नई दिल्ली। अबूधाबी में आयोजित अपराध निवारण और आपराधिक न्याय पर 15वीं संयुक्त राष्ट्र कांग्रेस में केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने भारत की बदलती क्रिमिनल जस्टिस व्यवस्था को दुनिया के सामने रखा।
उन्होंने भारत की टेक्नोलॉजी आधारित न्याय व्यवस्था, नए क्रिमिनल लॉ और साइबर अपराध से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
इस दौरान मेघवाल ने संयुक्त अरब अमीरात के न्याय मंत्री अब्दुल्ला सुल्तान बिन अवद अल नुआइमी से भी मुलाकात की। दोनों के बीच कानून और न्याय के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई।
इस UN कांग्रेस का फोकस डिजिटल दौर में अपराध की रोकथाम, क्रिमिनल जस्टिस और कानून के शासन को मजबूत करने के साथ लोगों और पर्यावरण की सुरक्षा पर है। इसी मंच पर भारत ने अपने जस्टिस सिस्टम में हो रहे बदलावों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत को भी सामने रखा।
मेघवाल ने इस दौरान क्रिमिनल लॉ के साथ भारत के जस्टिस सिस्टम में टेक्नोलॉजी, फोरेंसिक जांच और डिजिटल प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि इन कानूनों में तेज जस्टिस और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर फोकस किया गया है।

मेघवाल ने बताया- साइबर क्राइम से कैसे निपट रहा भारत
कांग्रेस को संबोधित करते हुए मेघवाल ने साइबर क्राइम से निपटने के लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी I4C और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का भी जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि इन व्यवस्थाओं के जरिए साइबर फ्रॉड की जल्दी रिपोर्टिंग, ठगी रोकने और ऐसे खातों को फ्रीज करने पर काम किया जा रहा है, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को आगे भेजने के लिए किया जाता है।
यानी डिजिटल क्राइम बढ़ने के साथ उसकी रिपोर्टिंग और कार्रवाई के लिए भी डिजिटल सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं।

नए क्रिमिनल लॉ में टेक्नोलॉजी और फोरेंसिक पर जोर
मेघवाल ने भारत के नए क्रिमिनल लॉ को टेक्नोलॉजी और फोरेंसिक जांच से जोड़ने की बात रखी। इसका मतलब है कि क्रिमिनल केस में जांच और सबूत जुटाने की प्रक्रिया में वैज्ञानिक और डिजिटल तरीकों की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने नए कानूनों को तेज जस्टिस और डिजिटल-फर्स्ट प्रक्रियाओं से जोड़कर भारत की जस्टिस व्यवस्था को बदलते डिजिटल दौर के हिसाब से तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सामने रखा।

‘आतंकवाद और संगठित अपराध पर ग्लोबल सहयोग जरूरी’
इस दौरान मेघवाल ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति भी दोहराई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के अलावा ड्रग्स तस्करी, अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव अपराध, अवैध लकड़ी कटाई, जहरीले कचरे के अवैध निपटान और दूसरे संगठित और पर्यावरण से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग जरूरी है।
उनका कहना था कि ऐसे अपराध किसी एक देश तक सीमित नहीं रहते। इसलिए इनसे निपटने के लिए अलग-अलग देशों की एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।
भारत-यूएई के बीच कानूनी सहयोग भी बढ़ा
अबूधाबी दौरे के दौरान भारत और यूएई के बीच कानून के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को भी सामने रखा गया। खास तौर पर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन और वैकल्पिक विवाद समाधान के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है।
इंडिया इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (IIAC) और दुबई इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (DIAC) के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान, ट्रेनिंग, संयुक्त कार्यक्रम, रिसर्च और डिजिटल विवाद समाधान को लेकर साझेदारी की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक DIAC करीब 5,000 केस संभालता है, जिनकी वैल्यू 80 अरब UAE दिरहम यानी करीब 21.8 अरब डॉलर है।

UNODC प्रमुख से भी हुई ड्रग्स और संगठित अपराध पर चर्चा
मेघवाल ने अपनी यात्रा के दौरान UNODC की कार्यकारी निदेशक मोनिका जुमा से भी मुलाकात की। दोनों के बीच ड्रग्स और संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग तथा कानूनी और न्यायिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि यूएई के साथ सहयोग अब सिर्फ व्यापार, निवेश और ऊर्जा तक सीमित नहीं है। इसमें टेक्नोलॉजी, रक्षा, शिक्षा के साथ कानून, जस्टिस और सुशासन के क्षेत्र भी शामिल हो रहे हैं।
भारत की ओर से यह भागीदारी ऐसे समय में सामने आई है, जब न्याय व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर लगातार जोर दिया जा रहा है। अबूधाबी में भारत ने इसी व्यापक सहयोग और बदलती जस्टिस व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा।