जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ को पिछले लगभग 50 दिनों में लगातार छह बार बम से उड़ाने की धमकियां मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है।
इन घटनाओं को देखते हुए शुक्रवार को हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें हाईकोर्ट य की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने पर चर्चा कि गयी.

हाईकोर्ट के कॉन्फ्रेस रूम में शाम करीब 5 बजे शुरू हुई यह बैठक डेढ घण्टे से भी अधिक समय तक चली.
इस बैठक में हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा, रजिस्ट्रार प्रशासन हेमंतसिंह बघेला के साथ हाईकोर्ट प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ राज्य के आधा दर्जन वरि/ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे.
बैठक में पुलिस महकमे की ओर से एडीजी (कानून-व्यवस्था) दिनेश एमएन, जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल, आईपीएस हवासिंह घुमरिया, आईपीएस मनीषा अग्रवाल, आईपीएस सुमित, डीआईजी अजय सिंह सहित करीब आधा दर्जन आईपीएस अधिकारी मौजूद रहे।
50 दिनों में 6 बार मिली बम धमकी
बैठक के दौरान पिछले 50 दिनों में मिली सभी बम धमकियों की क्रमवार समीक्षा की गई।
पुलिस प्रशासन ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को अब तक प्राप्त धमकियों की प्रकृति, उनके स्रोत, ई-मेल और अन्य माध्यमों से भेजे गए संदेशों की जांच की स्थिति तथा इन मामलों में अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक धमकी के बाद हाईकोर्ट परिसर को खाली कराकर सघन तलाशी अभियान चलाया गया और बम निरोधक दस्तों, डॉग स्क्वॉड और साइबर विशेषज्ञों की मदद से जांच की गई।

जयपुर पुलिस कमिश्नर ने बैठक में हाईकोर्ट परिसर की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार प्रवेश और निकास बिंदुओं पर निगरानी बढ़ाई गई है।
उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सघन जांच, सीसीटीवी निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और त्वरित प्रतिक्रिया टीम (QRT) की सक्रियता सुनिश्चित की जा रही है।
इसके साथ ही साइबर सेल द्वारा धमकी भेजने वालों की पहचान के लिए तकनीकी जांच भी तेज कर दी गई है।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने बैठक में स्पष्ट कहा कि न्यायालय की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि हाईकोर्ट परिसर, न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और आम पक्षकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.
उन्होंने निर्देश दिए कि सुरक्षा व्यवस्था में यदि कहीं भी कमी हो तो उसे तुरंत दूर किया जाए और भविष्य में ऐसी धमकियों से निपटने के लिए ठोस और दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जाए।
नियमित समीक्षा और सख्त कार्रवाई का फैसला
बैठक में यह भी तय किया गया कि हाईकोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जाएगी और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।
इसके साथ ही बम धमकियों के मामलों में शामिल असामाजिक तत्वों को जल्द से जल्द चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि लगातार मिल रही बम धमकियों के चलते न केवल हाईकोर्ट का कामकाज प्रभावित हुआ है, बल्कि अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और वादकारियों में भी चिंता का माहौल बना हुआ है।