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ZEE NEWS के दो पूर्व कर्मचारियों में से एक को जमानत, दूसरे की खारिज

Rajasthan High Court Grants Bail to Former Zee News Employee, Rejects Bail Plea of Second Accused

Rajasthan Highcourt ने कहा कंपनी के खाते में आने वाली राशि को एक कर्मचारी ने फोन पे के जरिए अपने खाते में प्राप्त की, लेकिन दूसरे कर्मचारी के मामले में ऐसा तथ्य नहीं

जयपुर, 24 नवम्बर 2025

ZEE NEWS प्रबंधन द्वारा जयपुर के अशोक नगर थाने में दर्ज की गई एफआईआर के मामले में ZEE NEWS के पूर्व दो कर्मचारियों में से एक को RAJASTHAN HIGHCOURT से बड़ी राहत मिली है।

जस्टिस चन्द्र प्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने पूर्व कर्मचारी रामसिंह की जमानत याचिका को मंजूर किया है। वहीं इस मामले में दूसरे आरोपी पूर्व कर्मचारी जितेन्द्र शर्मा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।

जस्टिस चन्द्र प्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ के समक्ष ये दोनों जमानत याचिकाएं पूरकवाद सूची में सूचीबद्ध की गई थीं।

मामले में लंबे समय से याचिकाकर्ता के जेल में रहने और कोई रिकवरी शेष नहीं होने के आधार पर हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर की है।

वही दूसरे कर्मचारी आरोपी जितेन्द्र शर्मा के मामले में कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना हैं कि उसने फोन के जरिए अपने खाते में राशि ली हैं.

अशोक नगर थाना पुलिस ने 6 अक्टूबर को दोनों कर्मचारियों को आर्थिक हेराफेरी के आरोपों में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे सेंट्रल जेल, जयपुर में न्यायिक अभिरक्षा में हैं।

स्पेलिंग और व्याकरण की जांच करके सही किया गया टेक्स्ट नीचे दे रहा हूँ:

जितेन्द्र शर्मा की जमानत याचिका

मामले में दायर की गई जमानत याचिकाओं में पूर्व कर्मचारी जितेन्द्र शर्मा की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है और उसे झूठा फंसाया गया है।

याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता कर्मचारी ने किसी राशि का गबन नहीं किया है।

जितेन्द्र शर्मा के अधिवक्ता का तर्क

जितेन्द्र शर्मा के अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि उसके पास खबरें चलाने का कोई अधिकार नहीं था और ना ही उसका काम खबर चलाने का था।

बचाव में कहा गया कि जितेन्द्र शर्मा के खाते में किसी तरह का कोई पैसा नहीं आया है और ना ही उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड है।

सरकार का जवाब

मामले में राज्य सरकार और ZEE NEWS के अधिवक्ता ने पूर्व कर्मचारियों के अधिवक्ताओं की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि जितेन्द्र शर्मा पर गंभीर प्रकृति के आरोप हैं।

सरकार की ओर से कहा गया कि जितेन्द्र शर्मा सरकारी सेल्स पार्ट व इवेंट का काम करता था, जिसने अर्जित गोयल से 5 लाख रुपये, जोधपुर लाइम स्टोन से 5 लाख और गौरव मोदी से 4 लाख रुपये लिए जो जितेन्द्र शर्मा के पास जमा हुए।

सरकार ने कहा कि जितेन्द्र शर्मा ने ये राशि कंपनी के खाते में जमा नहीं कराई।

सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि जितेन्द्र शर्मा ने पूर्व चैनल हेड आशीष दवे के साथ मिलकर अपने अधीनस्थ कर्मचारी, रिपोर्टर, स्ट्रिंगर से इवेंट में बिजनेस लाने का दबाव बनाते थे और बिजनेस नहीं लाने की स्थिति में नौकरी से निकालने की धमकी देते थे।

सरकार ने यह भी कहा कि जितेन्द्र शर्मा अपने फोन से ये पैसे अपने खाते में डलवाते थे। यहां तक कि जो रुपये प्राप्त होते थे, उन्हें कंपनी के कर्मचारी हरिप्रसाद यादव की पत्नी राजू देवी के फोन नंबर पर ट्रांसफर कर, हरिप्रसाद यादव से नकद निकालवा कर गबन किया जाता था।

जमानत याचिका खारिज

सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने जितेन्द्र शर्मा की ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केस डायरी से यह साबित होता है कि जितेन्द्र शर्मा ने अलग-अलग लोगों से नकद लेकर कंपनी के कर्मचारी के खाते में जमा करवाया।

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में अजय ओझा द्वारा भी जितेन्द्र शर्मा के खाते में फोन पे पर 45,000 रुपये देने का तथ्य पाया गया है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा…

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दीपक गोयल, प्रीति सैनी, दिनेश कुमार शर्मा, दिलीप चौधरी, रौनक व्यास, अखिलेश कुमार शर्मा, महेश परिहार के बयानों में भी यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी जितेन्द्र शर्मा ने डर-धमकाकर प्राप्त की गई राशि को कंपनी के कर्मचारी के खाते में जमा करवाकर नकद हरिप्रसाद से लेने और कंपनी को प्राप्त होने वाली राशि में गबन करने के तथ्य सामने आए हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी जितेन्द्र शर्मा पर संपूर्ण राजस्थान के कारोबारियों और व्यापारियों से कंपनी के नाम पर भारी मात्रा में पैसा गबन करने का आरोप है।

कोर्ट ने कहा कि अभी इस मामले में चार्जशीट पेश नहीं की गई है, इसलिए इस स्तर पर जमानत का लाभ देना उचित नहीं है।

रामसिंह की जमानत याचिका

ZEE NEWS के ही पूर्व कर्मचारी और इस मामले में आरोपी रामसिंह की ओर से दायर जमानत याचिका को राजस्थान हाईकोर्ट ने मंजूर किया है।

जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली ने अपने आदेश में कहा कि जिस तरह के आरोप और तथ्य जितेन्द्र शर्मा के मामले में सामने आए हैं, ऐसे तथ्य रामसिंह के मामले में सामने नहीं आए हैं।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे तथ्य भी सामने नहीं आए कि रामसिंह ने धमकी देकर रुपये वसूल किए हों और अपने खाते में डलवाए हों या फोन पे के जरिए अपने खाते में लिए हों।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में गवाह सुनील सिंह ने केवल रामसिंह द्वारा उसे धमकी देने की बात बताई है।

फोन पे पर नहीं ली राशि

हाईकोर्ट ने कहा कि दीपक मोदी ने भी रामसिंह राजावत के खिलाफ यह कहा कि विक्रमसिं ने उसे मिलने के लिए बुलाया है और उसने रामसिंह और आशीष दवे को रुपये देने की बात बताई है।

कोर्ट ने कहा कि लेकिन रामसिंह राजावत को कितने रुपये दिए गए और वह रुपये फोन के माध्यम से लिए गए, यह जांच में स्पष्ट नहीं हुआ है।

हाईकोर्ट ने कहा कि रामसिंह के मामले में ऐसा तथ्य सामने नहीं आया कि उसके द्वारा कोई भारी राशि ली गई हो या फोन पे ली गई हो, यह इस स्तर पर स्पष्ट नहीं हो पाया है।

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