जयपुर, 20 अक्टूबर
Rajasthan Highcourt ने एक महत्वपूर्ण आदेश के जरिए मेहंदीपुर बालाजी SBI ब्रांच में करोड़ों के सिक्कों के घोटाले के मुख्य आरोपी तत्कालीन बैंक कैश ऑफिसर राजेश कुमार मीणा की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
गौरतलब है कि 4 साल से फरार चल रहे आरोपी राजेश कुमार मीणा को 9 अप्रैल 2025 को CBI ने गिरफ्तार किया था।
राजेश कुमार मीणा पर आरोप है कि उसने मेहंदीपुर बालाजी मंदिर से प्राप्त नोटों की राशि को सिक्कों में दिखाकर 11 करोड़ रुपये का गबन किया।
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ट्रस्ट में श्रद्धालुओं से सिक्कों के रूप में आने वाले चढ़ावे की राशि को मंदिर ट्रस्ट द्वारा SBI शाखा में जमा करवाया जाता था।
बैंक प्रबंधन ने सिक्कों की गिनती के लिए एक निजी फर्म को टेंडर दिया था। बैंक रिकॉर्ड में 13 करोड़ 62 लाख 11 हजार 275 रुपये के सिक्के दर्ज थे, जबकि गिनती में सिर्फ 1 करोड़ 39 लाख 60 हजार रुपये ही मिले।
CBI ने इस मामले में 365 करोड़ रुपये के घोटाले की बात कही है।
बचाव पक्ष की दलीलें
आरोपी राजेश कुमार मीणा की ओर से अधिवक्ता स्वदीप सिंह होरा, तारा चंद शर्मा, सहजवीर बावेजा और सिद्धांत चौधरी ने जमानत के पक्ष में दलीलें दीं।
उन्होंने कहा कि आरोपी को झूठे आरोपों में फंसाया गया है और चूंकि चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है, इसलिए आगे की हिरासत की कोई आवश्यकता नहीं है।
बचाव पक्ष ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन (अभियोजन की मंजूरी) अब तक सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त नहीं की गई है, जिसके अभाव में ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान नहीं लिया है।
अधिवक्ता ने कहा कि सह-आरोपियों की गिरफ्तारी किए बिना ही चार्जशीट पेश कर दी गई है। आरोपी 9 अप्रैल 2025 से जेल में बंद है, इसलिए उसे जमानत का अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पहली जमानत इसलिए खारिज हुई थी क्योंकि जांच लंबित थी, पर अब 90 दिन की हिरासत पूरी हो चुकी है और कोई पूरक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है।
सीबीआई का विरोध
CBI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जगमोहन सक्सेना और चिन्मय सक्सेना ने आरोपी की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया।
उन्होंने कहा कि आरोपी ने जांच में सहयोग नहीं किया और बार-बार बुलाने के बावजूद पेश नहीं हुआ, जिससे जांच प्रक्रिया बाधित हुई।
CBI ने बताया कि अन्य सह-आरोपियों ने पूर्ण सहयोग किया, और उनकी भूमिका केवल निगरानी में लापरवाही (supervisory negligence) तक सीमित रही।
जुए में लगाया जनता का पैसा
CBI ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने परिवार के खातों में भारी धनराशि ट्रांसफर की और उन खातों का उपयोग अपने निजी लाभ के लिए किया।
इसके अलावा, आरोपी ने अन्य लोगों के बैंक खातों में भी बड़ी रकम ट्रांसफर की और उस धन का जुए में उपयोग किया, जो गवाहों के बयानों से स्पष्ट है।
CBI ने बताया कि आरोपी द्वारा गबन की गई राशि लगभग 365 करोड़ रुपये है, जो आम जनता की मेहनत की कमाई है।
हाईकोर्ट का आदेश
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने आरोपी राजेश कुमार मीणा की जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराधों को सामान्य अपराधों से अलग दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए, क्योंकि ये अपराध देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
Rajasthan Highcourt ने टिप्पणी की —
“ऐसे अपराधी केवल अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए जनता के धन का दुरुपयोग करते हैं, जिससे समाज के कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।”
ये है पूरा मामला
SBI की मेहंदीपुर बालाजी शाखा के तत्कालीन कैशियर राजेश कुमार मीणा ने अकाउंटेंट और जॉइंट कस्टोडियन के साथ मिलकर बड़ा घोटाला किया।
उसने बैंक में आए करेंसी नोटों को इलेक्ट्रॉनिक कैश ड्रॉवर में सिक्कों के रूप में दिखाकर 11 करोड़ रुपये का गबन किया।
2016 से 2021 तक एसबीआई ब्रांच में 13 करोड़ 1 लाख 71 हजार 275 रुपये के सिक्के जमा हुए थे।
18 जून 2021 को बैंक मैनेजर हरगोविंद मीणा को सिक्कों की कमी का शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने अर्पित गुड्स करियर को सिक्कों की गिनती के लिए टेंडर दिया।
22 जुलाई 2021 से राधा रमण धर्मशाला में सिक्कों की गिनती शुरू हुई, जिसके दौरान फर्म के मैनेजर सतीश शर्मा को धमकी दी गई कि वह गिनती न करे।
CBI जांच के आदेश
धमकी की शिकायत पर बैंक मैनेजर हरगोविंद मीणा ने तत्कालीन करौली एसपी मृदुल कच्छावा को पत्र भेजा।
इसके बाद 2021 में बैंक प्रबंधन ने 9 ब्रांच मैनेजर सहित 40 कर्मचारियों के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया।
बाद में SBI ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर CBI जांच की मांग की।
18 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट ने एसबीआई बैंक की याचिका स्वीकार करते हुए CBI जांच के आदेश जारी किए।