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रिटायरमेंट के बाद जांच लंबित होने पर भी पेंशन-ग्रेच्युटी नहीं रोक सकते: राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 60 दिन में प्रोविजनल पेंशन और 50% ग्रेच्युटी जारी करने के आदेश

Rajasthan High Court Directs Release of Provisional Pension and 50% Gratuity Within 60 Days

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि किसी रिटायर सरकारी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय या न्यायिक कार्यवाही लंबित होने के आधार पर उसकी प्रोविजनल पेंशन और 50% ग्रेच्युटी ने रोकी जा सकती।

जस्टिस कुलदीप माथुर ने सहकारिता विभाग से रिटायर हुए अर्जुन सिंह चारण की याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों को जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद 60 दिन के भीतर प्रोविजनल पेंशन और 50% ग्रेच्युटी जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवर दान उज्ज्वल ने पैरवी की। वहीं, राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) आई.आर. चौधरी और अधिवक्ता विक्रम चौधरी पेश हुए।

रिटायरमेंट के दिन ही थमा दी गई थी चार्जशीट

याचिकाकर्ता अर्जुन सिंह चारण राजस्थान सरकार के सहकारिता विभाग में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। वे 31 दिसंबर 2025 को रिटायर हुए थे।

अर्जुन सिंह चारण का कहना है कि रिटायरमेंट के दिन ही उन्हें राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत चार्जशीट दी गई थी।

चार्जशीट को चुनौती देते हुए उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने 20 जनवरी 2026 को चार्जशीट पर रोक लगा दी थी।

हाईकोर्ट ने चार्जशीट पर लगा दी थी रोक

चारण के मामले में 7 अप्रैल 2026 को विभाग ने रिकवरी का आदेश जारी कर दिया। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने 21 अप्रैल 2026 को संबंधित अधिकारियों को इस आदेश के आधार पर रिकवरी करने से रोक दिया। इसके बावजूद याचिकाकर्ता को प्रोविजनल पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने इन लाभों को जारी कराने के लिए नई याचिका दायर की।

सरकार ने दस्तावेज जमा नहीं करने की दलील दी

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि अर्जुन सिंह चारण के खिलाफ विभागीय कार्यवाही लंबित है। सरकार ने यह भी दलील दी कि उन्होंने प्रोविजनल पेंशन और ग्रेच्युटी जारी करने के लिए जरूरी सभी दस्तावेज जमा नहीं किए हैं।

सरकार का तर्क था कि जरूरी दस्तावेज मिलने तक इन लाभों को जारी करने का निर्देश नहीं दिया जाना चाहिए।

नियमों के तहत 50% ग्रेच्युटी का है प्रावधान

वहीं याचिकाकर्ता ने राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के Rule 90 और 12 अक्टूबर 2021 की राज्य सरकार की अधिसूचना का हवाला दिया।

उनका कहना था कि विभागीय या न्यायिक कार्यवाही लंबित रहने की स्थिति में रिटायर सरकारी कर्मचारी को प्रोविजनल पेंशन और 50% ग्रेच्युटी का लाभ मिलना चाहिए।

इसके बावजूद उन्हें न तो प्रोविजनल पेंशन दी गई और न ही 50 प्रतिशत ग्रेच्युटी जारी की गई। उन्होंने कोर्ट से पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़े लाभ जारी करने के निर्देश देने की मांग की।

जांच लंबित होना लाभ रोकने का आधार नहीं -हाईकोर्ट

जस्टिस कुलदीप माथुर ने मामले के तथ्यों और संबंधित नियमों पर विचार करते हुए कहा कि विभागीय या न्यायिक कार्यवाही लंबित होने पर भी रिटायर कर्मचारी को नियमों के तहत प्रोविजनल पेंशन और 50% ग्रेच्युटी का हक है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल विभागीय जांच लंबित होने या चार्जशीट को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला नहीं होने के कारण अधिकारी को इन लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता अर्जुन सिंह चारण की याचिका स्वीकार कर ली।

60 दिन में जारी करने होंगे पेंशन और ग्रेच्युटी के लाभ

हाईकोर्ट ने अर्जुन सिंह चारण को निर्देश दिया कि यदि उन्होंने जरूरी दस्तावेज पहले जमा नहीं किए हैं, तो उन्हें तुरंत जमा करें।

इसके बाद संबंधित अधिकारियों को राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 और 12 अक्टूबर 2021 की अधिसूचना के तहत प्रोविजनल पेंशन और 50% ग्रेच्युटी जारी करनी होगी। कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को 60 दिन के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया।

अपने आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि विभागीय कार्यवाही लंबित रहने का मतलब यह नहीं है कि रिटायर कर्मचारी को नियमों के तहत मिलने वाले प्रोविजनल पेंशन और ग्रेच्युटी के लाभ से पूरी तरह वंचित रखा जा सकता है।

हालांकि, कोर्ट का निर्देश प्रोविजनल पेंशन और 50% ग्रेच्युटी तक सीमित है, पूरी नियमित पेंशन और पूरी ग्रेच्युटी जारी करने का आदेश नहीं है।

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