जोधपुर। कुचेरा नगर पालिका से जुड़े मामले में रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट में हुई विशेष सुनवाई के बाद पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान पार्षद तेजपाल मिर्धा को बड़ी राहत मिली है।
जस्टिस कुलदीप माथुर की विशेष बेंच ने मिर्धा की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
तेजपाल मिर्धा के खिलाफ हाल ही में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद गिरफ्तारी की आशंका के बीच मिर्धा ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया और दो दिन के लिए प्रोटेक्शन की मांग की थी।
तेजपाल मिर्धा के खिलाफ हाल ही में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद गिरफ्तारी की आशंका के बीच मिर्धा ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया और दो दिन के लिए प्रोटेक्शन की मांग की थी।
रविवार को अवकाश के बावजूद हाईकोर्ट में हुई विशेष सुनवाई
मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में रविवार को विशेष सुनवाई हुई। इसके लिए जस्टिस कुलदीप माथुर की विशेष बेंच का गठन किया गया।
याचिका पर सुबह सुनवाई शुरू हुई और तेजपाल मिर्धा की ओर से उनके अधिवक्ता रामावतार चौधरी एवं सहयोगी अधिवक्ता सुमेर सिंह गौर ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
एसीबी में मुकदमा दर्ज, मांगी सुरक्षा
तेजपाल मिर्धा के खिलाफ एसीबी में मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट से तत्काल राहत की मांग की थी। याचिका में गिरफ्तारी से संरक्षण के साथ-साथ नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए समय दिए जाने की मांग भी की गई थी।
मामले में रविवार को हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मिर्धा को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगाने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।
रविवार को खुला हाईकोर्ट, विशेष सुनवाई
मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में रविवार को विशेष सुनवाई हुई।
आदेश के अनुसार, याचिकाकर्ता की ओर से मामले में अर्जेंसी बताए जाने के बाद मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर रविवार को तत्काल सुनवाई तय की.
रविवार सुबह हुई सुनवाई के बाद अदालत ने दोपहर करीब 2 बजे अपना आदेश सुनाया और तेजपाल मिर्धा को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया।
21 सितंबर चेयरमैन का चुनाव
तेजपाल मिर्धा 14 सितंबर 2026 को कुचेरा नगर पालिका के वार्ड नंबर 21 से निर्वाचित हुए थे।
इसके बाद उन्होंने नगर पालिका चेयरमैन पद के लिए नामांकन दाखिल किया। नामांकन की तारीख 16 सितंबर थी, जबकि नाम वापसी की अंतिम तारीख 18 सितंबर निर्धारित थी।
कुचेरा नगर पालिका के चेयरमैन पद का चुनाव 21 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है।
ऐसे में चुनाव से ठीक पहले एसीबी एफआईआर दर्ज होने और गिरफ्तारी की आशंका के बीच मिर्धा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
2018 की शिकायत, करीब 8 साल बाद FIR
याचिका में बताया गया कि तेजपाल मिर्धा इससे पहले 2015 से 2018 तक कुचेरा नगर पालिका के चेयरमैन रह चुके हैं।
वर्ष 2018 में तत्कालीन वार्ड नंबर 3 के पार्षद शैतानराम टाक ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में 2015 से 2018 के कार्यकाल के दौरान विभिन्न कार्यादेश जारी करने में नगर पालिका के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ कथित मिलीभगत, वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक अनियमितताओं तथा सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।
याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में तर्क दिया गया कि 2018 में शिकायत दर्ज होने के बावजूद करीब आठ वर्ष तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद मिर्धा के वार्ड सदस्य निर्वाचित होने और चेयरमैन पद के लिए नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद कार्रवाई आगे बढ़ी।
18 सितंबर को मंजूरी, उसी रात FIR
याचिका के अनुसार, 18 सितंबर 2026 को स्थानीय स्वशासन विभाग के निदेशक-सह-विशेष सचिव ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17-ए के तहत मंजूरी प्रदान की।
इसके बाद एसीबी ने उसी दिन यानी 18 तारीख को ही एफआईआर संख्या 0268/2026 दर्ज की।
याचिकाकर्ता का दावा था कि एफआईआर 18 सितंबर की रात 11:58 बजे दर्ज की गई। साथ ही आरोप लगाया गया कि 19 सितंबर को दोपहर 3:30 बजे तक एफआईआर आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुई थी।
मिर्धा की ओर से आशंका जताई गई कि यदि उन्हें गिरफ्तार किया गया तो वे 21 सितंबर को होने वाले चेयरमैन चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
सरकार ने किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने याचिका का विरोध करते हुए किसी भी तरह के अंतरिम राहत का विरोध किया। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि याचिका में एफआईआर रद्द करने की कोई स्पष्ट प्रार्थना नहीं की गई है।
सरकार ने यह भी कहा कि एफआईआर में संज्ञेय अपराध के आरोप सामने आते हैं और गिरफ्तारी से बचाव के लिए याचिकाकर्ता के पास सक्षम आपराधिक अदालत के समक्ष अग्रिम जमानत मांगने का वैकल्पिक उपाय उपलब्ध है।
महाधिवक्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि एफआईआर अचानक या रातोंरात दर्ज नहीं हुई।
सरकार के अनुसार, 2015 से 2018 के कार्यकाल से जुड़ी कथित अनियमितताओं की विभिन्न स्तरों पर जांच चल रही थी।
सरकार के अनुसार, एसीबी के पुलिस महानिरीक्षक ने 24 अगस्त 2026 को स्थानीय स्वशासन विभाग के सचिव से धारा 17-ए के तहत मंजूरी मांगी थी और उपलब्ध सामग्री पर विचार के बाद 18 सितंबर 2026 को कार्रवाई की मंजूरी दी गई।
आठ साल की देरी पर सवाल
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद परिस्थितियों पर गौर किया।
अदालत ने दर्ज किया कि तेजपाल मिर्धा वार्ड नंबर 21 से निर्वाचित सदस्य हैं और 21 सितंबर को प्रस्तावित चेयरमैन चुनाव के उम्मीदवार हैं।
अदालत ने यह भी रिकॉर्ड किया कि एफआईआर में लगाए गए आरोप उनके 2015 से 2018 के चेयरमैन कार्यकाल से संबंधित हैं और इस संबंध में शिकायत करीब आठ वर्ष पहले, 4 मई 2018 को की गई थी।
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि इस स्तर पर रिकॉर्ड पर यह संतोषजनक रूप से स्पष्ट नहीं है कि वर्ष 2018 की शिकायत से संबंधित जांच करीब आठ वर्ष तक लंबित क्यों रही और धारा 17-ए के तहत मंजूरी 18 सितंबर 2026 को, यानी वार्ड सदस्य निर्वाचित होने और चेयरमैन पद के लिए नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद क्यों दी गई।
हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर एफआईआर को चुनाव प्रक्रिया में गैरकानूनी हस्तक्षेप मानने या इसे वैध वैधानिक कार्रवाई मानने के संबंध में कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है।
FIR रद्द करने की मांग नहीं, बावजूद गिरफ्तारी से राहत
हाईकोर्ट ने माना कि केवल इस आधार पर कि याचिकाकर्ता ने फिलहाल एफआईआर रद्द करने की स्पष्ट मांग नहीं की है, उसे अंतरिम गिरफ्तारी से राहत पर विचार करने से नहीं रोका जा सकता।
अदालत ने एफआईआर दर्ज होने के समय और उसकी प्रति उपलब्ध होने से जुड़े याचिकाकर्ता के पक्ष को भी ध्यान में रखा।
कोर्ट के समक्ष यह भी रखा गया कि गिरफ्तारी की स्थिति में मिर्धा के लिए आगामी चेयरमैन चुनाव में भाग लेना प्रभावित हो सकता है।
अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए एसीबी जयपुर के अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक तेजपाल मिर्धा को गिरफ्तार नहीं किया जाए।
साथ ही याचिकाकर्ता को याचिका में आवश्यक संशोधन करने की स्वतंत्रता दी गई है, जबकि राज्य पक्ष को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया है।
मामले को अब 5 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं।
कुचेरा नगर पालिका चेयरमैन चुनाव से ठीक एक दिन पहले आया यह हाईकोर्ट आदेश मामले को महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर ले आया है।
फिलहाल तेजपाल मिर्धा की गिरफ्तारी पर रोक है, जबकि एफआईआर और उससे जुड़े विवाद पर अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई में होगा।