MLA-LAD फंड से 32 सरकारी स्कूलों के लिए स्पोर्ट्स इक्विपमेंट खरीद में कथित अनियमितता का आरोप, राजस्थान हाईकोर्ट के जमानत आदेश में दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
जयपुर। राजस्थान के पूर्व विधायक बलजीत यादव को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली हैं।
एमएलए-एलएडी फंड से 32 सरकारी स्कूलों के लिए स्पोर्ट्स इक्विपमेंट खरीद में कथित वित्तीय अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें यादव को जमानत देने से मना किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद फिलहाल यादव को जेल में ही रहना होगा।
बचाव पक्ष ने उठाया जांच में देरी का मुद्दा
बलजीत यादव की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी कि अभियोजन की शिकायत पर अभी तक संज्ञान नहीं लिया गया है।
बचाव में कहा गया कि कमियां दूर करने के नाम पर मामले में लगातार तारीखें ली जा रही हैं और कार्यवाही लंबे समय से लंबित है।
लूथरा ने कहा कि अभियोजन पक्ष देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बता पाया है। उन्होंने अदालत में कहा कि मामले में करीब 15 बार तारीखें ली जा चुकी हैं।
बचाव पक्ष ने स्पोर्ट्स इक्विपमेंट की खरीद से संबंधित जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया। दलील दी गई कि रिपोर्ट में उपकरणों की सप्लाई होने और उनकी गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत नहीं होने की बात सामने आई है।
लूथरा ने तर्क दिया कि ईडी के पास मौजूद साक्ष्यों से मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप प्रथम दृष्टया साबित नहीं होता। उन्होंने यह भी बताया कि मूल अपराध से संबंधित कार्यवाही और यादव की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका राजस्थान हाईकोर्ट में अभी लंबित है।
ईडी का दावा-सरकारी फंड यादव के नेटवर्क तक पहुंचा
ईडी की ओर से सीनियर एडवोकेट जोहेब हुसैन ने जमानत का विरोध करते हुए दावा किया कि यादव ने स्पोर्ट्स इक्विपमेंट की खरीद के लिए चार संस्थाओं की सिफारिश की थी और इन संस्थाओं को जारी सरकारी धन कथित तौर पर बाद में यादव के नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचा।
ईडी ने अदालत को बताया कि अलवर ट्रेजरी ऑफिस से टेंडर हासिल करने वाली कंपनियों के बैंक खातों में सरकारी फंड ट्रांसफर किया गया।
ईडी के अनुसार इसके बाद रकम का इस्तेमाल सामान खरीदने या भुगतान करने के बजाय कथित तौर पर यादव और उनके भाई राव वीरेंद्र सिंह से जुड़े नेटवर्क के लोगों तक पहुंचाया गया।
ईडी ने कथित मनी ट्रेल की वन-टू-वन मैपिंग का भी हवाला दिया। इसमें टेंडर हासिल करने वाली कंपनियों से यादव के रिश्तेदारों और उनसे जुड़े लोगों तक हुए कथित वित्तीय लेनदेन का विवरण शामिल होने की बात कही गई।
गवाहों को धमकाने और सबूत मिटाने का भी आरोप
ईडी ने जमानत का विरोध करते हुए कथित तौर पर गवाहों को डराने-धमकाने और सबूत मिटाने की कोशिश से जुड़े साक्ष्यों का भी हवाला दिया।
ईडी ने जांच के दौरान दर्ज गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि इनमें से एक बोली लगाने वाली कंपनी के मालिक का बयान भी शामिल बताया गया, जिसमें कथित तौर पर उसे व्हाट्सऐप मैसेज डिलीट करने और यादव से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करने की चेतावनी दिए जाने की बात कही गई।
ईडी के मुताबिक, टेंडर हासिल करने वाली कंपनियों और यादव के कथित सहयोगियों से जुड़े कई लोग समन जारी होने के बावजूद जांच में पेश नहीं हुए।
जेल से मोबाइल फोन मिलने के बाद नई FIR का भी हवाला
ईडी ने अदालत को यह भी बताया कि जेल में रहने के दौरान यादव से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ था। इसके बाद उनके खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज किए जाने की बात भी एजेंसी ने अदालत के समक्ष रखी।
ईडी ने मनी ट्रेल और गवाहों के बयानों को आधार बनाते हुए दावा किया कि यादव के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और वह पीएमएलए के तहत जमानत के लिए आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी नहीं करते।
सुप्रीम कोर्ट का साफ रुख-जमानत नहीं
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बलजीत यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के जमानत से इनकार करने वाले आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पूर्व विधायक बलजीत यादव को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। मामले में जांच और संबंधित न्यायिक कार्यवाही आगे जारी रहेगी।
नोट: मामले में लगाए गए आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और इनका अंतिम निर्धारण सक्षम अदालत द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाना है।