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राजस्थान में रेलवे फाटकों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट की मुहर! रेलवे की रिपोर्ट से संतुष्ट कोर्ट ने 8 साल पुरानी PIL की बंद, कहा-अब नए आदेशो की जरूरत नहीं

Rajasthan High Court Closes 8-Year-Old Railway Crossing PIL, Says No Further Directions Needed

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने रेलवे फाटकों पर ट्रैफिक जाम और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए शुरू की गई जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया है।

चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की बेंच ने रेलवे की ओर से पेश कंप्लायंस रिपोर्ट और सुरक्षा इंतजामों पर संतुष्टि जताते हुए कहा कि अब मामले में और निर्देश देने की जरूरत नहीं है।

सुनवाई के दौरान रेलवे ने बताया कि ब्रॉडगेज नेटवर्क पर बिना कर्मचारी वाले रेलवे फाटक खत्म कर दिए गए हैं। वहीं, कोटा डिवीजन में 80 रेलवे फाटकों को हटाकर उनकी जगह रोड ओवरब्रिज (ROB) या रोड अंडरब्रिज (RUB) बनाने की मंजूरी दी गई है।

हाईकोर्ट ने माना कि याचिका में उठाई गई समस्याओं का काफी हद तक समाधान हो चुका है। रेलवे की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ट्रैफिक की समस्या के स्थायी समाधान के लिए उठाए गए कदमों को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका बंद कर दी।

केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) भारत व्यास ने पैरवी की। उनके साथ सीनियर सेंट्रल गवर्नमेंट काउंसिल राकेश चौधरी पेश हुए। वहीं, रेलवे और अन्य संबंधित विभागों की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) शिखा शर्मा, अधिवक्ता विशाल कुमार, अमित कुरी, पिनाकी पी. पालिवाल, आयुष शर्मा और धर्मा राम ने पक्ष रखा।

2018 में दायर हुई थी जनहित याचिका

यह मामला राजस्थान के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में रेलवे लेवल क्रॉसिंग के कारण होने वाली परेशानियों से जुड़ा था। वर्ष 2018 में दायर जनहित याचिका में खास तौर पर जयपुर शहर की स्थिति उठाई गई थी।

याचिका में रेलवे फाटकों पर काउंटडाउन टाइमर लगाने, पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती और ट्रैफिक की समस्या का स्थायी समाधान करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

मूल याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट ने 30 जनवरी 2024 को इस मामले को स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका में बदल दिया था।

रेलवे फाटक बंद होने से जाम और सुरक्षा का उठा था मुद्दा

याचिका में बताया गया था कि रेलवे फाटक बंद होने से सड़क यातायात प्रभावित होता है और वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।इससे लोगों का समय बर्बाद होने के साथ प्रदूषण भी बढ़ता है।

इसके अलावा याचिका में रेलवे क्रॉसिंग पर हादसों की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत भी उठाई गई थी।

रेलवे ने कोर्ट में पेश की सुरक्षा उपायों की रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) भारत व्यास ने रेलवे की कंप्लायंस रिपोर्ट पेश की। इसमें राजस्थान के रेलवे नेटवर्क पर फाटकों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे में किए गए सुधारों की जानकारी दी गई।

रेलवे ने बताया कि राज्य में ज्यादातर रेल नेटवर्क उत्तर पश्चिम रेलवे के अधीन है, जबकि कोटा डिवीजन पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत आता है।

रिपोर्ट में अलग-अलग रेलखंडों पर बिना कर्मचारी वाले फाटकों की स्थिति और उन्हें सुरक्षित बनाने के लिए किए गए उपायों का ब्योरा दिया गया।

ब्रॉडगेज पर बिना कर्मचारी वाले फाटक खत्म

रेलवे की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर पश्चिम रेलवे के पूरे ब्रॉडगेज नेटवर्क पर अब कोई भी ऐसा रेलवे फाटक नहीं है, जहां कर्मचारी तैनात न हों। इन फाटकों पर या तो कर्मचारियों की तैनाती की गई है, इंटरलॉकिंग जैसी तकनीकी व्यवस्था की गई है या निर्माण के जरिए उन्हें खत्म कर दिया गया है।

मीटरगेज रेलखंडों पर अभी 26 बिना कर्मचारी वाले रेलवे फाटक हैं। रेलवे ने यहां ‘स्टॉप एंड प्रोसीड’ प्रक्रिया लागू की है। इसके तहत ट्रेन को फाटक से पहले पूरी तरह रोकना होता है। ट्रैक साफ होने की पुष्टि के बाद ही ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाती है।

कोटा में 80 रेलवे फाटकों की जगह बनेंगे ओवरब्रिज-अंडरब्रिज

रिपोर्ट में कोटा मंडल की स्थिति भी बताई गई। रेलवे के अनुसार, यहां कोई भी बिना कर्मचारी वाली रेलवे क्रॉसिंग नहीं है। हालांकि, 114 ऐसी क्रॉसिंग हैं जहां कर्मचारी तैनात हैं।

इनमें से 80 क्रॉसिंग को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए रोड ओवरब्रिज (ROB) और रोड अंडरब्रिज (RUB) बनाने की मंजूरी दी जा चुकी है। इनका निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

ऐसी व्यवस्था से रेलवे फाटक बंद होने के कारण सड़क यातायात में आने वाली रुकावट और वाहनों की कतारों की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, रिपोर्ट में 80 फाटकों को खत्म करने के लिए मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है, सभी निर्माण कार्य पूरे होने की नहीं।

चेतावनी बोर्ड, स्पीड ब्रेकर और फेंसिंग भी लगाई

रेलवे ने फाटकों तक पहुंचने वाली सड़कों पर चेतावनी बोर्ड, रंबल स्ट्रिप और स्पीड ब्रेकर लगाने की जानकारी दी। रेलवे लाइनों के आसपास रहने वाले लोगों को जागरूक करने के लिए गांवों और बस्तियों में अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

इसके अलावा, रेलवे ट्रैक पर मवेशियों के आने और लोगों के अनधिकृत रूप से ट्रैक पार करने की घटनाएं रोकने के लिए ज्यादा आवाजाही वाले रेलखंडों पर फेंसिंग की गई है।

वन्यजीवों के आवास के पास विशेष फेंसिंग के साथ ट्रेन की अधिकतम अनुमत गति 130 किलोमीटर प्रति घंटे से घटाकर 80 किलोमीटर प्रति घंटा करने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई।

हाईकोर्ट ने कहा- अब और निर्देश की जरूरत नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने रेलवे और केंद्र सरकार की ओर से पेश कंप्लायंस रिपोर्ट पर विचार करने के बाद सुरक्षा इंतजामों पर संतोष जताया।

हाईकोर्ट को बताया गया कि ब्रॉडगेज नेटवर्क पर बिना कर्मचारी वाले रेलवे फाटक खत्म कर दिए गए हैं, जबकि मीटरगेज सेक्शन में सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा है।

इसके अलावा, कई रेलवे क्रॉसिंग को खत्म करने के लिए रोड ओवरब्रिज (ROB) और रोड अंडरब्रिज (RUB) बनाने की मंजूरी दी गई है।

बेंच ने माना कि जनहित याचिका में उठाए गए मुख्य मुद्दों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का काफी हद तक समाधान किया जा चुका है। ऐसे में कोर्ट ने कंप्लायंस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि अब मामले में और निर्देश जारी करने की जरूरत नहीं है।

रेलवे की कार्रवाई से संतुष्ट हाईकोर्ट, याचिका बंद

रेलवे की ओर से उठाए गए सुरक्षा उपायों और ट्रैफिक की समस्या के समाधान के लिए की जा रही कार्रवाई को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में आगे किसी निर्देश की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही इस मामले में हाईकोर्ट की कार्यवाही खत्म हो गई।

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