टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

जस्टिस सूर्यकांत होंगे भारत के अगले CJI, 24 नवंबर को 53 वें CJI के रूप में लेंगे शपथ

Justice Suryakant

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2025

देश को जल्द ही अपने 53 वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) मिलने जा रहा है। जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 को देश के अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे.

केन्द्रीय कानून मंत्रालय ने देश के नए सीजेआई की नियुक्ति की कवायद शुरू करते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को पत्र लिखा था. जिस पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम औपचारिक तौर पर देश के नए सीजेआई के नाम की सिफारिश करेगा.

वे वर्तमान CJI जस्टिस बी आर गवई के सेवानिवृत्त होने के बाद यह जिम्मेदारी संभालेंगे। उनका कार्यकाल लगभग 14 महीने का होगा, जो 9 फरवरी 2027 तक चलेगा.

सबसे वरिष्ठता जज बनते हैं सीजेआई

हमारे देश में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति हमेशा वरिष्ठता क्रम और योग्यता के आधार पर की जाती है.

सरकार ने इस प्रक्रिया के तहत मौजूदा मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई से उनके उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश करने के लिए पत्र लिखा हैं.

कानून और न्याय मंत्रालय ने परंपरा के अनुसार उन्हें एक पत्र भेजकर उनके उत्तराधिकारी के नाम की अनुशंसा करने का अनुरोध किया.

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस सूर्यकांत का नाम तय करते हुए उनके नाम की सिफारिश की गयी हैं.

चीफ जस्टिस गवई की औपचारिक सिफारिश के बाद सरकार जस्टिस सूर्यकांत को अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की औपचारिक अधिसूचना जारी करेगी.

1993 से शुरू हुई परंपरा

देश में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के चयन की यह प्रक्रिया वर्ष 1993 में शुरू हुई है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह प्रक्रिया शुरू कि गयी थी जिसमें यह स्पष्ट किया था कि मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ और सर्वथा उपयुक्त न्यायाधीश को ही की जानी चाहिए. तब से यह प्रथा चली आ रही है कि सेवानिवृत्त होने वाले मुख्य न्यायाधीश अपने उत्तराधिकारी का नाम लगभग एक महीने पहले सरकार को भेजते हैं

जस्टिस सूर्यकांत का जीवन

​हरियाणा के हिसार में 10 फरवरी 1962 को जन्में जस्टिस सूर्यकांत ने वर्ष 1981 में हिसार के गवर्नमेंट पीजी कॉलेज से स्नातक की. ​उसके बाद 1984 में महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से एलएलबी की डीग्री हासिल की.

एलएलबी के साथ ही जस्टिस सूर्यकांत ने 1984 में ही हिसार की जिला अदालत से वकालत की शुरुआत की.

एक वर्ष बाद 1985 वे चंडीगढ़ चले गए और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रेक्टिस करने लगे. कुछ ही समय में उन्होने संविधान, सेवा और सिविल मामलों में विशेषज्ञता हासिल कर अपनी खुद की अलग पहचान बनाई.

उन्होंने कई विश्वविद्यालयों, बोर्डों, निगमों और बैंकों के लिए हाईकोर्ट में पैनल अधिवक्ता से लेकर विशेष अधिवक्ता के रूप में प्रतिनिधित्व किया.

15 साल की वकालात के बाद वर्ष 2000 में 7 जुलाई को हरियाणा के एडवोकेट जनरल के रूप में देश के सबसे युवा एडवोकेट जनरल नियुक्त हुए.

इसके साथ ही उन्हे हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में भी नामित किया गया.

9 जनवरी 2004 को उन्हें पदोन्नत करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किए गए.

वर्ष 2007 में उन्हे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की गवर्निंग बॉडी के सदस्य के रूप में नामित किया गया. उन्होने इस पद पर लगातार दो कार्यकाल (2007–2011) पूरे किए.

4 दशक का अनुभव

5 अक्टूबर 2018 को उन्हे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया.

करीब करीब 7 माह बाद ही उन्हे देश की सर्वोच्च अदातल के जज के में रूप में चुना गया.

24 मई 2019 को जस्टिस सूर्यकांत को देश की सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया.

वर्तमान में वे सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन हैं.

ज​स्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 14 महीने का होगा, जिसमें उनसे न्यायपालिका की पारदर्शिता, तकनीकी एकीकरण और न्याय तक आम जनता की पहुंच को और मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है.

वे 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत होंगे.

सबसे अधिक लोकप्रिय