जयपुर। करीब 11 साल पहले धमकी के मामले में तत्कालीन लोक अभियोजक आरएस राघव और अनिता जैन को दी गई सुरक्षा फिलहाल जारी रहेगी।
राजस्थान हाईकोर्ट ने दोनों को सुरक्षा देने के 18 अगस्त 2015 और 20 अगस्त 2015 के आदेश वापस लेने की राज्य सरकार की मांग खारिज कर दी है।
जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने कहा कि संबंधित क्रिमिनल केस में अभी ट्रायल पूरा नहीं हुआ है और अंतिम फैसला भी नहीं आया है। ऐसे में केवल यह आधार कि आरएस राघव का बयान कोर्ट में दर्ज हो चुका है, सुरक्षा वापस लेने के लिए पर्याप्त नहीं है।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से करीब 11 साल पुराने सुरक्षा संबंधी आदेश वापस लेने की मांग की थी। सरकार का कहना था कि अब सुरक्षा जारी रखने की जरूरत नहीं है।
हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और पुराने आदेशों के तहत उनको दी गई सुरक्षा को जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया।
राज्य की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ शर्मा और समी खान ने, एएजी भुवनेश शर्मा की ओर से पक्ष रखा।
वहीं आरएस राघव की ओर से अधिवक्ता राकेश कुमार, वीरेंद्र गोदारा, जितेंद्र शर्मा, प्रकाश चंद, राजीव सोगरवाल, वीरेंद्र सिंह, अंकुर सिंह तोमर, गौरव तंवर, अमरेंद्र कुमार, लेखपाल सिंह, विपिन कुमार और प्रबल प्रताप सिंह ने पैरवी की।
2015 में सामने आया था धमकी का मामला
यह मामला विक्रम सिंह शेखावत बनाम राजस्थान सरकार से जुड़े एक आपराधिक केस का है। वर्ष 2015 में इस केस के दौरान तत्कालीन लोक अभियोजक आरएस राघव और अनिता जैन को सुरक्षा की जरूरत को लेकर मामला हाईकोर्ट के सामने आया था। उस समय अनिता जैन डर के कारण पुलिस के सामने अपना बयान देने के लिए तैयार नहीं थीं।
20 अगस्त 2015 को तत्कालीन जस्टिस एमएन भंडारी की कोर्ट में यह मामला पहुंचा। कोर्ट ने आरएस राघव और अनिता जैन की सुरक्षा को देखते हुए दोनों को पुलिस सुरक्षा देने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने खास तौर पर अनिता जैन के बयान को लेकर भी निर्देश दिए। वह डर की वजह से पुलिस के सामने बयान नहीं देना चाहती थीं। इसलिए कोर्ट ने कहा कि उनका बयान किसी न्यायिक अधिकारी के सामने दर्ज कराया जाए, ताकि वह बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें।
सुरक्षा मिलने के बाद अनिता जैन ने दिया बयान
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अनिता जैन ने न्यायिक अधिकारी के सामने बयान देने की सहमति दी। उसी दिन उनका बयान दर्ज किया गया और बाद में इसे कोर्ट के सामने पेश किया गया।
हाईकोर्ट ने इसके साथ ही पुलिस को आरएस राघव और अनिता जैन दोनों की सुरक्षा जारी रखने का निर्देश दिया था। यह सुरक्षा अगले आदेश तक जारी रखने को कहा गया था।
यानी उस समय कोर्ट का मकसद यह था कि धमकी की शिकायत से जुड़े इस केस में आरएस राघव और अनिता जैन बिना डर के अपनी बात पुलिस और कोर्ट के सामने रख सकें। यही वजह है कि वर्ष 2015 में दी गई सुरक्षा का मामला बाद में भी कोर्ट के सामने बना रहा।
11 साल बाद सरकार ने सुरक्षा हटाने की मांग की
अब साल 2026 में राज्य की ओर से सुरक्षा हटाने के लिए हाईकोर्ट में आवेदन किया गया। सरकार की ओर से कहा गया कि आर.एस. राघव का बयान संबंधित क्रिमिनल कोर्ट में दर्ज हो चुका है। साथ ही इंटेलिजेंस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि अब सुरक्षा जारी रखने का पर्याप्त आधार नहीं है।
सरकार ने इसी आधार पर 18 अगस्त 2015 और 20 अगस्त 2015 के पुराने आदेश वापस लेने और आरएस राघव को दी जा रही सुरक्षा समाप्त करने की मांग की।
राघव ने कहा- सिर्फ बयान दर्ज होने से खतरा खत्म नहीं
आरएस राघव की ओर से सरकार की इस दलील का विरोध किया गया। उनके अधिवक्ता ने कहा कि भले ही उनका बयान कोर्ट में दर्ज हो चुका है, लेकिन संबंधित क्रिमिनल ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है। मामले में अंतिम फैसला भी नहीं आया है।
दलील दी गई कि वर्ष 2015 में हाईकोर्ट ने जिस खतरे को गंभीर मानते हुए सुरक्षा दी थी, केवल बयान दर्ज होने के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि वह खतरा अब पूरी तरह खत्म हो गया है।
‘सिर्फ बयान दर्ज होना काफी नहीं, ट्रायल पूरा होना अभी बाकी‘
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि संबंधित क्रिमिनल ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है और मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरएस राघव का कोर्ट में बयान दर्ज हो जाना जरूर एक बात है, जिस पर सुरक्षा को लेकर विचार किया जा सकता है। लेकिन सिर्फ बयान दर्ज हो जाने से यह नहीं माना जा सकता कि अब सुरक्षा की जरूरत नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह भी देखा कि पुलिस की रिपोर्ट में वर्ष 2015 के बाद आरएस राघव को नवनीत की ओर से किसी सीधे या अप्रत्यक्ष खतरे की बात सामने नहीं आई है। लेकिन दूसरी तरफ, जिस क्रिमिनल केस से यह पूरा मामला जुड़ा है, उसका ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है और अंतिम फैसला भी नहीं आया है।
ऐसे में केवल बयान दर्ज हो जाने के आधार पर करीब 11 साल से चली आ रही सुरक्षा वापस लेना उचित नहीं होगा। हाईकोर्ट ने इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए माना कि फिलहाल सुरक्षा हटाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
सरकार की अर्जी खारिज, सुरक्षा आदेश बरकरार
हाईकोर्ट ने राज्य की ओर से दायर अर्जी खारिज कर दी। इसका मतलब है कि 18 अगस्त 2015 और 20 अगस्त 2015 को आर.एस. राघव को सुरक्षा देने के जो आदेश जारी हुए थे, वे वापस नहीं लिए जाएंगे।
यानी हाईकोर्ट ने सुरक्षा को हमेशा के लिए जारी रखने का कोई नया आदेश नहीं दिया है।
हाईकोर्ट ने सिर्फ इतना माना है कि मौजूदा परिस्थितियों में, जब क्रिमिनल ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है, केवल बयान दर्ज होने के आधार पर वर्ष 2015 में दी गई सुरक्षा वापस लेना उचित नहीं होगा।