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BCR चुनाव: आखिर कहां हुई चूक! अव्यवस्थाओं ने उठाए बड़े सवाल-पुनर्मतदान से पहले निष्पक्ष जांच, चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

Bar Council Election: High-Power Committee to Review Re-poll Strategy, ‘Vote from Home’ Option for Senior Advocates Under Consideration

जयपुर/जोधपुर। राजस्थान बार काउंसिल (BCR) के बुधवार को हुए चुनाव भले ही प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गए, लेकिन जयपुर, जोधपुर और श्रीगंगानगर के रायसिंहनगर जैसे अहम केंद्रों पर सामने आई अव्यवस्थाओं ने चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

23 सदस्यों के लिए हुए इस चुनाव में जहां कई जिलों में मतदान सुचारू रहा, वहीं बड़े और संवेदनशील पोलिंग बूथों पर चुनाव समिति की तैयारियों की कमी साफ तौर पर नजर आई।

लेकिन एक हकीकत यह भी हैं कि बड़े बूथो को छोड़कर प्रदेश 220 से अधिक मतदान केन्द्रो पर राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हुए हैं.यह चुनाव कमेटी के लिए सकारात्मक पक्ष हैं.

जोधपुर में गर्मी बनी बड़ी वजह

न्यायिक राजधानी जोधपुर में भीषण गर्मी के चलते चार प्रमुख बूथों पर मतदान स्थगित करना पड़ा।

हैरानी की बात यह रही कि पिछले एक सप्ताह से तापमान लगातार ऊंचा रहने के बावजूद पोलिंग बूथों पर न तो पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था की गई और न ही छाया का समुचित इंतजाम।

हेरिटेज बिल्डिंग परिसर में बने इन बूथों पर हजारों वकील घंटों तक लाइन में खड़े रहे, लेकिन उनकी बारी नहीं आई।

हालात बिगड़ते देख चुनाव अधिकारी डॉ. सचिन आचार्य ने प्रत्याशियों के साथ बैठक कर मतदान स्थगित करने का निर्णय लिया। इन बूथों पर करीब 7400 मतदाता पंजीकृत हैं, जिससे इनकी अहमियत और बढ़ जाती है।

जयपुर में सबसे बड़ी अव्यवस्था

राजधानी जयपुर में हालात और भी ज्यादा गंभीर रहे। राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में बने मतदान केंद्र पर 14 हजार से अधिक मतदाता होने के बावजूद व्यवस्थाएं बेहद कमजोर रहीं।

सुबह 9 बजे तक मतदान शुरू नहीं हो पाया। बूथ की तैयारी समय पर पूरी नहीं हुई, बैलेट पेपर देर से पहुंचे और मतपेटियां भी व्यवस्थित नहीं थीं।

सबसे चिंताजनक बात यह रही कि प्रत्याशियों की पहुंच मतदान कक्ष के अंदर तक बनी रही, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठे।

सुबह से ही अफरा-तफरी का माहौल साफ संकेत दे रहा था कि मतदान प्रक्रिया सुचारू नहीं रह पाएगी और दोपहर तक यह पूरी तरह स्पष्ट भी हो गया।

जयपुर सेशन कोर्ट में भी कमोबेश यही हाल देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में मतदाता होने के बावजूद व्यवस्थाएं अपर्याप्त रहीं।

जयपुर में कई प्रत्याशियों ने यह आरोप लगाया कि मतपत्रों “मिसिंग हैं तो जोधपुर में मतपत्र खत्म होने को भी इसी अफवाह से जोड़ा गया. जिस पर राजस्थान बार काउंसिल ने अपना स्पष्टीकरण जारी किया

जयपुर सेशन कोर्ट में एकबारगी पुलिस जवानों और वकिलों के बीच विवाद का वीडियो भी सामने आया.

बार काउंसिल का स्पष्टीकरण-मतपत्र ‘मिसिंग’ की खबरें भ्रामक

बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चुनावों के दौरान कुछ बूथों पर मतपत्रों के “मिसिंग” होने की खबरों को बार काउंसिल ने भ्रामक और तथ्यहीन बताया है।

बार काउंसिल के अनुसार, मतपत्रों की छपाई के दौरान आई तकनीकी खामियों के कारण जिन मतपत्रों में अशुद्धियां थीं या जो उपयोग योग्य नहीं थे, उन्हें मतदान से पहले ही अलग कर दिया गया था।

प्रत्येक मतदान केंद्र के अतिरिक्त चुनाव अधिकारी को ऐसे सभी मतपत्रों के क्रमांक पहले से उपलब्ध करा दिए गए थे, जिन्हें उपयोग में नहीं लिया जाना था।

इसलिए किसी विशेष क्रमांक के मतपत्र के मतदान के दौरान गायब होने का दावा सही नहीं है।

जयपुर के प्रत्याशियों के लिए मुश्किलें बढ़ीं

जयपुर हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट में मतदान रद्द होने से दर्जनों प्रत्याशियों को बड़ा झटका लगा है।

खासतौर पर उन उम्मीदवारों को, जिन्होंने इस चुनाव में भारी संसाधन झोंक दिए थे।

प्रदेशभर में एक साथ चुनाव होने से इन प्रत्याशियों को जयपुर के मतदाताओं का समर्थन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब जब यहां पुनः मतदान होगा, तो प्रदेशभर के 234 प्रत्याशियों के बीच यह समर्थन बंट जाएगा।

ऐसे में जयपुर के स्थानीय प्रत्याशियों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

एमपी-एमएलए चुनाव से भी महंगा?

इन चुनावों में खर्च को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। बार काउंसिल चुनाव समिति भले ही पारदर्शिता के दावे करे, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रत्याशियों द्वारा बड़े पैमाने पर धन खर्च किए जाने की बातें सामने आ रही हैं।

जहां सांसद और विधायक चुनाव में उम्मीदवार को एक निश्चित क्षेत्र में प्रचार करना होता है, वहीं BCR के प्रत्याशियों को पूरे राजस्थान में प्रचार करना पड़ता है।

ऐसे में चुनाव लड़ना बेहद महंगा साबित हुआ। जयपुर में चांदी के सिक्कों से लेकर टैबलेट तक बांटे जाने की चर्चाएं अधिवक्ताओं के बीच चर्चा का विषय बनी रहीं, हालांकि इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

क्या जानबूझकर हुई चूक?

अधिवक्ताओं के सोशल मीडिया समूहों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि प्रदेश के सबसे बड़े मतदान केंद्र, जयपुर हाईकोर्ट में इतनी बड़ी अव्यवस्था आखिर कैसे हो सकती है? क्या यह सिर्फ लापरवाही थी या इसके पीछे कोई और कारण?

गुप्त मतदान पर भी सवाल

चुनाव प्रक्रिया को लेकर एक और गंभीर मुद्दा सामने आया है-गुप्त मतदान की पारदर्शिता।

अधिवक्ताओं के बीच यह चर्चा है कि बैलेट पेपर पर क्रमांक अंकित होने और रिकॉर्ड बनाए जाने से वोट की गोपनीयता संदिग्ध हो जाती है।

गुप्त मतदान का मूल सिद्धांत यह है कि मतदाता बिना किसी दबाव या भय के स्वतंत्र रूप से मतदान कर सके और उसकी पसंद गोपनीय रहे। लेकिन यदि बैलेट की पहचान संभव हो, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

अब क्या आगे?

कुल मिलाकर, BCR चुनाव भले ही कई जगह शांतिपूर्ण रहे हों, लेकिन प्रमुख केंद्रों पर हुई अव्यवस्थाओं ने चुनाव प्रबंधन की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।

अब जरूरत है कि चुनाव समिति इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच करे, जिम्मेदारी तय करे और भविष्य के लिए ऐसी ठोस व्यवस्था बनाए, जिससे पारदर्शिता, निष्पक्षता और मूलभूत सुविधाओं पर कोई सवाल न उठे।

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