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‘तलाक के बाद पिता की सहमति नहीं होने पर भी नहीं रोक सकते बच्चे का पासपोर्ट’, हाईकोर्ट का पासपोर्ट अथॉरिटी को तुरंत पासपोर्ट जारी करने का आदेश; कहा- बच्चे का भविष्य किसी एक अभिभावक की इच्छा पर निर्भर नहीं

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‘पैसे की कमी को प्रोबेशन का उल्लंघन नहीं मान सकते’, 10 हजार रुपये जमा नहीं करने पर जेल गए युवक को हाईकोर्ट से राहत; प्रोबेशन बहाल कर रिहाई का आदेश

Couldn’t Pay ₹10,000, Sent to Jail After Probation: Rajasthan HC Orders Release, Restores Probation

जोधपुर। सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति पैसे जमा नहीं कर पाया, उसका प्रोबेशन खत्म कर उसे जेल नहीं भेजा जा सकता।

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक आपराधिक मामले में प्रोबेशन मिलने के बाद भी महज 10 हजार रुपये जमा नहीं कर पाने के कारण जेल भेजे गए 18 साल के युवक को बड़ी राहत दी है।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें रकम जमा नहीं करने पर युवक का प्रोबेशन खत्म कर उसे जेल भेज दिया गया था।

जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि केवल आर्थिक मजबूरी के कारण रकम जमा नहीं कर पाने को प्रोबेशन की शर्त का जानबूझकर उल्लंघन नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि आर्थिक मजबूरी के कारण रकम जमा नहीं कर पाना और प्रोबेशन की शर्तों का जानबूझकर उल्लंघन करना दो अलग बातें हैं।

हाईकोर्ट ने युवक का प्रोबेशन बहाल करते हुए उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने उसकी मूल दोषसिद्धि में कोई बदलाव नहीं किया।

हाईकोर्ट ने सिर्फ 29 जून 2026 के उस आदेश को रद्द किया है, जिसके जरिए उसका प्रोबेशन खत्म कर उसे जेल भेजा गया था।

मामले में संजय की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के जरिए अधिवक्ता दया गुलसर ने पैरवी की। वहीं सरकार की ओर से डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट रमेश देवासी ने पक्ष रखा।

दोषी ठहराने के बाद ट्रायल कोर्ट ने दिया था प्रोबेशन

हनुमानगढ़ के रावतसर निवासी संजय उर्फ सेठी, जिसकी उम्र करीब 18 साल है, एक आपराधिक केस में दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे IPC की धारा 148, 452, 341, 323/149, 325/149 और 427 के तहत दोषी माना था।

लेकिन उसकी उम्र, पुराने रिकॉर्ड और दूसरे हालात को देखते हुए ट्रायल कोर्ट ने उसे जेल भेजने के बजाय प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट की धारा 4 का लाभ दिया। यानी उसे अच्छे आचरण के साथ जेल से बाहर रहने का मौका दिया गया।

प्रोबेशन देते समय ट्रायल कोर्ट ने धारा 5 के तहत संजय को 10 हजार रुपये जमा करने का आदेश भी दिया था। लेकिन संजय की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी और वह यह रकम जमा नहीं कर सका।

29 जून को प्रोबेशन खत्म कर जेल भेज दिया गया

10 हजार रुपये जमा नहीं होने पर ट्रायल कोर्ट ने 29 जून 2026 को इसे प्रोबेशन की शर्त पूरी नहीं करना माना।

इसके बाद संजय का प्रोबेशन खत्म कर दिया गया और उसे पहले सुनाई गई दोषसिद्धि के आधार पर जेल भेज दिया गया। यानी संजय जेल इसलिए पहुंच गया क्योंकि वह 10 हजार रुपये जमा नहीं कर पाया था।

संजय ने आर्थिक स्थिति खराब होने की दलील दी

राजस्थान हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी की ओर से अधिवक्ता दया गुलसर ने दलील दी कि संजय की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और वह 10 हजार रुपये जमा करने की स्थिति में नहीं है।

उन्होंने बताया कि संजय ने अपनी दोषसिद्धि को चुनौती नहीं दी है। उसकी अपील सिर्फ इस बात को लेकर है कि महज 10 हजार रुपये जमा नहीं कर पाने के कारण उसका प्रोबेशन खत्म कर उसे जेल भेजना सही है या नहीं।

हाईकोर्ट में यह भी बताया गया कि इस वजह से संजय तीन महीने से ज्यादा समय जेल में रह चुका था। उसकी दलील थी कि रकम जमा नहीं कर पाना जानबूझकर प्रोबेशन की शर्त तोड़ना नहीं था।

प्रोबेशन की शर्त तोड़ना और पैसे न दे पाना अलग बात- हाईकोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट की व्यवस्था को देखा। कोर्ट ने कहा कि प्रोबेशन की शर्तों का जानबूझकर उल्लंघन करने और आर्थिक मजबूरी के कारण रकम जमा नहीं कर पाने में फर्क है।

हाईकोर्ट कहा कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर प्रोबेशन की शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है।

लेकिन सिर्फ रकम जमा नहीं कर पाने को तब तक जानबूझकर शर्त तोड़ना नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि उसने जानबूझकर भुगतान नहीं किया।

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि संजय ने प्रोबेशन मिलने के बाद कोई नया अपराध नहीं किया और न ही मिली आजादी का गलत इस्तेमाल किया। उसकी जेल जाने की वजह सिर्फ 10 हजार रुपये जमा नहीं कर पाना थी।

मुआवजे के 40 हजार रुपये पर आदेश का असर नहीं

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में 10 हजार रुपये की रकम का पूरा हिसाब भी देखा। 5 दोषियों में से प्रत्येक को 10-10 हजार रुपये जमा करने थे।

कुल 50 हजार रुपये में से 30 हजार रुपये घायल सुभाष की पत्नी और 10 हजार रुपये घायल मलकीत को मुआवजे के तौर पर दिए जाने थे। बाकी 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के लिए थे।

हाईकोर्ट ने साफ किया कि पीड़ितों को दिए जाने वाले 40 हजार रुपये के मुआवजे पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा। संजय के मामले में कोर्ट ने सिर्फ मुकदमे के खर्च के लिए बाकी 10 हजार रुपये जमा करने की शर्त हटाई है।

हाईकोर्ट ने प्रोबेशन बहाल किया, रिहाई का आदेश

हाईकोर्ट ने संजय की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए 29 जून 2026 का आदेश रद्द कर दिया। इसी आदेश के जरिए उसका प्रोबेशन खत्म कर उसे जेल भेजा गया था।

हाईकोर्ट ने 2 मई 2026 को दिए गए प्रोबेशन के लाभ को फिर से बहाल कर दिया। साथ ही, संजय के मामले में मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये जमा करने की शर्त भी हटा दी।

प्रोबेशन खत्म करने के बाद संजय पर लगाई गई जेल की सजा और उससे जुड़े जुर्माने के आदेश भी हाईकोर्ट ने रद्द कर दिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर संजय किसी दूसरे केस में जरूरी नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।

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