जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के नाम की संभावनाए बढ़ी, 6 महीने के कार्यकाल में प्रशासनिक सख्ती और सुधारों से मजबूत हुई दावेदारी
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर बड़ी हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को स्थायी मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम जल्द फैसला ले सकता है। आने वाले दो सप्ताह इस नियुक्ति के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।
न्यायिक गलियारों में चर्चा है कि जस्टिस शर्मा का नाम गंभीरता से विचाराधीन है, लेकिन पिछले छह महीनों से कॉलेजियम के सभी सदस्यों के बीच पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है। इसके बावजूद हाल के घटनाक्रम संकेत दे रहे हैं कि स्थिति अब बदल सकती है।
क्यों अहम है यह फैसला?
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पिछले करीब 6 महीनों से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनकी सराहना सुप्रीम कोर्ट तक हुई है।
उनके नेतृत्व में-
- कई प्रशासनिक सुधारों के जरिए हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली को मजबूत किया गया
- जोधपुर और जयपुर बेंच के बीच न्यायिक संतुलन बनाने के प्रयास किए गए
- राजस्थान में साइबर सुरक्षा को लेकर राज्यव्यापी अभियान चलाया गया
- 1400 से अधिक जजों ने स्कूलों में जागरूकता कक्षाएं लीं
- जैसलमेर और जयपुर में नेशनल कॉन्फ्रेस का बेहतरीन आयोजन कर कई विशेष निष्कर्ष तैयार किए गए
- अधीनस्थ अदालतों में जजों को तत्काल APO (Awaiting Posting Orders) करने जैसे सख्त फैसले, जिससे वे बेहद लोकप्रिय भी हुए
इन पहलों ने उन्हें एक मजबूत प्रशासक के रूप में स्थापित किया है।
कॉलेजियम में सहमति पर सवाल
हालांकि कई बिंदु जस्टिस शर्मा के पक्ष में हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि कॉलेजियम के भीतर अब तक सर्वसम्मति नहीं बन पाई है। पिछले छह महीनों में यह फाइल कई बार विचाराधीन रही, लेकिन अंतिम निर्णय टलता रहा।
अब माना जा रहा है कि हालिया प्रदर्शन और शीर्ष स्तर पर मिले समर्थन के चलते कॉलेजियम में सहमति बनने की संभावना बढ़ी है।
सीजेआई और केंद्र का समर्थन?
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत के करीबी के रूप में देखा जाता है।
उनके कार्यकाल के दौरान सीजेआई के राजस्थान दौरे और विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी को भी इसी संदर्भ में जोड़ा जा रहा है।
इसके अलावा, केंद्रीय कानून मंत्री, जो स्वयं राजस्थान से आते हैं, सार्वजनिक मंच से जस्टिस शर्मा की सराहना कर चुके हैं। इससे भी उनके नाम को मजबूती मिलने की चर्चा है।
विवाद भी बने चुनौती
जहां एक ओर उनकी प्रशासनिक क्षमता की तारीफ हो रही है, वहीं कुछ फैसलों ने विवाद भी खड़े किए—
- शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने का निर्णय अधिवक्ताओं के विरोध का कारण बना
- साइबर अभियान में जजों की भागीदारी को लेकर भी बहस छिड़ी
- सोशल मीडिया पर यह तक कहा गया— “अब जज पढ़ाएंगे और शिक्षक चुनाव कराएंगे”
- जहां एक ओर उनके त्वरित और सख्त फैसलों ने उन्हें न्यायिक तंत्र में लोकप्रिय बनाया, वहीं दूसरी ओर अंदरूनी फैसलों की बातें सार्वजनिक होने लगीं, जिससे विवाद भी गहराए।
इन मुद्दों ने उनके निर्णयों को चर्चा के केंद्र में रखा है।
ट्रांसफर और करियर ग्राफ भी चर्चा में
जस्टिस शर्मा का करियर भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है—
- पहले उनका तबादला राजस्थान से पटना हाईकोर्ट किया गया
- बाद में मेडिकल आधार पर पटना हाईकोर्ट से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट भेजा गया
- इसके बाद फिर राजस्थान हाईकोर्ट वापसी हुई
इन घटनाओं के बीच उनकी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को कई लोग रणनीतिक अवसर के रूप में देखते हैं।
समय भी सीमित, दांव बड़ा
गौरतलब है कि जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का कार्यकाल सितंबर 2026 में समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में यदि उन्हें नियमित मुख्य न्यायाधीश बनाया जाता है, तो उनका कार्यकाल सीमित रहेगा—लेकिन प्रभावशाली हो सकता है।
क्यों बढ़ा इंतजार?
राजस्थान के न्यायिक अधिकारियों और उन अधिवक्ताओं में भी इस नियुक्ति को लेकर खासा उत्साह है, जो हाईकोर्ट जज बनने की कतार में हैं। माना जा रहा है कि स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से कई लंबित फैसलों और नियुक्तियों में तेजी आ सकती है।
अब नजर अगले 14 दिनों पर
फिलहाल सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पर टिकी हैं। अगर सहमति बनती है, तो राजस्थान को जल्द ही नया स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल सकता है।
अगले दो हफ्ते—राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं और वर्तमान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के लिए भी।
