जयपुर। राजस्थान के पूर्व महाधिवक्ता और वयोवृद्ध विधिवेत्ता नरपत मल लोढ़ा का शुक्रवार को निधन हो गया।
उनके निधन की खबर से प्रदेश के कानूनी जगत, प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक क्षेत्र में शोक है।
पूर्व महाधिवक्ता का अंतिम संस्कार शनिवार, 23 मई को जयपुर के आदर्शनगर मोक्षधाम में किया जाएगा।
उनकी अंतिम यात्रा सुबह 11 बजे उनके जयपुर सिविल लाइंस स्थित 74, किरण पथ, सूरज नगर पश्चिम, सिविल लाइंस से रवाना होगी।
दिवंगत एन.एम. लोढ़ा लंबे समय तक राजस्थान की न्यायिक और विधिक व्यवस्था से जुड़े रहे।
वे अपने शांत स्वभाव, गहरी कानूनी समझ और संवैधानिक मामलों में विशेषज्ञता के लिए जाने जाते थे।
उन्होंने राजस्थान सरकार के महाधिवक्ता के रूप में कई महत्वपूर्ण मामलों में पैरवी की और राज्य की विधिक नीतियों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।

5 दशक का अनुभव, बीसीआर के रहें चैयरमेन
दिवगंत नरपत मल लोढ़ा राजस्थान के सबसे सम्मानित कानूनी व्यक्तित्वों में गिने जाते थे।
उन्होंने पांच दशक से अधिक समय तक विधि क्षेत्र में सक्रिय रहकर महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे वर्ष 2011 में वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) के रूप में नामित किए गए थे।
नरपत मल लोढ़ा ने राजस्थान सरकार के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) के रूप में दो बार जिम्मेदारी संभाली।
पहली बार वे वर्ष 2008 में इस पद पर नियुक्त हुए और बाद में वर्ष 2013 से 2018 तक उन्होंने फिर से महाधिवक्ता के रूप में सेवाएं दीं।
इसके अलावा वे वर्ष 2003-04 और 2015-17 के दौरान बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चेयरमैन भी रहे।
वे जयपुर स्थित प्रतिष्ठित विधि फर्म लोढ़ा एंड एसोसिएट्स के प्रमुख थे।
अपने लंबे और प्रतिष्ठित कानूनी करियर के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता (Senior Standing Counsel for Union of India) के रूप में भी कार्य किया। साथ ही वे सेबी (SEBI) और सिडबी (SIDBI) के अधिवक्ता के रूप में भी जुड़े रहे।
सामाजिक सेवा में जीवन
करीब 50 वर्षों के अपने विधिक जीवन में उन्होंने सरकारी और निजी दोनों पक्षों की ओर से कई महत्वपूर्ण मामलों में पैरवी की और अनेक ऐतिहासिक फैसलों से जुड़े रहे। उनकी गहरी कानूनी समझ, संवैधानिक मामलों में विशेषज्ञता और शांत एवं विनम्र व्यक्तित्व के कारण उन्हें न्यायिक जगत में विशेष सम्मान प्राप्त था।
कानूनी क्षेत्र के अलावा श्री लोढ़ा सामाजिक और जनकल्याण गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। वे नारायण सेवा संस्थान, दिव्य लोक विकलांग सेवा संस्थान, रीको (RIICO) तथा राजस्थान की कई अस्पताल और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए थे।
न्यायिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति
कानूनी क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
कई लोगों ने उन्हें विनम्र, विद्वान और सिद्धांतों पर चलने वाला व्यक्तित्व बताया।
राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशनों ने भी उनके निधन को न्यायिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
परिवार की ओर से अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि सभा की जानकारी जल्द साझा किए जाने की संभावना है।