जयपुर, 10 दिसंबर।
फैमिली कोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर की संपूर्ण कार्यकारिणी का निर्विरोध निर्वाचन हो गया है। जयपुर की नई कार्यकारिणी का गठन बुधवार को आधिकारिक रूप से घोषित कर दिया गया।
एसोसिएशन की चुनाव संचालन समिति ने अध्यक्ष पद पर एडवोकेट डी.एस. शेखावत और महासचिव पद पर एडवोकेट पंकज अरोड़ा को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया है।
एडवोकेट डी एस शेखावत वर्ष 2023-24 में भी निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हो चुके हैं और उनका यह दूसरा कार्यकाल होगा.

संपूर्ण कार्यकारिणी निर्विरोध
अध्यक्ष–महासचिव सहित संपूर्ण कार्यकारिणी के लिए चुनाव समिति ने चुनाव कार्यक्रम घोषित किया था।
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 5 दिसंबर 2025 तक नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूर्ण हुई, जिसमें कुल 13 नामांकन पत्र प्राप्त हुए।
इनमें अध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष, सांस्कृतिक सचिव, पुस्तकालय सचिव तथा एक उपाध्यक्ष सहित सभी पदों पर एक-एक नामांकन दाखिल किए गए थे।
इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्य के विभिन्न पदों पर कुल पाँच आवेदन प्राप्त हुए।
6 दिसंबर को नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सभी पदों पर केवल एक-एक उम्मीदवार शेष रहे। ऐसे में पूरे पैनल को निर्विरोध घोषित कर दिया गया।
फैमिली कोर्ट की नई कार्यकारिणी
चुनाव संचालन समिति सदस्य पूनमचंद भंडारी, धनश्याम सिंह शेखावत और श्रीकृष्ण खंडेलवाल ने सभी निर्वाचित पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए उन्हें बधाई दी।
- अध्यक्ष: धर्म सिंह शेखावत (डी.एस. शेखावत)
- उपाध्यक्ष: नईमुद्दीन आंकिल, विष्णु कुमार शर्मा
- महासचिव: पंकज अरोड़ा
- संयुक्त सचिव: जितेन्द्र शर्मा
- कोषाध्यक्ष: कुदरती शर्मा
- पुस्तकालय सचिव: रामनिवास सेनी
- सांस्कृतिक सचिव: रजनी गुप्ता
कार्यकारिणी सदस्य के 8 पदों पर एडवोकेट सुजाता वर्मा, विजेता यादव, पूनम जैन, मीना अग्रवाल और अशोक कुमार निर्विरोध चुने गए।
नए भवन के शीघ्र निर्माण की प्राथमिकता
फैमिली कोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के नवनिर्वाचित अध्यक्ष डी एस शेखावत ने lawsandlegals से खास बातचीत में कहा हैं कि फैमिली कोर्ट के लिए सरकार ने नई जमीन आवंटित कर दी हैं और इस जमीन पर शीघ्र नए भवन का निर्माण उनकी प्राथमिकता हैं.
शेखावत ने कहा कि वे अपने सभी सदस्यों और साथियो के सहयोग से सरकार से वार्ता कर इस भवन का शीघ्र निर्माण कराने का हरसंंभव प्रयास करेंगे.
शेखावत ने इसके साथ ही फैमिली कोर्ट में आने वाले पक्षकारों की सुविधाओं को बढाने का संकल्प बताते हैं.
