टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

सुप्रीम कोर्ट ने वकील को लगाई कड़ी फटकार: पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ FIR मांगने वाली याचिका खारिज

Supreme Court Slams Lawyer Seeking FIR Against PM Modi and Amit Shah Over CAA

नई दिल्ली: Supreme Court of India ने शुक्रवार को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) से जुड़े मामले में दायर याचिका पर कड़ी फटकार लगाई है।

याचिका में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और अन्य के खिलाफ सीएए लागू करने के लिये प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को निराधार, तुच्छ और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के रूप में खारिज कर दिया।

राजस्थान के अधिवक्ता पूरन चंदर सेन ने गोविंदगढ़ थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने कहा कि सीएए लागू होने के बाद देश भर में हुई हिंसा, मौतों और जेल में बंद लोगों के मामले के लिये संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

इसके बाद उन्होंने विभिन्न आईपीसी धाराओं के तहत पीएम, गृह मंत्री व तत्कालीन कानून मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी।

थाने और स्थानीय अदालतों में इस शिकायत पर कोई कार्रवाही नहीं होने पर वह राजस्थान हाईकोर्ट गये।

वहां भी उनकी याचिका खारिज कर दी गयी और 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी।

सीजेआई की बेंच जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल रहें.

याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि अगर संसद कोई अवैध कानून पारित करती है तो क्या वह “अपराध” बन जाता है?

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कानून से असहमति को तुरंत आपराधिक मामला बनाने का कोई आधार नहीं हो सकता; समाधान संवैधानिक चुनौती के माध्यम से मिल सकता है, न कि FIR दर्ज कराके।

मुख्य न्यायाधीश का सख्त संदेश

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने अधिवक्ता से तीखे स्वर में कहा कि

“आपको लाइसेंस देने की गलती किसने की? आप एक वकील हैं; लोग आप पर भरोसा करते हैं। अगर आप इस तरह की याचिका दायर करेंगे तो लोग आप पर कैसे भरोसा करेंगे?”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं को केवल ठोस, कानूनी रूप से समर्थ व वैध आधार पर याचिकाएं दाखिल करनी चाहिए। बिना ठोस आधार के आरोप लगाने वाली याचिकाएं न केवल अदालत का समय बर्बाद करती हैं, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा को भी प्रभावित कर सकती हैं।

जुर्माने पर रोक, पर चेतावनी जारी

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी गलती मानते हुए कहा कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और भविष्य में ऐसी याचिकाएं नहीं दाखिल करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने इस आश्वासन के आधार पर राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा लगाए गए 50,000 रुपये के जुर्माने को फिलहाल स्थगित कर दिया है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अगर वकील ने अपने वादे का उल्लंघन किया तो यह जुर्माना आदेश स्वतः लागू हो जायेगा।

पीठ ने चेतावनी भी दी कि अगर भविष्य में इसी प्रकार की याचिका फिर से दायर की गयी, तो अदालत जुर्माने को बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक कर सकती है।

सबसे अधिक लोकप्रिय