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जयपुर स्थित पूर्वजों की धर्मशाला तोड़ने की कार्रवाई पर राजस्थान हाईकोर्ट ने लगाई रोक, सरकार से 3 हफ्ते में मांगा जवाब; 28 साल पहले केस जीतने के बावजूद दिया था तोड़ने का आदेश

Rajasthan High Court Stays Dharamshala Demolition, Seeks State Government's Reply

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में स्थित पूर्वजों की धर्मशाला को गिराने के राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

जस्टिस रवि चिरानिया ने अनिल कुमार जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 3 हफ्ते में जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि धर्मशाला को लेकर 1995 में दायर सिविल मुकदमे में 13 अगस्त 1998 को उनके पक्ष में फैसला आया था।

इसके बावजूद अधिकारियों ने 12 अक्टूबर 2026 को धर्मशाला गिराने का आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट ने फिलहाल विवादित आदेश के आधार पर कार्रवाई करने से रोक दिया है।

याचिकाकर्ता अनिल कुमार जैन की ओर से अधिवक्ता स्वप्निल सिंह पटेल और अधिवक्ता शिवांगी सिंह पटेल ने पैरवी की।

धर्मशाला गिराने के नोटिस को दी चुनौती

अनिल कुमार जैन ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने 12 अक्टूबर 2026 को जारी उस नोटिस को चुनौती दी, जिसके जरिए संबंधित संपत्ति, विशेष रूप से उनके पूर्वजों की धर्मशाला, को गिराने की कार्रवाई प्रस्तावित थी

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह धर्मशाला उनके पूर्वजों की है और इसे गिराने की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

1998 में सिविल कोर्ट ने सुनाया था फैसला

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि अनिल कुमार जैन ने वर्ष 1995 में इस संपत्ति को लेकर सिविल कोर्ट में सिविल मुकदमा संख्या 34/2/95 दायर किया था। इस मामले में 13 अगस्त 1998 को उनके पक्ष में फैसला और डिक्री पारित हुई थी।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब संपत्ति को लेकर पहले ही उनके पक्ष में फैसला आ चुका है, तो अधिकारियों को धर्मशाला गिराने की कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

पहले नोटिस का जवाब भी दिया था

याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि अनिल कुमार जैन को 27 मई 2026 को भी नोटिस मिला था। इसके जवाब में उन्होंने 29 मई 2026 को अपना पक्ष रखते हुए सिविल कोर्ट के फैसले का हवाला दिया था।

इसके बावजूद अधिकारियों ने 12 अक्टूबर 2026 को धर्मशाला गिराने का आदेश जारी कर दिया। इसी आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद राज्य सरकार और संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने नोटिस सामान्य और रजिस्टर्ड डाक से भेजने को कहा है। प्रतिवादियों को 3 हफ्ते में जवाब देना होगा।

धर्मशाला तोड़ने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक

हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए अधिकारियों को 12 अक्टूबर 2026 के आदेश के आधार पर कार्रवाई करने से रोक दिया है।

यह रोक याचिका के लंबित रहने तक लागू रहेगी। यानी फिलहाल अधिकारी विवादित आदेश के तहत धर्मशाला को नहीं गिरा सकेंगे।

हालांकि, कोर्ट ने अभी संपत्ति के मालिकाना हक या विवाद के अंतिम निपटारे पर कोई फैसला नहीं सुनाया है। फिलहाल राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखना है। इसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।

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