जोधपुर, 28 अक्टूबर
Rajasthan Highcourt ने जोधपुर शहर में बढ़ते प्रदूषण और बिना परमिट संचालित हो रहे वाहनों के खिलाफ दायर (PIL) जनहित याचिका पर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
Rajasthan Highcourt ने राज्य सरकार, परिवहन विभाग, जिला कलेक्टर, जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और नगर निगम सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं।
Dr. Justice Pushpendra Singh Bhati और Justice Anuroop Singhi की खंडपीठ ने ऑटो रिक्शा एकता यूनियन की ओर से अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
याचिका में दी गई दलीलें
अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित ने याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए कहा कि प्रदेश के प्रमुख शहरों — जयपुर, कोटा और उदयपुर – में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), दिल्ली ने पूर्व में निर्देश दिए थे कि 15 वर्ष से अधिक पुराने डीजल वाहनों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए और उनके नवीनीकरण पर रोक लगाई जाए। इसके बावजूद जोधपुर शहर में ऐसे पुराने डीजल वाहन शहरी परिवहन क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे हैं।
याचिका में यह भी कहा गया कि जोधपुर में परिवहन व्यवस्था में प्रयुक्त अधिकांश वाहन — तिपहिया टैक्सी, लोडिंग टैक्सी और सिटी बसें – डीजल या एलपीजी इंजन पर आधारित हैं, जो बड़े पैमाने पर वायु प्रदूषण फैला रहे हैं।
3,000 अवैध ऑटो रिक्शा
अधिवक्ता राजपुरोहित ने कहा कि शहर का प्रदूषण सूचकांक खतरनाक स्तर पार कर चुका है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि जोधपुर शहर में लगभग 11,000 से अधिक ऑटो रिक्शा सड़कों पर चल रहे हैं, जबकि केवल 7,900 के पास ही वैध परमिट हैं। यानी करीब 3,000 से अधिक ऑटो रिक्शा बिना परमिट के चल रहे हैं।
इसके अलावा, लगभग 4,000 से अधिक ई-रिक्शा बिना अनुमति परिधीय क्षेत्रों में टैक्सी सेवा के रूप में उपयोग किए जा रहे हैं।
सख्त कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जोधपुर में हजारों कैब, ऑटो, बाइक और स्कूटर विभिन्न टैक्सी सर्विस कंपनियों के माध्यम से संचालित हो रहे हैं, जिनके पास परिवहन विभाग से कोई वैध पंजीकरण या परमिट नहीं है।
उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार, कुल मिलाकर करीब 30,000 वाहन शहरी परिवहन में उपयोग हो रहे हैं, जिनमें से बड़ी संख्या बिना वैध अनुमति के सड़कों पर हैं।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की कि ऐसे सभी बिना परमिट और पुराने डीजल वाहनों पर रोक लगाई जाए, ताकि शहर के प्रदूषण स्तर को नियंत्रित किया जा सके और NGT के निर्देशों का पालन सुनिश्चित हो।
हाईकोर्ट का आदेश
Rajasthan Highcourt ने जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों पर सुनवाई के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार सहित अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर सभी विभागों को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
Rajasthan Highcourt ने राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.एल. भाटी को, दीपक चांडक, आयुष गहलोत और राजेश पंवार के माध्यम से प्रतिवादियों को नोटिस भिजवाने के निर्देश दिए हैं।