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CBI को Rajasthan Highcourt से बड़ा झटका, रिश्वत के दो आरोपियों को जमानत

Rajasthan Highcourt

जयपुर, 22 अक्टूबर

Rajasthan Highcourt ने रिश्वत के आरोप में सीबीआई (CBI) द्वारा गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।

जस्टिस भूवन गोयल की एकलपीठ ने राकेश भसीन और उमेश माथुर को सशर्त जमानत देने का आदेश दिया है।

गौरतलब है कि दोनों आरोपियों को CBI ने झारखंड हाईवे प्रोजेक्ट मामले में 10 लाख रुपये की रिश्वत के आरोप में मई 2025 में गिरफ्तार किया था।

दोनों याचिकाकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने निजी कंपनी भारत वाणिज्य ईस्टर्न प्राइवेट लिमिटेड (Bharat Vanijya Eastern Pvt. Ltd.) को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए 10 लाख रुपये से अधिक की रिश्वत ली थी।

CBI ने मई माह में एनएचएआई (NHAI) के विवाद निवारण बोर्ड (Dispute Resolution Board) के सदस्य राकेश भसीन और कंपनी के डिप्टी मैनेजर स्वतंत्र गौरवविश्वजीत सिंह को गिरफ्तार किया था।

इसके बाद CBI ने इसी मामले में कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) मनीष मिश्रा और उनके कर्मचारी उमेश माथुर को भी गिरफ्तार किया था।

वर्तमान में दोनों आरोपी जयपुर की सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में थे।

बचाव पक्ष की दलील

याचिकाकर्ता उमेश माथुर की ओर से अधिवक्ता दीपक चौहान ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि मामले में याचिकाकर्ता को झूठा फंसाया गया है

उन्होंने कहा कि वह न तो लाभार्थी हैं और न ही उनसे कोई रिश्वत की राशि बरामद हुई है। याचिकाकर्ता पर केवल यह आरोप है कि उन्होंने मनीष मिश्रा के कहने पर रिश्वत की राशि दी, जबकि मनीष मिश्रा को पहले ही जमानत मिल चुकी है

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि टेलिफोन ट्रांसक्रिप्ट के मामले में अब तक FSL रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है और न ही अभियोजन स्वीकृति जारी हुई है।

PC एक्ट की पालना नहीं

मामले के दूसरे याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एस.एस. होरा ने दलील दी कि जांच से पूर्व अभियोजन स्वीकृति नहीं दी गई, जिससे PC एक्ट की धारा 17 की पालना नहीं होने के कारण संपूर्ण कार्यवाही दोषपूर्ण हो जाती है।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि टेलिफोन रिकॉर्डिंग की कार्यवाही नियमानुसार नहीं की गई, क्योंकि रिकॉर्ड करने से पहले न तो कोई आपात स्थिति थी और न ही जनजीवन को कोई खतरा था।

उन्होंने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता का कोई वॉयस सैंपल नहीं लिया गया।
साथ ही याचिकाकर्ता की उम्र 66 वर्ष और बीमारी की स्थिति का हवाला देते हुए जमानत देने का अनुरोध किया गया।

CBI का विरोध

मामले में CBI की ओर से जमानत याचिकाओं का विरोध किया गया।
CBI के विशेष लोक अभियोजक श्याम सिंह यादव, तरुण यादव और प्रदीप सिंह ने कहा कि दोनों आरोपियों की रिश्वत मामले में अहम भूमिका रही है।

Highcourt का आदेश

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस भूवन गोयल की एकलपीठ ने कहा कि मामले में जांच के बाद चार्जशीट पेश की जा चुकी है और जांच से पूर्व अभियोजन स्वीकृति नहीं ली गई

एकलपीठ ने कहा कि ट्रायल में समय लगेगा और आरोपी लंबे समय से हिरासत में हैं, इसलिए दोनों को सशर्त जमानत दी जाती है।

अदालत ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट जब भी उन्हें बुलाएगा, उन्हें पेश होना होगा।

अदालत ने कहा —

“जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट प्रस्तुत की जा चुकी है और अब तक अभियोजन की ओर से कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाना न्यायोचित है।”

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दीपक चौहान, हर्ष जोशी, चिन्मय मुद्गल, साहिल राजपुरोहित, एस.एस. होरा, सहजवीर बवेजा और हिमांशु अग्रवाल उपस्थित हुए, जबकि सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्याम सिंह यादव ने पक्ष रखा।

अदालत ने दोनों आरोपियों को ₹50,000 के निजी मुचलके और दो जमानतें पेश करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।

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