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संविधान दिवस विशेष: 60 देशों के संविधानों के अध्ययन से बना भारत का संविधान, दुनिया का एकमात्र पूर्णतया हस्तलिखित हिंदी-अंग्रेजी दस्तावेज़

Indian Constitution: History, Features, Importance, and Interesting Facts

जयपुर, 26 नवंबर

भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की आत्मा है। यह एक ऐसा मार्गदर्शक है, जो न केवल शासन के संचालन का ढांचा प्रदान करता है, बल्कि नागरिकों के अधिकार, कर्तव्य और मूल्यों को भी परिभाषित करता है।

26 जनवरी 1950 को लागू हुए इस संविधान की रचना में लगभग 2 साल 11 महीने और 18 दिनों की अथक चर्चा, विचार विमर्श और संशोधन शामिल थे।

संविधान सभा के 165 सत्र अपने आप में इस बात के साक्षी हैं कि संविधान को कितनी गंभीरता और विस्तार से तैयार किया गया।

संविधान को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखा गया और इसे तैयार करने में कई महान व्यक्तियों का योगदान रहा।

संविधान के निर्माता

डॉ. भीमराव आंबेडकर ने प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में संविधान निर्माण की प्रक्रिया का नेतृत्व किया।

इनके साथ राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, के.एम. मुंशी, अलादी कृष्णस्वामी अय्यर सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

संविधान की मूल प्रति खूबसूरत कलात्मक अलंकरणों से सजाई गई, जिसमें भारत की प्राचीन सभ्यताओं, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों के चित्र अंकित हैं।

संविधान की विशेषता यह है कि यह केवल कानूनों का संग्रह नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और विचारधारा का विस्तार है।

इसकी प्रस्तावना “हम भारत के लोग…” इस बात को स्पष्ट करती है कि भारत का संविधान जनता से प्रेरित और जनता के लिए है।

वर्ष 1976 में 42वें संशोधन के माध्यम से प्रस्तावना में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता जैसे शब्द जोड़े गए, जो आधुनिक भारत की मूल भावना को दर्शाते हैं।

मूल अधिकार और अनुच्छेद 51 ए

संविधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मूल अधिकार (Fundamental Rights) हैं, जो नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता, धार्मिक स्वतंत्रता, संरक्षण तथा न्याय की गारंटी देते हैं।

लेकिन केवल अधिकार ही नहीं, संविधान नागरिकों को कर्तव्यों की भी याद दिलाता है।

हमारे संविधान में अनुच्छेद 51-ए के तहत नागरिकों के 11 मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया।

इन कर्तव्यों में संविधान का सम्मान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का आदर, देश की एकता और अखंडता की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण, वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना, और जरूरत पड़ने पर राष्ट्र सेवा करना जैसे दायित्व शामिल हैं।

जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आर.सी. लाहोटी ने कहा था—“मूल कर्तव्य आधुनिक भारत के लिए दस आज्ञाओं की तरह हैं, जो एक आदर्श नागरिक की पहचान तय करती हैं।”

यह कथन इस बात को स्पष्ट करता है कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

कोई भी समाज तभी आगे बढ़ता है जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों को भी उतनी ही गंभीरता से निभाते हैं।

संस्कृति की झलक संविधान

भारत का संविधान अपने भीतर हजारों साल पुरानी सभ्यता, विचार और सांस्कृतिक समृद्धि की झलक समेटे हुए है।

हमारे संविधान में हमारे देश की सभ्यता के उदय से लेकर आजाद भारत तक के अलग-अलग युगों को तस्वीरों के जरिए दर्शाया गया है।

संविधान में मोहनजोदड़ो, वैदिक युग, महाभारत, रामायण, अशोक तथा बौद्ध परंपरा, नालंदा विश्वविद्यालय, विक्रमादित्य का न्यायसभा, महाबलीपुरम, मुगलकाल में अकबर का शासन, शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई, टीपू सुल्तान, स्वतंत्रता आंदोलन, सुभाषचंद्र बोस का संघर्ष और महात्मा गांधी की यात्राओं तक के दृश्य शामिल किए गए।

यह एक ऐसा दस्तावेज है जिसमें केवल विधि नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संघर्ष, इतिहास और विकास की पूरी यात्रा दिखाई देती है।

हम जानें अपने संविधान को

वर्तमान समय में जब नागरिक अधिकारों की चर्चा चारों ओर होती है, तब यह आवश्यक है कि नागरिक अपने संवैधानिक कर्तव्यों को भी पहचानें और समझें।

संविधान हमें न केवल अधिकार देता है, बल्कि यह भरोसा भी व्यक्त करता है कि हम एक राष्ट्र के रूप में सामूहिक जिम्मेदारी निभाएंगे।

चाहे पर्यावरण संरक्षण हो, देश की एकता और अखंडता का सम्मान हो, विविधता में एकता की भावना हो या सामाजिक समरसता—ये सभी मूल्य संविधान में न सिर्फ लिखे गए हैं, बल्कि भारत की आत्मा में बसते हैं।

विश्व का महान संविधान

हमारे देश के संविधान को दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे महान संविधान यूं ही नहीं कहा गया है।

संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति ने हिंदी तथा अंग्रेजी दोनों में ही हस्तलिखित और कैलिग्राफ्ड रूप में इसे तैयार किया, इसमें किसी भी तरह की टाइपिंग या प्रिंट का प्रयोग नहीं किया गया।

जिस दिन भारत का संविधान तैयार किया जा रहा था, उस दिन बारिश हो रही थी। भारत की संस्कृति में इसे शुभ संकेत माना जाता है।

संविधान निर्माताओं ने न केवल कानून के जरिए समानता और विविधता में एकता के प्रयास किए, बल्कि संविधान को तैयार करने में कला का सहारा लिया गया।

हमारे संविधान में मोहनजोदड़ो से लेकर रामायण काल, सम्राट अशोक, बुद्ध, महात्मा गांधी से लेकर सुभाषचंद्र बोस और अकबर से टीपू सुल्तान के चित्र भी शामिल कर हमारी संस्कृति को समेटा गया है।

मूल संविधान में शामिल किया गया प्रत्येक चित्र एक युग को प्रदर्शित करता है।

कानून दिवस से संविधान दिवस तक

विश्व का सबसे महान संविधान है हमारे देश हिंदुस्तान का संविधान, 26 नवंबर को हम सभी संविधान दिवस के रूप में मनाते हैं।

इसके पीछे कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपी हैं। हमारे देश का संविधान दुनिया के करीब 60 देशों के संविधानों को परखने के बाद बनाया गया था, इसलिए इस संविधान को सबसे महत्वपूर्ण और महान संविधान कहा जाता है।

1950 के बाद से ही हम 26 नवंबर को कानून दिवस के रूप में मनाते आए हैं, लेकिन 19 नवंबर 2015 को पीएम नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद से ही इसे संविधान दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

विश्व का सबसे बड़ा संविधान

15 अगस्त 1947 को आजादी के साथ ही हमारे देश के संविधान को लेकर कवायद शुरू हो गई थी।

इसके लिए पहली बैठक 21 अगस्त को पंडित जवाहरलाल नेहरू के निवास पर हुई।

उसके बाद बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के साथ पंडित नेहरू और राजेंद्र प्रसाद की करीब आधा दर्जन बैठकें हुईं।

और अंत में 29 अगस्त 1947 को संविधान की मसौदा समिति का गठन किया गया। डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया। इस कमेटी में यूं तो करीब 389 सदस्यों को शामिल किया गया, लेकिन संविधान तैयार होते-होते इनकी संख्या 284 रह गई।

भारतीय संविधान सभा ने मसौदा समिति की ओर से पेश किए गए संविधान को 26 नवंबर 1949 को अपनाया।

करीब 1 साल तक इसमें और अन्य कानूनों पर विचार किया गया। 24 जनवरी 1950 को संविधान को पूर्ण रूप प्रदान करते हुए सभी 284 सदस्यों के हस्ताक्षर किए गए।

इसके ठीक दो दिन बाद 26 जनवरी 1950 को विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र द्वारा इसे लागू किया गया।

संविधान के महत्व के प्रसार के लिए ही 26 नवंबर का दिन चुना गया था, जिसके बाद उसे कानून दिवस के रूप में मनाया गया।

अनुच्छेद, अनुसूचियां और संशोधन

हमारे संविधान में कुल 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां, 94 संशोधन, 48 आर्टिकल शामिल किए गए जो कि विश्व के 60 देशों के संविधानों से मिलाकर लिए गए हैं…

लेकिन इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद थे जो 22 भागों में विभाजित थे, इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं।

वहीं इसे तैयार करने में कुल 2 साल 11 महीने और 17 दिन का समय लगा।

हमारे संविधान में वर्तमान समय में 470 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां हैं और ये 25 भागों में विभाजित हैं।

हमारे संविधान को हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में तैयार किया गया। मूल संविधान में किसी भी तरह की टाइपिंग या प्रिंट का प्रयोग नहीं किया गया है।

हस्तलिखित और नाम की शर्त

हमारा मूल संविधान पूर्णतया हस्तलिपिबद्ध है, प्रेम बिहारी नारायण ने इसे हस्तलिपिबद्ध किया था.

संविधान को हस्तलिपिबद्ध करने की एवज में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रेम बिहारी नारायण को मानदेय का प्रस्ताव रखा था, लेकिन प्रेम बिहारी ने मानदेय लेने से इंकार किया, साथ ही मूल संविधान के सभी पृष्ठों पर उनका नाम और अंतिम पेज पर उनका और उनके पिताजी का नाम लिखने की शर्त रखी.

आज हमारे संविधान के हर पेज पर प्रेम बिहारी नारायण का नाम लिखा हुआ है.

254 पेन होल्डर लिए गए प्रयोग में

हमारे देश के संविधान को हस्तलिपिबद्ध करने में 6 माह का समय लगा.

इसके लिए 303 नंबर की निब प्रयोग में ली गई, वहीं कुल 254 पेन होल्डर काम में लिए गए.

भारतीय सर्वेक्षण विभाग देहरादून द्वारा फोटोलिथोग्राफी का कार्य किया गया था। हस्तलिपिबद्ध करने वाले प्रेम बिहारी नारायण को बाद में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

हीलियम गैस से भरी हुई पेटी में रखा गया है संविधान

24 नवंबर 1950 को हमारा संविधान बनकर तैयार हुआ था.

उसी दिन जब सभी सदस्य उस पर हस्ताक्षर कर रहे थे, उस दिन बारिश हो रही थी… हमारे देश के संविधान के साथ यह एक शुभ संकेत था, हमारी संस्कृति में भी बारिश को शुभ माना जाता है.

68 साल बाद भी हमारा मूल संविधान जस का तस संसद के पुस्तकालय में रखा गया है। संविधान को सुरक्षित रखने के लिए उसे विशेष हीलियम गैस से भरी हुई पेटी में रखा गया है.

11 पेज पर हस्ताक्षर, महात्मा गांधी के नहीं

संविधान के तैयार होने के बाद संविधान सभा के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर किए गए. संविधान सभा के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर करीब 11 पेज पर फैले हैं.

आठवीं अनुसूची के बाद पहला हस्ताक्षर पं. जवाहरलाल नेहरू का और संविधान के अंतिम पेज पर फिरोज गांधी के हस्ताक्षर हैं।

एक रोचक बात यह भी है कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सभी सदस्यों के अंत में हस्ताक्षर किए थे, उनके हस्ताक्षर के लिए जगह नहीं होने से उन्हें पंडित नेहरू के ऊपर सीमित जगह में तिरछे हस्ताक्षर करने पड़े.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपने हस्ताक्षर देवनागरी और रोमन लिपि, अबुल कलाम आजाद ने उर्दू में हस्ताक्षर किए थे.

जब मूल संविधान तैयार हुआ, उससे पूर्व ही महात्मा गांधी इस दुनिया में नहीं रहे थे, इसी के चलते मूल संविधान में महात्मा गांधी के हस्ताक्षर नहीं हैं।

जयपुर के कृपाल सिंह शेखावत का अहम योगदान

मूल संविधान के निर्माण में जयपुर की भी अहम भूमिका है.

संविधान की उद्देशिका का कला कार्य ब्योहर राम मनोहर सिन्हा द्वारा किया गया… सिन्हा ने केवल ‘राम’ शब्द का उपयोग करते हुए अपने हस्ताक्षर किए। मूल संविधान में कला का अधिकांश कार्य कृपाल सिंह शेखावत ने किया.

कृपाल सिंह शेखावत जयपुर के कला जगत में एक बड़ा नाम थे.

आज भी उनकी बेटी कुमुद शेखावत कला क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। उनके योगदान के लिए बाद में उन्हें 1974 में पद्मश्री और 2002 में शिल्पगुरु सम्मान से सम्मानित किया गया।

भगवान श्रीराम से लेकर भगवान महावीर तक

संविधान निर्माताओं ने न केवल समानता और स्वतंत्रता के साथ-साथ विविधता में एकता के लिए कानूनों का निर्माण किया, बल्कि मूल संविधान में प्राचीनकाल से लेकर आजादी तक के अहम चित्रों का समावेश किया है.

मूल संविधान में वैदिक काल के गुरुकुल, रामायण से भगवान श्रीराम के वनवास से घर वापस आने का दृश्य, महाभारत में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गीता उपदेश का दृश्य, गौतम बुद्ध, भगवान महावीर, सम्राट अशोक के साथ-साथ विक्रमादित्य के सभागार के दृश्य मूल संविधान में शामिल किए गए.

अकबर से लेकर टीपू सुल्तान के भी चित्र

हमारे संविधान निर्माताओं ने चित्रों के जरिए बहुत कुछ संदेश देने का प्रयास किया है,

मूल संविधान में एक ओर जहां प्राचीन भारत के वर्णन के साथ भगवान श्रीराम से लेकर श्रीकृष्ण के चित्र शामिल किए.

वहीं मध्यकालीन भारत में राजाओं में शामिल अकबर, शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई से लेकर टीपू सुल्तान के चित्र भी शामिल किए गए।

महात्मा गांधी से लेकर बोस तक

संविधान में महात्मा गांधी के तीन चित्र शामिल किए गए हैं। एक उनके दांडी मार्च से जुड़ा है, दूसरा आजादी के समय हुए दंगों के दौरान लोगों के बीच जाने के दृश्य का चित्र है.

क्रांतिकारियों को शामिल करते हुए निर्माताओं ने विदेश में रहकर भी भारत माता की आजादी के लिए त्याग करने वाले क्रांतिकारी नेताजी सुभाषचंद्र बोस के चित्र को भी शामिल किया.

यही नहीं संविधान में हिमालय, रेगिस्तान से लेकर सागर के चित्र को शामिल कर संपूर्ण भूभाग को समावेश किया गया है।

अगर हम देखें तो संविधान अपने आप में हिंदुस्तान की पूरी तस्वीर खुद में समेटे हुए है… संविधान निर्माताओं की यह देशभक्ति ही थी कि उन्होंने इतने कम समय में ही विश्व के सबसे महान संविधान को तैयार किया था।

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