहले ही 30% प्रतिनिधित्व की व्यवस्था तय कर दी है।
BCI में 30% महिलाएं कैसे आएंगी?, यही सवाल उठाया
अर्जी में इसी व्यवस्था को लेकर एक समस्या बताई गई है। एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 4(1) के मुताबिक BCI में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल एक्स-ऑफिशियो सदस्य होते हैं। इसके अलावा हर स्टेट बार काउंसिल अपने सदस्यों में से सिर्फ एक प्रतिनिधि BCI के लिए चुनती है।
क्योंकि हर स्टेट बार काउंसिल से BCI में सिर्फ एक प्रतिनिधि जाता है। वह प्रतिनिधि महिला भी हो सकता है और पुरुष भी। अगर ऐसा कई स्टेट बार काउंसिल्स में होता है तो BCI में महिला प्रतिनिधित्व काफी कम रह सकता है।
‘बार काउंसिल से BCI में महिलाओं के पहुंचने की गारंटी नहीं’
याचिकाकर्ता का कहना है कि स्टेट बार काउंसिल्स में 30% महिलाएं होने के बावजूद BCI में उनका प्रतिनिधित्व कम रह सकता है।
इसकी वजह यह है कि हर स्टेट बार काउंसिल से BCI में सिर्फ एक प्रतिनिधि जाता है, जो जरूरी नहीं कि महिला ही हो। ऐसे में BCI में एक भी महिला सदस्य चुने जाने की गारंटी नहीं है।
या ज्यादा से ज्यादा एक या दो महिला सदस्य ही BCI तक पहुंच पाएं, ऐसी स्थिति भी बन सकती है। लेकिन इससे महिला प्रतिनिधित्व बढ़ें, इसके चांस कम ही हैं।
इसलिए मांग की गई है कि स्टेट बार काउंसिल्स में महिलाओं के लिए तय 30% प्रतिनिधित्व का फायदा BCI में भी मिले। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम व्यवस्था बनाने की मांग की गई है, ताकि BCI के गठन में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
BCI में महिलाओं के लिए रोटेशन की व्यवस्था का सुझाव
अर्जी में इसके लिए एक तरीका भी सुझाया गया है। इसके तहत BCI में 30% सीटें महिलाओं के लिए तय की जा सकती हैं जिससे अलग-अलग स्टेट बार काउंसिल्स से महिला प्रतिनिधि चुनी जा सकती हैं।
इसके लिए रोटेशन की व्यवस्था रखने का सुझाव है। यानी पहले कुछ स्टेट बार काउंसिल्स से महिला प्रतिनिधि आएं और दो साल बाद दूसरी स्टेट बार काउंसिल्स की महिलाओं को मौका दिया जाए।
हालांकि यह सिर्फ याचिकाकर्ता का सुझाया हुआ तरीका है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस पर ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है।
BCI चेयरपर्सन से लेकर सेक्रेटरी तक में महिलाओं की मांग
अर्जी में सिर्फ BCI की सदस्यता में 30% प्रतिनिधित्व की मांग नहीं की गई है। इसके साथ BCI के नेतृत्व में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।
अस्थायी व्यवस्था के तौर पर BCI के चेयरपर्सन का पद महिला के लिए रिजर्व करने की मांग की गई है। इसके लिए रिटायर्ड महिला हाईकोर्ट जज या किसी प्रतिष्ठित महिला एडवोकेट को प्राथमिकता देने का सुझाव है।
इसके अलावा BCI के सेक्रेटरी और ट्रेजरर के पद भी महिलाओं के लिए लगातार दो टर्म तक रिजर्व करने की मांग की गई है। स्टेट बार काउंसिल्स में भी सेक्रेटरी और ट्रेजरर के पदों को लेकर इसी तरह की व्यवस्था की मांग की गई है।
2 सितंबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से भी जुड़ा है मामला
यह मांग ऐसे समय आई है जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही BCI के पुनर्गठन की प्रक्रिया को लेकर निर्देश दे चुका है।
2 सितंबर 2026 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने नए स्टेट बार काउंसिल्स के गठन के बाद उनके पदाधिकारियों के चुनाव और BCI के लिए एक सदस्य चुनने की प्रक्रिया को लेकर निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि एडवोकेट्स एक्ट की धारा 4 के तहत BCI के गठन से जुड़े सवाल पर स्टेट बार काउंसिल्स की कंप्लायंस रिपोर्ट मिलने के बाद विचार किया जाएगा।
इसी को देखते हुए नई अर्जी में BCI का अगला पुनर्गठन जल्द और तय समय में करने की मांग की गई है। साथ ही, स्टेट बार काउंसिल्स की तरह BCI में भी महिलाओं के लिए 30% प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
फिलहाल यह मांग सुप्रीम कोर्ट के सामने है। BCI में 30% महिला प्रतिनिधित्व कैसे लागू किया जाए, इस पर अंतिम फैसला कोर्ट के आदेश के बाद ही साफ होगा।