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ब्रेकिंग: राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा आदेश-20 अक्टूबर तक रेट ट्रिब्यूनल में प्रशासनिक सदस्य नियुक्त करे सरकार, बार-बार तबादलों से परेशान कर्मचारी को भी राहत

GST Order Must Be Duly Communicated, Not Merely Uploaded on Portal: Rajasthan High Court Allows Delayed Appeal

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सर्विसेज अपीलेट ट्रिब्यूनल में प्रशासनिक सदस्य का पद रिक्त होने को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को 20 अक्टूबर 2026 तक जोधपुर में प्रशासनिक सदस्य की नियुक्ति पूरी करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने सरकार से नियुक्ति से संबंधित आदेश की प्रति भी 20 अक्टूबर तक अदालत के समक्ष पेश करने को कहा है।

इसी मामले में बार-बार तबादलों से परेशान कर्मचारी नरसी मीणा को भी हाईकोर्ट ने राहत दी है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता नरसी मीणा को उदयपुर या उसके आसपास किसी अन्य पदस्थापन के लिए संबंधित विभाग के निदेशक के समक्ष अभ्यावेदन देने की छूट दी है।

कर्मचारी को प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने के तीन दिन के भीतर अभ्यावेदन देना होगा, जबकि निदेशक को उस पर सात दिन के भीतर निर्णय लेना होगा।

ट्रिब्यूनल में प्रशासनिक सदस्य का पद खाली

बार बार तबादलों से परेशान याचिकाकर्ता नरसी मीणा की याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि संबंधित विवाद राजस्थान सिविल सर्विसेज अपीलेट ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में आता है।

लेकिन ट्रिब्यूनल में प्रशासनिक सदस्य का पद रिक्त होने के कारण मामला वहां संज्ञान में नहीं लिया जा सका।

यह स्थिति सामने आने के बाद राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने निर्देश प्राप्त कर अदालत को बताया कि जोधपुर स्थित ट्रिब्यूनल में प्रशासनिक सदस्य की नियुक्ति 20 अक्टूबर 2026 तक या उससे पहले कर दी जाएगी।

सरकार को 20 अक्टूबर तक नियुक्ति पूरी करने का आदेश

राज्य की ओर से दिए गए इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि जोधपुर स्थित राजस्थान सिविल सर्विसेज अपीलेट ट्रिब्यूनल में प्रशासनिक सदस्य की नियुक्ति की प्रक्रिया 20 अक्टूबर 2026 तक पूरी की जाए।

कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार से यह भी कहा कि प्रशासनिक सदस्य की नियुक्ति से संबंधित आदेश की प्रति 20 अक्टूबर 2026 तक हाईकोर्ट के समक्ष पेश की जाए।

मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार अग्रवाल और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने नरसी मीणा की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश दिया हैं.

हाईकोर्ट की दोहरी राहत-कर्मचारी को भी रास्ता, ट्रिब्यूनल को भी जल्द सदस्य

सुनवाई के दौरान कर्मचारी की ओर से कहा गया कि यदि उसे उदयपुर या उसके आसपास कोई अन्य कार्य अथवा पदस्थापन दिया जाता है, तो वह स्थानीय स्वशासन विभाग के निदेशक के समक्ष इस संबंध में अभ्यावेदन देने को तैयार है।

ऐसी स्थिति में उसने विशेष अपील को मेरिट के आधार पर आगे नहीं बढ़ाने की इच्छा जताई।

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने निदेशक, स्थानीय स्वशासन विभाग की ओर से अदालत को बताया कि कर्मचारी को बार-बार तबादलों के कारण हो रही कठिनाइयों को देखते हुए उसके अभ्यावेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।

इसके बाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी को तीन दिन में अभ्यावेदन देने की अनुमति दी।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि निदेशक अभ्यावेदन प्राप्त होने के बाद सात दिन के भीतर सभी आधारों पर कानून के अनुसार निर्णय लें। साथ ही, निर्णय लेते समय हाईकोर्ट के आदेश में की गई टिप्पणियों से अधिकारी प्रभावित नहीं होगा।

अभ्यावेदन पर फैसला होने तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं

हाईकोर्ट ने कर्मचारी को अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट किया कि इस बीच उसके खिलाफ कोई coercive action नहीं लिया जाएगा।

यानी अभ्यावेदन पर विभागीय स्तर पर निर्णय होने तक कर्मचारी के खिलाफ जबरन या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।

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