नई दिल्ली। 14 साल पुराने धर्मस्थला छात्रा रेप-मर्डर केस में न्याय के लिए संघर्ष कर रही मां को अब सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद मिली है।
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के धर्मस्थला में 17 साल की छात्रा के 2012 के रेप-मर्डर केस की दोबारा जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को नई SIT बनाने और 3 महीने में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा है।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने यह आदेश पीड़ित छात्रा की मां की याचिका पर दिया। कोर्ट ने पिछली जांच के तरीके पर भी गंभीर सवाल उठाया और कहा कि-
‘पहले जिस तरह जांच हुई, उसने कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोर दिया’।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि नई SIT में पुराने जांच अधिकारियों को शामिल नहीं किया जाएगा। साथ ही बेलथंगडी पुलिस, कर्नाटक CID और CBI की पिछली जांच टीमों में शामिल रहे अधिकारी नई टीम का हिस्सा नहीं होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति पर इस मामले में पहले मुकदमा चल चुका है और जिसे बरी किया जा चुका है, उसकी आगे की जांच नहीं की जाएगी।
‘पीड़ित के साथ हुआ अन्याय कभी पूरा नहीं किया जा सकता‘
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में न्याय के महत्व पर भी टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा-
‘गलत तरीके से आरोपी बनाए गए व्यक्ति के साथ हुए अन्याय की भरपाई की जा सकती है। लेकिन बेरहमी से रेप और मर्डर की शिकार नाबालिग के साथ हुआ अन्याय कभी पूरा नहीं किया जा सकता। अगर समाज ऐसे जघन्य अपराध में सही जांच और असली अपराधियों को सजा दिलाकर न्याय नहीं देता, तो वह अपना कर्तव्य निभाने में असफल होगा।’
17 साल की छात्रा की रेप के बाद हुई थी हत्या
यह मामला कर्नाटक के धर्मस्थला के पास 2012 में हुई 17 साल की छात्रा की रेप और हत्या से जुड़ा है। 9 अक्टूबर 2012 को छात्रा कॉलेज से लौटते समय लापता हुई थी। अगले दिन उसका शव मिला। इसके बाद पुलिस ने रेप और हत्या की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की।
शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने जांच की। बाद में मामला कर्नाटक CID को सौंपा गया, जिसने संतोष राव को आरोपी बनाया। इसके बाद 6 नवंबर 2013 को जांच CBI को सौंप दी गई।
CBI ने भी जांच के बाद संतोष राव के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट में केस चला।
हालांकि 16 जून 2023 को स्पेशल कोर्ट ने संतोष राव को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ ऐसा पर्याप्त सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि वह इस अपराध में शामिल थे।
संतोष राव के बरी होने के बाद क्या हुआ?
संतोष राव के बरी होने के बाद छात्रा के परिवार ने मामले की दोबारा जांच की मांग की। परिवार का कहना था कि पहले की जांच सही दिशा में नहीं हुई और असली आरोपी तक पहुंचने की कोशिश नहीं हुई।
ट्रायल कोर्ट ने भी अपने फैसले में जांच में हुई गलतियों का जिक्र किया था और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। इसके बाद परिवार ने मामले को आगे हाईकोर्ट में उठाया।
हाईकोर्ट ने भी दोबारा जांच की मांग खारिज की थी
संतोष राव के बरी होने के बाद पीड़ित छात्रा के परिवार ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की। परिवार ने मामले की दोबारा जांच की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने 30 अगस्त 2024 को याचिका खारिज कर दी और संतोष राव को बरी करने का फैसला बरकरार रखा।
कर्नाटक हाईकोर्ट से भी न्याय नहीं मिलने के बाद पीड़ित छात्रा की मां ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 21 सितंबर 2026 को कोर्ट ने नई SIT से मामले की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया है।
पिछली जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली जांच के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह इस मामले की जांच हुई, उसने उसकी अंतरात्मा को झकझोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के तरीके से पीड़ित नाबालिग के साथ न्याय नहीं हुआ। इन्हीं सवालों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब नई SIT से मामले की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया है।
नई SIT में पुराने जांच अधिकारी नहीं होंगे शामिल
सुप्रीम कोर्ट ने नई SIT के गठन को लेकर साफ निर्देश दिए हैं। टीम में आधुनिक जांच तकनीक का अनुभव रखने वाले अधिकारी शामिल किए जाएंगे और इसका नेतृत्व राज्य का एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बेलथंगडी पुलिस स्टेशन, कर्नाटक CID और CBI की पिछली जांच टीमों में शामिल रहे किसी भी अधिकारी को नई SIT में नहीं रखा जाएगा।
यानी इस बार जांच ऐसी टीम करेगी, जो पहले की जांच से जुड़ी नहीं रही है। कोर्ट ने नई टीम को मामले की जांच नए सिरे से करने का निर्देश दिया है।
पहले बरी हो चुके व्यक्ति की दोबारा जांच नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम बात यह भी साफ कर दी है। जिस व्यक्ति के खिलाफ इस मामले में पहले मुकदमा चल चुका है और जिसे बरी किया जा चुका है, उसके खिलाफ आगे की जांच नहीं की जाएगी।
यानी नई SIT का फोकस उस व्यक्ति के खिलाफ दोबारा जांच करने पर नहीं होगा। उसे छोड़कर मामले से जुड़े बाकी पहलुओं की नए सिरे से जांच की जाएगी।
3 महीने में जांच पूरी करनी होगी
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को नई SIT बनाने और जांच को 3 महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी जाएगी।
इस तरह करीब 14 साल पुराने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा जांच का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, कोर्ट ने पहले बरी हो चुके व्यक्ति की दोबारा जांच से साफ तौर पर इनकार किया है।