जयपुर। बाबा रामदेव जी महाराज की जयंती और तेजा दशमी के अवसर पर राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में सोमवार को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विशेष प्रसादी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
सामाजिक न्याय अधिवक्ता एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से लेकर बड़ी संख्या में युवा अधिवक्ताओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव दीपेश शर्मा के साथ ही सुशील शर्मा, अंशुमान सक्सेना, प्रियंका पालीवाल और हिमांशी मीणा बाबूलाल चौधरी, शीशराम यादव, सुनील कुमार सैनी, अतरसिंह गुर्जर, करतार सिंह, शेरसिंह महला सहित अन्य पदाधिकारियों एवं अधिवक्ताओं द्वारा बाबा रामदेव जी की प्रतिमा पर विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई।
इस दौरान बाबा रामदेव जी महाराज को भोग अर्पित कर सभी के सुख-समृद्धि की कामना की गई।

पूजा-अर्चना के बाद हुआ प्रसादी वितरण
पूजा-अर्चना के बाद हाईकोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के लिए खीर और मालपुआ की प्रसादी का वितरण किया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ बड़ी संख्या में युवा अधिवक्ताओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की और प्रसादी ग्रहण की।
अधिवक्ता शेरसिंह महला के अनुसार बाबा रामदेव जी महाराज की जयंती के अवसर पर प्रत्येक वर्ष इस प्रकार के प्रसादी कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी भव्य मालपुआ प्रसादी का आयोजन किया गया।

आयोजन में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
प्रसादी वितरण और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में बाबूलाल चौधरी, शीशराम यादव, सुनील कुमार सैनी, अतरसिंह गुर्जर, करतार सिंह, शेरसिंह महला, अनिल पूनिया, इन्द्रेश मीणा, अर्जुन दायमा, इन्द्रपाल जाखड़, जीतेन्द्र सिंह, निखिल शर्मा और जितेंद्र चौधरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इनके द्वारा कार्यक्रम की विभिन्न व्यवस्थाओं के साथ प्रसादी वितरण की जिम्मेदारी संभाली गई।
कार्यक्रम में शामिल अधिवक्ताओं और अन्य उपस्थित लोगों के लिए प्रसादी की व्यवस्था की गई।

हाईकोर्ट परिसर में दिखा श्रद्धा और सहभागिता का माहौल
बाबा रामदेव जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता का माहौल देखने को मिला।
वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं ने एक साथ कार्यक्रम में शामिल होकर पूजा-अर्चना की और प्रसादी ग्रहण की।
कार्यक्रम के दौरान महिला अधिवक्ताओं ने भी उत्साह से भाग लिया.
आयोजकों ने कहा कि इस तरह के आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ अधिवक्ता समुदाय के बीच आपसी भाईचारे, संवाद और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने का माध्यम भी हैं।

