जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में जोधपुर में गोचर भूमि के संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक सराहनीय पहल सामने आई।
सुनवाई के दौरान जब हाईकोर्ट ने जोधपुर में बढ़ते कंक्रीटीकरण और घटती हरियाली पर चिंता जताई, तो अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी ने खुद पौधरोपण की पहल का प्रस्ताव रख दिया। इस दौरान उन्होंने पौधे लगाने का संकल्प भी लिया।
दरअसल, जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ के सामने जोधपुर के खोखरिया क्षेत्र के पास गोचर भूमि पर प्रस्तावित STP प्लांट का मामला था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विकास के साथ पर्यावरण और शहर की हरियाली को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि ‘विकास जरूरी है, लेकिन शहर को हरा-भरा और पर्यावरण की दृष्टि से संतुलित रखना भी उतना ही जरूरी है’।
हाईकोर्ट की इस चिंता के बाद कोर्ट रूम में ही याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल करते हुए 100 पौधे लगाने का संकल्प लिया।
इस पहल के जरिए अधिवक्ता ने सिर्फ कोर्ट में पर्यावरण संरक्षण की बात नहीं कही बल्कि खुद भी इसमें योगदान देने का संकल्प लिया। यानी 100 पौधे लगाने की यह पहल शहर में हरियाली बढ़ाने के साथ पर्यावरण के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी का भी संदेश देती है।
‘विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन जरूरी’
गोचर भूमि के संरक्षण को लेकर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जोधपुर में बढ़ते कंक्रीटीकरण पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि विकास के नाम पर शहर लगातार कंक्रीट के जंगल में बदलता जा रहा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि शहर के पर्यावरण और आसपास की प्रकृति को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। साथ ही कानूनी बिरादरी से भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे आने की अपील की।
अधिवक्ता ने आगे बढ़कर रखा पौधरोपण का प्रस्ताव
हाईकोर्ट की इसी चिंता के बाद याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी ने पौधरोपण की पहल का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि वह जोधपुर को ग्रीन और क्लीन बनाने की दिशा में खुद भी कदम उठाना चाहते हैं।
उन्होंने याचिकाकर्ता की सहमति से कोर्ट को बताया कि अगर राज्य प्रशासन पौधरोपण के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध कराता है, तो याचिकाकर्ता और वह अपनी ओर से 50-50 पौधे लगाएंगे।
इस तरह कुल 100 पौधे लगाने का संकल्प रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि पौधरोपण के बाद इसकी तस्वीरें और रिपोर्ट अगली सुनवाई में कोर्ट के सामने पेश की जाएगी।
हाईकोर्ट ने अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी की पहल को सराहा
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में पर्यावरण और हरियाली को लेकर चिंता जाहिर की तो अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी ने इसे सिर्फ बहस तक सीमित नहीं रखा।
उन्होंने खुद पौधे लगाने का संकल्प लेकर इस दिशा में अपनी ओर से कदम बढ़ाया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के साथ मिलकर 100 पौधे लगाने की यह पहल जोधपुर को ग्रीन और क्लीन बनाने की कोशिश का हिस्सा होगी।
हाईकोर्ट ने भी अधिवक्ता और याचिकाकर्ता की इस पहल की सराहना की। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिए कि प्रशासन पौधरोपण के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध कराए।
इस पहल का उद्देश्य सिर्फ पौधे लगाना नहीं, बल्कि शहर में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत स्तर पर भी जिम्मेदारी लेने का संदेश देना है।
29 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
दरअसल, जोधपुर के खोखरिया क्षेत्र के पास गोचर भूमि पर प्रस्तावित STP प्लांट को लेकर यह जनहित याचिका दायर की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आदेश की पालना के लिए अतिरिक्त निर्देश लेने के लिए समय मांगा गया। कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया और मामले को अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया।
गोचर भूमि के संरक्षण का कानूनी सवाल अपनी जगह है, लेकिन इस सुनवाई में पर्यावरण को लेकर एक सकारात्मक पहल भी सामने आई।
हाईकोर्ट की चिंता के बाद अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी ने याचिकाकर्ता के साथ मिलकर 100 पौधे लगाने का जो संकल्प लिया, यह बताता है कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी सिर्फ सरकारी एजेंसियों की नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भी है।