हाईकोर्ट महीने में दो शनिवार खुला रहेगा, सायंकालीन अदालतों की पायलट शुरुआत
जैसलमेर की ऐतिहासिक धरती पर न्याय व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक इतिहास में एक अहम और मिसाल कायम करने वाला कदम उठाया है। कार्यदिवस बढ़ाने वाला राजस्थान हाईकोर्ट देश का पहला हाईकोर्ट बन गया है। जैसलमेर में आयोजित हाईकोर्ट की पूर्णपीठ (फुल कोर्ट) बैठक में लंबित मामलों के तेजी से निस्तारण को लेकर कई बड़े और दूरगामी निर्णय लिए गए।
फुल कोर्ट मीटिंग में मौजूद सभी न्यायाधीशों ने न्यायिक समय बढ़ाने के इस प्रस्ताव पर सर्वसम्मति जताई.
यह महत्वपूर्ण बैठक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को जैसलमेर में हुई, जो करीब दो घंटे तक चली। बैठक में जस्टिस प्रवीर भटनागर को छोड़कर हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश उपस्थित रहे।
बढ़ते लंबित मामलों के बोझ को देखते हुए इस निर्णय को आवश्यक और समयोचित माना गया। न्यायाधीशों का मत रहा कि अतिरिक्त कार्यदिवस मिलने से केस डिस्पोजल की रफ्तार तेज होगी और आमजन को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत होगी।
हर महीने दो शनिवार खुलेगा हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की फुल कोर्ट मीटिंग में एक बड़ा और दूरगामी निर्णय लेते हुए यह तय किया गया है कि अब हाईकोर्ट महीने में दो शनिवार खुला रहेगा। इस फैसले के लागू होने से सालभर में हाईकोर्ट को 24 अतिरिक्त कार्यदिवस मिलेंगे, जिससे लंबित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की पहल पर राजस्थान हाईकोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया कि अब हर महीने दो शनिवार को अदालतों में नियमित न्यायिक कार्य होगा। इसके लिए अगले वर्ष के न्यायिक कैलेंडर में संशोधन किया जाएगा।
इस निर्णय से हाईकोर्ट के वार्षिक कार्यदिवस 210 से बढ़कर 230 से अधिक हो जाएंगे, जिससे लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।
सायंकालीन अदालतों की पायलट शुरुआत
पूर्णपीठ बैठक में यह भी तय किया गया कि जयपुर और जोधपुर में मजिस्ट्रेट स्तर के एक-एक सायंकालीन न्यायालय की पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरुआत की जाएगी। इसका उद्देश्य आम लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराना और कार्यदिवसों के दबाव को कम करना है।
न्यायिक सुधारों पर भी मंथन
बैठक में न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जनहितैषी बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। तकनीक के बेहतर उपयोग, ई-कोर्ट प्रणाली को मजबूत करने और लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने पर जोर दिया गया।
यह महत्वपूर्ण बैठक वेस्ट ज़ोन–I ज्यूडिशियल कॉन्फ्रेंस से पहले आयोजित की गई, जिसमें न्यायिक सुधारों पर भी व्यापक मंथन हुआ। बैठक में ई-कोर्ट, डिजिटल फाइलिंग और तकनीकी संसाधनों को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीक के बेहतर उपयोग पर सहमति बनी।
सेवा से बर्खास्त होंगे न्यायिक अधिकारी
पूर्णपीठ बैठक में एक अन्य अहम निर्णय लेते हुए यह भी तय किया गया कि न्यायिक अधिकारी जितेन्द्र सिंह गुलेरिया को सेवा से बर्खास्त किया जाएगा, जिससे यह संदेश गया कि न्यायिक जवाबदेही से कोई भी ऊपर नहीं है।
न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक कदम
हाईकोर्ट के इस फैसले को न्यायिक सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। कार्यदिवस बढ़ने और सायंकालीन अदालतों की शुरुआत से न केवल मामलों के निस्तारण की गति बढ़ेगी, बल्कि आम जनता को भी समय पर न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत होगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के मार्गदर्शन में लिए गए इस फैसले को राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था में एक अहम सुधारात्मक कदम माना जा रहा है, जो न्याय तक पहुंच को और सरल, तेज और प्रभावी बनाएगा।
2022 बैच का कन्फर्मेशन
राजस्थान हाईकोर्ट की फुल कोर्ट बैठक में 2022 बैच के अंतर्गत सीधी भर्ती से अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) बने न्यायिक अधिकारियों के कन्फर्ममेशन पर निर्णय लिया गया।
बैठक में दो एडीजे—लोकेन्द्र सिंह शेखावत और विवेक त्रिपाठी का कन्फर्ममेशन किए जाने को स्वीकृति प्रदान की गई।
वहीं, दो अन्य न्यायिक अधिकारियों की सेवाओं को एक्सटेंशन देने का भी निर्णय लिया गया।