जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान राज्य सूचना आयोग की जोधपुर में बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया हैं.
हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार के रुख पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं जस्टिस संदीप शाह की खण्डपीठ ने मामले पर सुनवाई की.
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता श्याम सुंदर लदरेचा ने अदालत को बताया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा 28 अप्रैल 2025 को एक निर्णय लेते हुए 6 अप्रैल 2023 के पूर्व आदेश को वापस ले लिया गया है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस आदेश में वापसी के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है और यह मात्र तीन पंक्तियों का संक्षिप्त आदेश है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष व्यास ने तर्क दिया कि सूचना आयोग की बेंच स्थापित करने का विषय अत्यंत जनहित से जुड़ा हुआ है और इसका सीधा संबंध एक महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील कानून के क्रियान्वयन से है।
राज्य सरकार ने 2023-24 के बजट में राज्य सूचना आयोग की बेंच की जोधपुर में स्थापना करने की घोषणा की थी. अभी तक बेंच की स्थापना नहीं हो पाई है.
अधिवक्ता मनीष व्यास ने अदालत से आग्रह किया कि राज्य सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन परिस्थितियों और कारणों के चलते पूर्व निर्णय को वापस लिया गया।
हाईकोर्ट ने इस पर राज्य पक्ष को निर्देशित किया कि वह उचित निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करे।
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने भी न्यायालय को आश्वस्त किया कि वे इस संबंध में आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करेंगे।
खण्डपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 12 मई 2026 को निर्धारित की है।
ये हैं मामला
राज्य सरकार ने बजट घोषणा 2023-24 में जोधपुर में बेंच की स्थापना करने की घोषणा की थी.
इसकी पालना में सूचना का अधिकार के नोडल विभाग प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग (सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ) जयपुर ने सहमति प्रदान कर दी थी.
राजस्थान राज्य सूचना आयोग की स्वीकृति के बाद जोधपुर बेंच में राज्य सूचना आयुक्त के पद के लिए योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन भी आमंत्रित किए गए.
सभी कवायद पूरी होने के बावजूद राज्य सूचना आयोग की जोधपुर बेंच को क्रियाशील नहीं किया गया है और न ही राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति की गई है.
