जयपुर। भरतपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े महिला और नाबालिग क्रिकेटरों के यौन दुर्व्यवहार के आरोपों के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट ने इस विवाद में अंतरिम आदेश देते हुए एसोसिएशन के सचिव शत्रुघ्न तिवारी पर जांच पूरी होने तक कोई भी अहम फैसला लेने पर रोक लगा दी है।
साथ ही कोर्ट ने उन्हें एसोसिएशन के मूल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ नहीं करने और शिकायतकर्ता या गवाहों को प्रभावित करने पर भी रोक लगाई है।
मामला भरतपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन और उसके पदाधिकारियों के सस्पेंशन से जुड़ा है। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के एडमिनिस्ट्रेटर ने 1 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर 18 जून को लगाया गया अस्थायी सस्पेंशन हटा दिया था।
इसी आदेश को भरतपुर की महिला क्रिकेटर ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका में महिलाओं और नाबालिग क्रिकेटरों की ओर से लगाए गए यौन दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच का भी जिक्र है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच लंबित होने के बावजूद सस्पेंशन हटा दिया गया।
जस्टिस मनीष शर्मा ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए संबंधित पक्षों से 6 हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने फिलहाल जांच के दौरान शत्रुघ्न तिवारी पर ये अंतरिम पाबंदियां लगाई हैं।
सस्पेंशन हटाने के आदेश को दी गई है चुनौती
मामला भरतपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई से जुड़ा है। याचिका के मुताबिक, महिलाओं और नाबालिग क्रिकेटरों ने शत्रुघ्न तिवारी के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार की शिकायतें की थीं।
इन शिकायतों की जांच के बीच 18 जून 2026 को भरतपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन और उसके पदाधिकारियों को अस्थायी तौर पर सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के एडमिनिस्ट्रेटर ने 1 अगस्त को आदेश जारी कर यह सस्पेंशन हटा दिया था।
शिखा शर्मा ने सस्पेंशन हटाने के इसी आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
FIR भी दर्ज होने का हवाला दिया गया
महिला क्रिकेटर की ओर से कहा गया कि 1 अगस्त को सस्पेंशन हटाने से पहले मामले से जुड़े कानूनी नियमों का ध्यान नहीं रखा गया।
याचिका में यह भी बताया गया कि मामले में FIR नंबर 0295/2026 दर्ज है और इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(2) लगाई गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि शिकायतों की जांच पूरी होने से पहले ही सस्पेंशन हटा दिया गया।
उनका यह भी कहना है कि इस आदेश के खिलाफ राजस्थान स्पोर्ट्स एक्ट में अपील का कोई दूसरा रास्ता नहीं है। इसी वजह से उन्होंने हाईकोर्ट से दखल देने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर 6 हफ्ते में जवाब मांगा
जस्टिस मनीष शर्मा ने याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे 6 हफ्ते में जवाब मांगा है। इसके बाद मामले की फिर सुनवाई होगी।
फिलहाल हाईकोर्ट ने यौन दुर्व्यवहार के आरोपों पर कोई फैसला नहीं दिया है। अभी कोर्ट के सामने सस्पेंशन हटाने के आदेश और उससे जुड़ी प्रक्रिया का मामला है।
जांच के दौरान अहम फैसले नहीं ले सकेंगे सचिव
हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करने के साथ ही भरतपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव शत्रुघ्न तिवारी को जांच पूरी होने तक कोई अहम फैसला लेने से रोक दिया है।
साथ ही उन्हें एसोसिएशन के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ नहीं करने और जांच में सहयोग करने को कहा है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता या किसी गवाह को डराने-धमकाने को लेकर भी पाबंद किया है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। ये पाबंदियां जांच पूरी होने तक लागू रहेंगी। मामले की अगली सुनवाई 6 हफ्ते बाद होगी।
