हाईकोर्ट ने कहा-बिना अनुमति धार्मिक गतिविधियाँ और निर्माण बर्दाश्त नहीं, ज़बरन धर्मांतरण पर सख्त कार्रवाई करे सरकार
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने धर्मांतरण और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) का निस्तारण करते हुए राज्य सरकार को सख्त आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि बिना वैधानिक अनुमति किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि या निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि जबरन या प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण का कोई मामला सामने आता है, तो उस पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने प्रताप सिंह शेखावत की ओर से दायर याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया है।
याचिका में श्रीगंगानगर जिले के गांव कल्याण (4-वाई) स्थित भूमि पर कथित अवैध धार्मिक गतिविधियों और जबरन धर्मांतरण के आरोप लगाए गए थे।
याचिका में आरोप लगाया गया कि उक्त परिसर में हिंदू और सिख समुदाय के लोगों को प्रलोभन या दबाव के माध्यम से ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा रहा है।
इसके आधार पर याचिकाकर्ता ने अदालत से धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाने, अवैध निर्माण हटाने, परिसर को सीज करने तथा संबंधित संस्थाओं की आर्थिक गतिविधियों और फंडिंग की जांच के निर्देश देने की मांग की थी।
राज्य सरकार की दलील
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एन.एस. राजपुरोहित ने अदालत को अवगत कराया कि विवादित भूमि पर वर्तमान में कोई धार्मिक गतिविधि संचालित नहीं हो रही है।
अब तक किसी भी प्रकार के जबरन धर्मांतरण का कोई ठोस मामला सामने नहीं आया है। यदि भविष्य में ऐसी कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो प्रशासन द्वारा तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार ने अदालत को यह भी आश्वासन दिया कि कानून के विरुद्ध किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रतिवादी पक्ष की दलील
प्रतिवादी पक्ष की ओर से कहा गया कि संबंधित स्थल पर न तो किसी प्रकार की धार्मिक सभा आयोजित की जा रही है और न ही किसी व्यक्ति पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
प्रतिवादियों ने अदालत को आश्वस्त किया कि भविष्य में भी बिना अनुमति कोई धार्मिक गतिविधि नहीं की जाएगी और इस संबंध में जिला कलेक्टर के समक्ष शपथपत्र (अफिडेविट) दाखिल किया जाएगा।
हाईकोर्ट की टिप्पणियां
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि—
“रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि विवादित स्थल पर वास्तव में जबरन धर्मांतरण की घटना हुई हो।”
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि—
“यदि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के कोई धार्मिक गतिविधि की जाती है या नागरिकों पर अनुचित प्रभाव डालकर धर्मांतरण का प्रयास किया जाता है, तो ऐसा कृत्य कानून की दृष्टि में स्वीकार्य नहीं होगा।”
प्रशासन को सख्त आदेश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि विवादित भूमि पर बिना वैधानिक अनुमति कोई निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाए और किसी भी प्रकार की गैरकानूनी धार्मिक गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
यदि जबरन या प्रलोभन आधारित धर्मांतरण का कोई मामला संज्ञान में आता है, तो तत्काल प्रभावी और सख्त कार्रवाई की जाए।