जयपुर में ई-सिगरेट कारोबार करने वालों पर हुई कार्रवाई का मांगा ब्योरा, दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई; युवाओं के स्वास्थ्य को लेकर कोर्ट पहले भी दे चुका है कड़े निर्देश
जयपुर। राजस्थान में प्रतिबंधित ई-सिगरेट की बिक्री और ऑनलाइन कारोबार को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा है कि जयपुर में ई-सिगरेट का कारोबार करने वालों के खिलाफ 15 सितंबर 2026 तक क्या कार्रवाई की गई।
अदालत ने सरकार को अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्योरा पेश करने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। मामले की अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद होगी।
ऑनलाइन बिक्री पर पहले ही जताई थी नाराजगी
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ई-सिगरेट की ऑनलाइन बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
अदालत ने कहा था कि युवाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले ई-सिगरेट उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री को किसी भी स्थिति में प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने संबंधित कानून के प्रावधानों को सख्ती से लागू कराने के लिए राजस्थान के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को भी आवश्यक कदम उठाने के आदेश दिए थे।
डीजीपी को अधिकारियों की टीम बनाने का आदेश
अदालत ने डीजीपी को आदेश दिया था कि वे रेंज मुख्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों की एक टीम गठित करें, ताकि ई-सिगरेट की बिक्री और वितरण पर रोक से जुड़े कानूनी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू कराया जा सके।
वहीं, मुख्य सचिव को भी आदेश दिया था कि कानून के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक जिले में कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी को अधिकृत किया जाए, ताकि कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी तय हो और प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके।
याचिकाकर्ता का दावा-कई वेबसाइटों पर खुलेआम बिक्री
जनहित याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि कई वेबसाइटों के माध्यम से ई-सिगरेट की ऑनलाइन बिक्री कथित तौर पर जारी है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, ऐसी बिक्री पर रोक लगाने के लिए राज्य में प्रभावी निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि कुछ वेबसाइटें 24 घंटे के भीतर ई-सिगरेट की डिलीवरी का दावा करती हैं।
याचिका के अनुसार, इतनी कम अवधि में डिलीवरी का दावा इस बात की ओर संकेत करता है कि इन उत्पादों की स्थानीय स्तर पर उपलब्धता अथवा भंडारण की व्यवस्था हो सकती है।
देना होगा कार्रवाई का हिसाब
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार को 15 सितंबर तक जयपुर में ई-सिगरेट के कारोबार और बिक्री के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण अदालत के समक्ष रखना होगा।
अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में संबंधित विभागों और अधिकारियों ने क्या कदम उठाए हैं।
ई-सिगरेट की बिक्री पर हाईकोर्ट की सख्ती के बीच अब निगाहें सरकार की कार्रवाई रिपोर्ट और अगली सुनवाई पर टिकी हैं।