आयोजन समिति, छात्र समन्वयकों और कोर कमेटी के सदस्यों ने साझा किए अनुभव, बोले-पारले ने सिखाया नेतृत्व, टीमवर्क और चुनौतियों से निपटना
जयपुर। कानोरिया स्कूल ऑफ लॉ फॉर विमेन, जयपुर में 8 और 9 सितंबर 2026 को आयोजित पारले 6.0 डिबेट प्रतियोगिता के सफल समापन के बाद आयोजन से जुड़ी टीम के सदस्यों के योगदान और समर्पण को सम्मानित किया गया।
दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देशभर से 66 टीमों ने हिस्सा लिया था। कार्यक्रम के सफल संचालन में फैकल्टी मेंटर्स, आयोजन समिति, कोर कमेटी, छात्र समन्वयकों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. वर्तिका अरोड़ा के नेतृत्व में आयोजित पारले 6.0 का आयोजन राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग (RSHRC) के चेयरमैन जी.आर. मूलचंदानी के सहयोग से हुआ।
प्रतियोगिता में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्यार्थियों ने भाग लेकर शोध, तर्क, अभिव्यक्ति और कानूनी समझ का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के पीछे रही पूरी टीम
पारले 6.0 के सफल आयोजन के बाद टीम के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इतने बड़े स्तर के कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित करना उनके लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सीख और अनुभव से भरी यात्रा रही।
आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को प्रतिभागियों के साथ संवाद, निर्णायकों के साथ समन्वय, कार्यक्रम की समय-सारणी, तकनीकी व्यवस्थाओं, संचार और अंतिम समय में आने वाली चुनौतियों को संभालने जैसी कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ीं।
टीम के सदस्यों ने बताया कि अलग-अलग जिम्मेदारियों के बावजूद सभी ने एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर कार्यक्रम को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया।

डॉ. सुरभि पारख
“छोटा बीज अब बड़े मंच में बदल चुका है”
पारले की संयोजक डॉ. सुरभि पारख ने पारले की यात्रा को याद करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। उनके अनुसार, शुरुआत में बोया गया छोटा सा बीज अब एक बड़े मंच का रूप ले चुका है।
उन्होंने कहा कि देशभर से विद्यार्थी पारले में भाग लेने के साथ-साथ इसके अगले संस्करण का भी इंतजार करते हैं।
उनके अनुसार, पारले ने विद्यार्थियों को ज्ञान और तकनीकी कौशल के साथ टीमवर्क, धैर्य और हर परिस्थिति में आशावान रहने की सीख दी है।
उन्होंने पारले के संस्थापक सदस्य के रूप में इससे जुड़े होने पर गर्व व्यक्त किया।

दीप्ति अग्रवाल
कम समय में आयोजन की तैयारी बनी बड़ी चुनौती
कोर कमेटी की सदस्य दीप्ति अग्रवाल ने बताया कि पारले 6.0 के आयोजन के दौरान कम समय में योजना, समन्वय और क्रियान्वयन करना अपने आप में एक चुनौती था।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग टीमों के साथ संवाद बनाए रखना और अंतिम समय में होने वाले बदलावों के बावजूद सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रखना एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा।
उनके अनुसार, इस आयोजन ने टीमवर्क, संवाद और चुनौतियों को संभालने की क्षमता को मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि पारले ने उन्हें अपने शिक्षकों और साथी विद्यार्थियों के साथ कक्षा से अलग एक नया संबंध बनाने का अवसर भी दिया।

मीनल सिंह
छात्र कोर्डिनेटर के रूप में मिला नेतृत्व का अनुभव
कोर्डिनेटर मीनल सिंह ने पारले 6.0 में अपनी भूमिका को व्यक्तिगत और पेशेवर विकास का महत्वपूर्ण अनुभव बताया।
उन्होंने फैकल्टी मेंटर्स का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देशभर से आए विद्यार्थियों के बीच बौद्धिक आदान-प्रदान के लिए एक मंच तैयार करना उनके लिए बेहद संतोषजनक अनुभव रहा।
उन्होंने कहा कि इस पूरी यात्रा ने उन्हें अपनी क्षमताओं पर अधिक विश्वास करना सिखाया।

सौम्या शर्मा
तीन वर्षों की यात्रा ने सिखाई कई महत्वपूर्ण बातें
कोर्डिनेटर सौम्या शर्मा ने बताया कि पारले कोर कमेटी में पारले 4.0 से जुड़े रहना उनके लिए सीख, विकास और यादों से भरी यात्रा रही।
उन्होंने कहा कि हर संस्करण में कुछ नया सीखने को मिला और पारले 6.0 ने टीमवर्क, समन्वय, संवाद, समय प्रबंधन और जिम्मेदारी को और बेहतर तरीके से समझने का अवसर दिया।
उन्होंने प्रिंसिपल और फैकल्टी के निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि पारले से जुड़ी यादें उनके साथ लंबे समय तक रहेंगी।

तानिया खान
“तीन साल, अनगिनत सीख और यादें”
कोर्डिनेटर तानिया खान ने पारले में लगातार तीन वर्षों तक छात्र समन्वयक के रूप में काम करने के अनुभव को अपने कॉलेज जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि इस यात्रा ने उन्हें नेतृत्व, संवाद, समन्वय, समय प्रबंधन और जिम्मेदारी के साथ-साथ खुद पर और अपनी टीम पर विश्वास करना सिखाया।
उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि टीमवर्क, देर रात तक किया गया काम, चुनौतियां, हंसी और यादों ने पारले 6.0 को विशेष बना दिया।

कोर्डिनेटर पारुल राठौड़ ने टीम के प्रयासों को सराहा
पारले 6.0 की छात्र संयोजक पारुल राठौड़ ने कहा कि इस आयोजन का नेतृत्व करना उनके कॉलेज जीवन के सबसे समृद्ध अनुभवों में से एक रहा।
उन्होंने बताया कि महीनों की योजना से लेकर अंतिम समय में आने वाली चुनौतियों तक हर चरण ने उन्हें नेतृत्व, टीमवर्क, धैर्य और दृढ़ता का महत्व समझाया।
उन्होंने अपनी समर्पित टीम, विशेषकर जूनियर विद्यार्थियों के प्रयासों को आयोजन की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि पारले की विरासत को आगे बढ़ाना उनके लिए गर्व का विषय है।

66 टीमों की भागीदारी से राष्ट्रीय स्तर पर बनी पहचान
पारले 6.0 में 66 टीमों की भागीदारी रही। प्रारंभिक चरण के बाद 16 टीमों ने सेमीफाइनल में जगह बनाई, जबकि छह टीम फाइनल राउंड तक पहुंचीं।
दो दिनों तक चले इस आयोजन में प्रतिभागियों ने शोध, तार्किक क्षमता, अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। आयोजन के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और पुरस्कार प्रदान किए गए।
पारले 6.0 के सफल आयोजन के बाद टीम के सदस्यों ने इसे केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि नेतृत्व, टीमवर्क, समन्वय और व्यक्तिगत विकास का अनुभव बताया। आयोजन टीम के साझा अनुभवों में एक बात प्रमुख रूप से सामने आई कि इस पूरे सफर ने उन्हें कक्षा से बाहर वास्तविक परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाने और एक साथ मिलकर लक्ष्य हासिल करने की सीख दी।
8 और 9 सितंबर को आयोजित पारले 6.0 की सफलता के बाद आयोजन टीम का सम्मान इस दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता के पीछे काम करने वाले उन विद्यार्थियों और सदस्यों के योगदान को रेखांकित करता है, जिनकी मेहनत और समन्वय से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
Laws and Legals रहा मीडिया पार्टनर
पारले 6.0 में Laws and Legals ने मीडिया पार्टनर के रूप में सहभागिता की।
मीडिया पार्टनर के रूप में Laws and Legals ने आयोजन की गतिविधियों, प्रतिभागियों की उपलब्धियों और प्रतियोगिता से जुड़े प्रमुख पहलुओं को व्यापक कानूनी एवं शैक्षणिक समुदाय तक पहुंचाने में सहयोग किया।
इस साझेदारी ने पारले 6.0 को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने के साथ विद्यार्थियों और युवा कानूनी प्रतिभाओं की आवाज को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाई।
