जयपुर, 16 अक्टूबर 2025
Rajasthan Highcourt की जयपुर पीठ ने राजस्थान सिविल सर्विसेज़ अपीलीय अधिकरण (RAT) में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा की अनुपलब्धता और नियमित बेंचों की सिटिंग न चलने के मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को आवश्यक कदम उठाने के आदेश दिए हैं।
Rajasthan Highcourt ने आदेश दिया है कि 27 अक्टूबर 2025 से ट्रिब्यूनल की प्रत्येक बेंच में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा शुरू की जाएगी ताकि अधिवक्ता और पक्षकार ऑनलाइन कार्यवाही में भाग ले सकें।
Rajasthan Highcourt ने आदेश दिया है कि प्रत्येक कार्य दिवस पर कम से कम एक बेंच सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक नियमित रूप से कार्य करेगी।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कोर्ट रूम के बाहर डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड और ट्रिब्यूनल की वेबसाइट पर लाइव केस स्टेटस सिस्टम उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
Rajasthan Highcourt ने आदेश दिया कि आपात स्थिति में यदि किसी बेंच की नॉन सिटिंग हो, तो जोधपुर सहित अन्य सर्किट बेंचों द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले सुने जा सकेंगे और रिकॉर्ड स्कैन कर जयपुर से भेजे जाएंगे।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता सुमन कुमारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।
बेंचों की रेगुलर होती है नॉन सिटिंग
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता त्रिभुवन नारायण सिंह ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि राजस्थान सिविल सर्विसेज़ अपीलीय अधिकरण, जो राज्य सरकार के कर्मचारियों से जुड़े सेवा विवादों के निस्तारण के लिए गठित वैधानिक संस्था है, उसमें कई बार बेंचों की नॉन सिटिंग के कारण सुनवाई रद्द हो जाती है।
अधिवक्ता ने कहा कि प्रशासनिक नियंत्रण नहीं होने से ट्रिब्यूनल में अधिकांश समय बेंचें नॉन सिटिंग हो जाती हैं।
अधिवक्ता ने कहा कि ट्रिब्यूनल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा न होने से अधिवक्ताओं और पक्षकारों को अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आदेशों के बावजूद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम लागू नहीं किया गया है और तात्कालिक मामलों पर भी समय पर सुनवाई नहीं हो रही है।
सचिव DOP हुईं कोर्ट में पेश
मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने सचिव DOP सुची त्यागी (IAS) और राजस्थान सिविल सर्विसेज़ अपीलीय अधिकरण (RAT) के रजिस्ट्रार राकेश मीणा को तलब किया था।
Rajasthan Highcourt ने सचिव डीओपी को अगली सुनवाई पर उपस्थित होने से छूट दी है, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2025 तय की है।