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नागौर एसपी की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका, चुनाव आयोग से दो सप्ताह में जवाब तलब

Rajasthan High Court Denies Pensionary Benefits to Widows of Casual Railway Workers With Temporary Status

आरएलपी ने उठाया लंबे समय से खाली एसपी पद का मुद्दा, चुनाव के बीच आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की मांग

जोधपुर। नागौर जिले में पुलिस अधीक्षक का पद लंबे समय से रिक्त रहने और आगामी नगर निकाय चुनावों के दौरान पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) की ओर से दायर याचिका में नागौर में पुलिस अधीक्षक के पद पर आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति किए जाने की मांग की गई है।

मामले पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया हैं. साथ ही कोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 8 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया है।

जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने यह आदेश्डि दिया हैं.

आरएलपी की ओर से अधिकृत अनिल बारूपाल ने याचिका पेश की, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोती सिंह ने पैरवी की.

रोशन मीणा के तबादले के बाद से पद रिक्त

याचिका में कहा गया है कि नागौर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रोशन मीणा, आईपीएस का 19 मई 2026 को तबादला कर दिया गया था। इसके बाद से जिले में पुलिस अधीक्षक का पद रिक्त है।

आरएलपी ने स्पष्ट किया है कि उसे सामान्य तबादले पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया के बीच किसी जिले में पुलिस अधीक्षक का पद लंबे समय तक खाली रहना गंभीर प्रशासनिक और चुनावी मुद्दा है।

चुनाव की निष्पक्षता से जोड़ा मामला

याचिका में 21 जुलाई के निर्वाचन आयोग के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्वतंत्र, निष्पक्ष, निर्भीक और पारदर्शी चुनाव कराने में जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इसके बाद 19 अगस्त को नगर निकाय चुनाव का कार्यक्रम जारी किया गया, जिसमें नागौर जिले में भी चुनाव प्रक्रिया निर्धारित होने का याचिका में उल्लेख किया गया है।

याचिका के अनुसार, 21 अगस्त को निर्वाचन आयोग ने महत्वपूर्ण रिक्त पदों को भरने तथा स्थानांतरण और पदस्थापन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद नागौर में पुलिस अधीक्षक का पद रिक्त रहा।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को दिया गया अतिरिक्त प्रभार

याचिका में दावा किया गया है कि 19 अगस्त के आदेश के बाद नागौर एसपी का अतिरिक्त प्रभार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंप दिया गया।

आरएलपी का आरोप है कि इस व्यवस्था के लिए निर्वाचन आयोग की आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।

पार्टी ने इस व्यवस्था को चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता और स्वतंत्रता से जोड़ते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है।

हाईकोर्ट ने फिलहाल केवल चुनाव आयोग को नोटिस दिया

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.एल. भाटी ने नोटिस स्वीकार किया।

हालांकि हाईकोर्ट ने फिलहाल प्रतिवादी संख्या 1 यानी राज्य निर्वाचन आयोग को ही नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को याचिका और उसके साथ संलग्न दस्तावेज राज्य निर्वाचन आयोग के नियमित अधिवक्ता को उपलब्ध कराने की अनुमति भी दी है।

आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की मांग

आरएलपी ने हाईकोर्ट से मांग की है कि नागौर जिले में पुलिस अधीक्षक के रिक्त पद पर उपयुक्त आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति के लिए आवश्यक आदेश दिए जाएं।

याचिका में पूरे मामले को व्यापक जनहित तथा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव से जुड़ा हुआ बताते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।

8 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिका में उठाए गए मुद्दों पर कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है।

अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी, जिसमें आयोग का जवाब सामने आने के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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