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संतोकबा अस्पताल परिसर विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: CONFED का कब्जा बरकरार, JDA को 4 सप्ताह में देना होगा फैसला

Rajasthan High Court’s Big Order in Santokba Hospital Dispute: CONFED’s Possession to Continue, JDA Must Decide Within Four Weeks

8 साल पुराने विवाद में हाईकोर्ट सख्त-ट्रस्ट, तारा मेडिकोस और CONFED को सुनवाई का मौका देना होगा; तारा मेडिकोस की दवाइयां और जब्त सामान लौटाने का भी आदेश

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल परिसर में मेडिकल स्टोर और दुकानों को सील करने से जुड़े करीब आठ साल पुराने विवाद में अहम आदेश दिया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के अंतिम फैसले तक संबंधित मेडिकल स्टोर परिसर पर राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ (CONFED) का कब्जा बना रहेगा।

वहीं, JDA को संतोकबा दुर्लभजी ट्रस्ट, तारा मेडिकोस प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर विवाद पर नए सिरे से फैसला करना होगा.

जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस अनूप कुमार सिंघी की खंडपीठ ने संतोकबा अस्पताल सहित पांच अन्य की विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया हैं.

हाईकोटने इस मामले में जेडीए सहित सभी संबंधित पक्षों को 30 नवंबर 2026 तक जवाब पेश करने का आदेश दिया हैं.

इसके बाद JDA को चार सप्ताह के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करना होगा।

CONFED को सुने बिना नहीं हो सकता फैसला

विवाद का महत्वपूर्ण पहलू यह था कि JDA ने अगस्त 2018 में सील किए गए परिसर का कब्जा CONFED को सौंप दिया था।

इसके बाद JDA ट्रिब्यूनल ने अक्टूबर 2018 में कब्जा बहाल करने के आदेश दिए, लेकिन उस समय परिसर पर वास्तविक कब्जा रखने वाले CONFED को संबंधित अपीलों में पक्षकार नहीं बनाया गया था और उसे अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं मिला था।

हाईकोर्ट ने इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना।

हाईकोर्ट के सामने यह स्पष्ट था कि परिसर का वास्तविक कब्जा CONFED के पास है और वहां मेडिकल स्टोर संचालित किया जा रहा है।

ऐसे में कब्जे को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय से पहले CONFED को सुनवाई का अवसर मिलना आवश्यक है।

इसी आधार पर अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों व साक्ष्यों पर विचार करने के बाद JDA को नए सिरे से फैसला लेने का आदेश दिया.

1998 में रियायती दर पर मिली थी 3,048.790 वर्ग मीटर जमीन

JDA ने 17 अक्टूबर 1998 को संतोकबा दुर्लभजी ट्रस्ट को 3,048.790 वर्ग मीटर जमीन रियायती दर पर आवंटित की थी।

जमीन ब्लड बैंक और अन्य संबद्ध चिकित्सा गतिविधियों के संचालन के उद्देश्य से दी गई थी।

इसके बाद 19 दिसंबर 1998 को ट्रस्ट के पक्ष में लीज डीड निष्पादित हुई।

बाद में JDA ने आरोप लगाया कि आवंटन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए परिसर में बिना पूर्व अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

प्राधिकरण के अनुसार, परिसर में दुकानों, कैंटीन, पार्किंग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का संचालन किया जा रहा था।

JDA ने 13 जुलाई 2018 को नोटिस जारी कर ट्रस्ट से 15 दिनों के भीतर व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने को कहा।

इसके बाद 31 जुलाई 2018 को परिसर में तारा मेडिकोस के मेडिकल स्टोर सहित तीन दुकानों को सील कर दिया गया।

सीलिंग के बाद CONFED को सौंप दिया गया था कब्जा

JDA ने 3 अगस्त 2018 को एक और नोटिस जारी किया, जिसके तहत संबंधित कब्जाधारियों को दवाइयां और अन्य सामान निकालने का अवसर दिया जाना था।

रिकॉर्ड के अनुसार, 6 अगस्त 2018 को परिसर का खाली कब्जा CONFED को सौंप दिया गया, ताकि वहां रियायती दर पर मेडिकल स्टोर चलाया जा सके।

सीलिंग के समय परिसर में मौजूद दवाइयों, उपकरणों और अन्य वस्तुओं की सूची तैयार की गई थी। ये वस्तुएं भी सुपुर्दगी में दी गई थीं।

इसके बाद CONFED परिसर में मेडिकल स्टोर संचालित करता रहा।

ट्रिब्यूनल ने सीलिंग नोटिस रद्द किया, लेकिन कब्जे का विवाद जारी रहा

संतोकबा दुर्लभजी ट्रस्ट और तारा मेडिकोस ने JDA की कार्रवाई को चुनौती देते हुए अपील दायर की।

JDA के अपीलीय अधिकरण ने 23 अक्टूबर 2018 को 31 जुलाई के सीलिंग नोटिस को निरस्त करते हुए कब्जा बहाल करने के आदेश दिया.

साथ ही, 13 जुलाई 2018 के मूल नोटिस पर संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर कानून के अनुसार निर्णय लेने को कहा।

JDA और CONFED ने बाद में इन आदेशों को चुनौती दी।

संबंधित रिट याचिकाएं 29 मई 2019 को एकलपीठ ने खारिज कर दी थीं। इसके बाद मामला खंडपीठ के सामने आया.

हाईकोर्ट ने अब स्पष्ट किया है कि कब्जे की बहाली का अंतिम प्रश्न JDA के नए फैसले पर निर्भर करेगा।

अदालत ने फिलहाल न तो ट्रस्ट और न ही तारा मेडिकोस को तत्काल कब्जा सौंपने का आदेश दिया है।

लीज को फ्रीहोल्ड मानने की दलील

सुनवाई के दौरान ट्रस्ट की ओर से दलील दी गई कि उसने एकमुश्त लीज राशि जमा की थी और जमीन की लीज फ्रीहोल्ड प्रकृति की हो गई थी। ट्रस्ट ने इसी आधार पर JDA के नोटिस को चुनौती दी।

इसके विपरीत, JDA की ओर से कहा गया कि लीज डीड आवंटन की मूल शर्तों को समाप्त नहीं करती और जमीन लीजहोल्ड थी, फ्रीहोल्ड नहीं।

प्राधिकरण ने अपनी कार्रवाई को आवंटन की शर्तों के कथित उल्लंघन से जुड़ा बताया।

हाईकोर्ट ने इन विवादित मुद्दों पर अंतिम निष्कर्ष देने के बजाय JDA को निर्देश दिया कि वह सभी पक्षों के जवाब, दस्तावेजों और साक्ष्यों पर विचार करके स्वतंत्र रूप से निर्णय ले।

तारा मेडिकोस को दवाइयां और सामान लौटाने का आदेश

इस मामले में हाईकोर्ट ने तारा मेडिकोस को राहत देते हुए CONFED को आदेश दिया कि सीलिंग के समय तैयार सूची के अनुसार कंपनी की दवाइयां, उपकरण, सामान और अन्य वस्तुएं वापस सौंपी जाएं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि JDA सहित कोई तीसरा पक्ष इन वस्तुओं को लौटाने पर आपत्ति नहीं करेगा।

दोनों पक्षों को आपसी सहमति से सामान सौंपने और प्राप्त करने की तारीख तथा प्रक्रिया तय करने को कहा गया है।

यह प्रक्रिया चार सप्ताह के भीतर पूरी करने की अपेक्षा की गई है।

JDA को चार सप्ताह में देना होगा कारणयुक्त फैसला

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार संबंधित पक्ष 30 नवंबर 2026 तक 13 जुलाई 2018 के नोटिस पर अपना जवाब और जरूरी दस्तावेज पेश कर सकते हैं।

CONFED को भी सुनवाई में भाग लेने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया.

JDA को 30 नवंबर 2026 से चार सप्ताह के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करना होगा।

आदेश पारित होने के सात दिनों के भीतर सभी संबंधित पक्षों को इसकी जानकारी देनी होगी।

JDA के अंतिम निर्णय तक परिसर का कब्जा और संचालन CONFED के पास रहेगा।

अंतिम निर्णय के बाद JDA कानून के अनुसार तय कर सकेगा कि कब्जा CONFED के पास जारी रहेगा या ट्रस्ट अथवा तारा मेडिकोस को लौटाया जाएगा।

कब्जा लौटाने का निर्णय होने पर संबंधित पक्ष कानून के अनुसार मेस्ने प्रॉफिट्स यानी कब्जे से बाहर रहने की अवधि के मुआवजे का दावा कर सकेंगे।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि JDA उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेगा और पहले के न्यायिक आदेशों में की गई टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना मामले का निपटारा करेगा।

संतोकबा फार्मेसी की दवा लाइसेंस अपील भी निस्तारित

मामले की एक अन्य अपील M/s Santokba, The Pharmacy–OPD की ओर से दवा लाइसेंस से जुड़े विवाद में दायर की गई थी।

सुनवाई के दौरान स्वीकार किया गया कि संबंधित लाइसेंस की वैधता 18 फरवरी 2020 को समाप्त हो चुकी थी।

इस कारण हाईकोर्ट ने इस अपील को निष्प्रभावी मानते हुए निस्तारित कर दिया।

हालांकि, अदालत ने कंपनी को भविष्य में नई परिस्थितियां उत्पन्न होने पर लाइसेंस के पुनर्जीवन, नया लाइसेंस जारी करने या CONFED को जारी लाइसेंसों को चुनौती देने के लिए कानून के अनुसार उचित कदम उठाने की स्वतंत्रता दी।

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