कोटा निवासी 18 और 19 वर्षीय युवक-युवती को मिली राहत: हाईकोर्ट ने कहा पुलिस सुरक्षा दें, हस्तक्षेप न करें
जयपुर, 4 दिसंबर
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने “live-in relationship” को लेकर ऐतिहसिक और महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा हैं कि दो बालिग युवक-युवती जिनकी भले ही विवाह योग्य उम्र पूरी न हुई हो, लेकिन वे अपनी मर्ज़ी से साथ रहने का पूरा अधिकार रखते हैं.
जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने कोटा निवासी युवति और युवक की ओर से जान की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फैसला दिया हैं.
हाईकोट्र ने कहा है कि दो बालिग युवक-युवती, भले ही विवाह योग्य उम्र पूरी न हुई हो, अपनी मर्ज़ी से साथ रहने का पूरा अधिकार रखते हैं, और राज्य का कर्तव्य है कि उनकी जान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करे.
कोर्ट ने कहा कि समाज या परिवार की आपत्ति किसी भी तरह से उनके मौलिक अधिकारों को सीमित नहीं कर सकती.
हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि संविधान का अनुच्छेद 21 एक बहुत उच्च स्थान पर है और इसका संरक्षण किया जाना अनिवार्य है—चाहे विवाह अमान्य हो, शून्य हो या विवाह का अस्तित्व ही न हो।
यह फैसला कोटा कि 18 वर्षिय युवती और 19 वर्षिय युवक कि ओर से दायर सुरक्षा याचिका पर दिया है.
जान से मारने का खतरा
याचिका में दोनों ने आरोप लगाया था कि लड़की के परिवार ने उनके साथ रहने के निर्णय पर तीखी नाराजगी जताते हुए उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी हैं.
याचिका में कहा गया कि युवति और युवक एक-दूसरे को पसंद करते हैं और भविष्य में शादी करना चाहते हैं। हालांकि युवक अभी 21 वर्ष का नहीं हुआ है, इसलिए दोनों ने कानून का पालन करते हुए “live-in relationship” में रहने का निर्णय किया.
उन्होंने 27 अक्टूबर 2025 को “live-in relationship” एग्रीमेंट भी बनाया।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, लड़की के माता-पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ हैं और उन्होंने दोनों को जान से मारने एवं नुकसान पहुंचाने की बातें कहीं.
युवक और युवति ने अपनी सुरक्षा के लिए 13 और 17 नवंबर 2025 को थाना कुनाड़ी, कोटा में आवेदन देकर संरक्षण मांगा, लेकिन पुलिस ने “कोई ध्यान नहीं दिया।”
अधिवक्ता ने कहा कि युवक और युवति लगातार जान के ख़तरे में हैं. उन्हें आशंका है कि निजी प्रतिवादी उन्हें पकड़कर अपनी धमकियों को अंजाम दे सकते हैं और यहाँ तक कि उनकी हत्या भी कर सकते हैं.
सुरक्षा न मिलने के कारण वे इधर-उधर भटक रहे हैं और किसी सुरक्षित स्थान पर रह भी नहीं पा रहे.
अधिवक्ता ने कहा कि परिस्थितियों के चलते दोनों हाईकोर्ट पहुंचे और कहा कि उनकी जान को वास्तविक खतरा है और पुलिस की सुरक्षा आवश्यक है।
सरकार की दलील लड़का बालिग लेकिन शादी योग्य नहीं
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राजकीय अधिवक्ता ने कहा कि चूंकि युवक 21 वर्ष का नहीं है, इसलिए वह शादी नहीं कर सकता। और यदि वह विवाह योग्य नहीं है, तो उसे लड़की के साथ “live-in relationship” में रहने की भी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणीयां
हाईकोर्ट ने अपने फैसलें में कहा हैं कि राज्य का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह हर नागरिक के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करे। मानव जीवन का अधिकार, व्यक्ति के बालिग या नाबालिग होने से ऊपर है.
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस वजह से कि याचिकाकर्ता विवाह योग्य आयु के नहीं हैं, उन्हें उनके मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता.
हाईकोर्ट ने इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सीमा कौर बनाम स्टेट ऑफ पंजाब (CRWP 4725/2021) का हवाला देते हुए कहा कि यदि दोनों व्यक्ति बालिग हैं, तो पुलिस को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए—भले ही विवाह वैध न हो या वे “live-in relationship” में हों.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि “live-in relationship” संबंध न तो अवैध है और न ही बिना विवाह साथ रहना अपराध माना जा सकता है। घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 में भी ‘पत्नी’ शब्द की बाध्यता नहीं है और “live-in relationship” पार्टनर तथा उनके बच्चों को संरक्षण दिया गया है.
हाईकोर्ट ने शक्ति वाहिनी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बालिग व्यक्ति अपनी पसंद का साथी चुनने के लिए स्वतंत्र है, और समाज या परिवार इसका विरोध नहीं कर सकते.
पुलिस को आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले में जोधपुर ग्रामीण एसपी और भीलवाड़ा एसपी को आदेश दिया हैं कि वे याचिकाकर्ताओं के मामले में जांच कर उनकी सुरक्षा प्रदान करें.
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं द्वारा नोडल अधिकारी के समक्ष दिए गए प्रतिवेदन को भी कानून के अनुसार निर्णय लेने का आदेश दिया हैं.
कोर्ट ने मामले में खतरे की स्थिति का विश्लेषण करके आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं.