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देश में ड्रग सिंडिकेट बना रहा शिक्षित बेरोजगार यंग स्टूडेंट को ड्रग कूरियर, राजस्थान हाईकोर्ट ने जताई चिंता कहा- पैसे और लक्ज़री जीवन के लालच में अमीर और शिक्षित युवा भी बन रहे अपराधी

Rajasthan High Court Rules 20% Deposit Not Mandatory in Cheque Bounce Appeals

जयपुर, 19 अक्टूबर।

Rajasthan Highcourt ने देश में ड्रग तस्करों के नए गठजोड़ और ड्रग के कारोबार के लिए अपनाए जा रहे खतरनाक तरीकों पर गंभीर चिंता जताई है।

हाईकोर्ट ने कहा कि देश में ड्रग सिंडिकेट बेहद शातिराना तरीके से शिक्षित बेरोजगार युवाओं को ड्रग कूरियर बना रहे हैं।

Justice Anil Kumar Upman की एकलपीठ ने 18 करोड़ की अत्यधिक प्रभावशाली ड्रग “हाइड्रोपोनिक वीड” के मामले में पकड़े गए आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कई सख्त टिप्पणियां की हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि ड्रग सिंडिकेट अब शिक्षित और सम्पन्न परिवारों के कॉलेज छात्रों और युवा पेशेवरों को निशाना बना रहे हैं।

ये ड्रग माफिया इन युवा स्टूडेंट्स को आसान धन, विदेश यात्राओं और विलासितापूर्ण जीवन के प्रलोभन से फंसा रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि ये शिक्षित युवा, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजर में संदिग्ध नहीं माने जाते, ड्रग तस्करी के लिए “आदर्श कूरियर” बन जाते हैं।

अमीर और शिक्षित बेरोजगार निशाने पर

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि ड्रग माफिया अब उच्च शिक्षित और सम्पन्न परिवारों से आने वाले युवाओं को शामिल कर रहे हैं।
उन्हें आसान पैसा कमाने, सभी खर्चों का भुगतान करने वाली यात्राओं और शानदार जीवनशैली के वादों से फंसाया जाता है।

चूंकि ये शिक्षित और सम्पन्न परिवारों से होते हैं, इन युवाओं पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा शक किए जाने की संभावना कम होती है, जिससे वे आदर्श ड्रग खच्चर (कूरियर) बन जाते हैं।

देश को पहुंचा रहे नुकसान

हाईकोर्ट ने कहा कि ड्रग माफिया इन युवाओं के भोलेपन और जल्दी पैसा कमाने की चाह का फायदा उठाते हैं, जिससे उन्हें लत लग जाती है और उनका शैक्षणिक व पेशेवर करियर पूरी तरह बर्बाद हो जाता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि ये युवा केवल ड्रग उपभोक्ता नहीं बल्कि एक बड़े आपराधिक नेटवर्क के हिस्से बन जाते हैं, जो स्थिति को और चिंताजनक बनाता है।

अदालत ने टिप्पणी की कि हमारे देश के युवाओं पर इस प्रकार की तस्करी के विनाशकारी प्रभाव को कम करके नहीं आंका जा सकता।

कम मात्रा की खतरनाक साजिश

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि ड्रग सिंडिकेट अब अदालतों को गुमराह करने के लिए नया तरीका अपना रहे हैं।

जस्टिस उपमन की पीठ ने कहा कि संगठित ड्रग सिंडिकेट जानबूझकर वाणिज्यिक मात्रा से थोड़ी कम मात्रा में मादक पदार्थों की तस्करी करवाते हैं,
ताकि NDPS अधिनियम की धारा 37 के कठोर प्रावधानों से बच सकें।

अदालत ने कहा कि यह एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे आरोपी को आसानी से जमानत मिल सके और वे अपने अवैध कार्य निर्बाध रूप से जारी रख सकें।

“ऐसी स्थिति में जमानत देना इस प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करने के समान होगा और कानून की मंशा को कमजोर करेगा,” कोर्ट ने कहा।

18 करोड़ की ड्रग जब्त

जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों ने अमृतसर निवासी करण मेहरा से 18.534 किलो गांजा बरामद किया।

जांच में पता चला कि यह सामान्य गांजा नहीं, बल्कि विदेशों में विशेष परिस्थितियों में उगाई जाने वाली अत्यधिक प्रभावशाली ड्रग “हाइड्रोपोनिक वीड” है।

सरकार के अनुसार इसकी कीमत 18 करोड़ रुपये से अधिक है।

बचाव पक्ष की दलील

आरोपी करण मेहरा की ओर से अधिवक्ता मोहित शर्मा ने कहा कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और वह लंबे समय से न्यायिक अभिरक्षा में है।

बचाव पक्ष ने कहा कि चार्जशीट पेश हो चुकी है और बरामद मात्रा वाणिज्यिक मात्रा से कम है, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए।

FSL रिपोर्ट के अनुसार बरामद नमूना गांजा है, जिसमें कोई अन्य मादक पदार्थ नहीं मिला, इसलिए इसे केवल हाइड्रोपोनिक कहने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

केंद्र सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार की ओर से स्पेशल पीपी सी.एस. सिन्हा, मयंक कंवर और देव यादव ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया।

सरकार ने कहा कि आरोपी से बरामद ड्रग सामान्य गांजा नहीं बल्कि अत्यधिक खतरनाक पदार्थ है, जिसे विदेशों में विशेष परिस्थितियों में उगाया जाता है।

सरकार ने कहा कि बरामद मादक पदार्थ की कीमत लगभग ₹18 करोड़ है, जो युवा पीढ़ी को आकर्षित कर रहा है — यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।

सरकार ने कहा कि केवल मात्रा कम होने से आरोपी जमानत का पात्र नहीं बन जाता।

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