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7 टारगेट किलिंग केस में आरोपी ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जौहल को 9 साल बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने दी जमानत, खालिस्तान लिबरेशन फोर्स से कनेक्शन का आरोप

Jagtar Singh Johal Gets Bail After 9 Years in Custody, Delhi High Court Grants Relief in 7 NIA Cases

नई दिल्ली। पंजाब में 2016-17 के दौरान हुई कथित टारगेट किलिंग और हत्या की कोशिश के 7 मामलों में आरोपी ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जौहल को करीब 9 साल बाद जमानत मिल गई है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने करीब 9 साल से जेल में बंद जगतार सिंह जौहल उर्फ जग्गी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे राहत दी है।

दरअसल इन कथित टारगेट किलिंग और हत्या की कोशिश के मामलों की जांच NIA कर रही है और कुछ मामलों में UAPA की धाराएं भी लगी हैं। एजेंसी ने इस कथित साजिश का कनेक्शन खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) से बताया है।

ये मामले 2016-17 के दौरान पंजाब में हुई कई टारगेट किलिंग और हत्या की कोशिश की घटनाओं से जुड़े हैं। इन घटनाओं में RSS और हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों को निशाना बनाए जाने के आरोप हैं।

जगतार सिंह जौहल को पंजाब में 2017 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में हैं। यह राहत ऐसे समय मिली है जब उनकी जमानत पहले NIA स्पेशल कोर्ट और फिर हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी थी।

बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में जमानत पर दोबारा विचार के लिए मामला दिल्ली हाईकोर्ट को भेज दिया था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अब दोबारा सुनवाई करते हुए जौहल के खिलाफ चल रहे सातों मामलों में जमानत मंजूर कर दी है।

पंजाब में 2016-17 की टारगेट किलिंग से जुड़े सातों केस

ये सातों मामले 2016-17 में पंजाब के लुधियाना और जालंधर में हुई टारगेट किलिंग और हत्या की कोशिश की घटनाओं से जुड़े हैं। इनमें RSS शाखा पर फायरिंग और शिवसेना नेता अमित अरोड़ा की हत्या की कोशिश के साथ RSS, शिवसेना, हिंदू तख्त, डेरा सच्चा सौदा और चर्च से जुड़े लोगों की हत्याओं के मामले शामिल हैं।

NIA के मुताबिक, इन घटनाओं के पीछे एक बड़ी साजिश थी और एजेंसी ने इसका कनेक्शन खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) से बताया है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इस कथित साजिश का मकसद पंजाब में अशांति पैदा करना और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना था। हालांकि ये प्रॉसिक्यूशन के आरोप हैं और जगतार सिंह जौहल को इन मामलों में अभी दोषी नहीं ठहराया गया है।

जौहल पर फाइनेंसर और कूरियर की भूमिका का आरोप

NIA ने जगतार सिंह जौहल पर कथित साजिश में फाइनेंसर और कूरियर की भूमिका निभाने का आरोप लगाया है।

एजेंसी का कहना है कि UK में मौजूद कथित KLF सहयोगी गुरशरण सिंह से जौहल को 3,000 पाउंड मिले थे। आरोप है कि जौहल ने यह रकम पेरिस में हरमिंदर सिंह उर्फ मिंटू तक पहुंचाई। इसके बाद यह पैसा हरदीप सिंह तक पहुंचने का दावा किया गया है।

प्रॉसिक्यूशन का आरोप है कि हरदीप सिंह और रामनदीप सिंह ने इन कथित हमलों में शूटर थे।

यानी जगतार सिंह जौहल पर सिर्फ हमलों से जुड़े होने का आरोप नहीं है। NIA का आरोप है कि उन्होंने कथित साजिश के लिए पैसे और दूसरी मदद भी पहुंचाई थी।।

2022 और 2024 में भी नहीं मिली थी जमानत

जगतार सिंह जौहल ने इन मामलों में पहले भी जमानत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। NIA स्पेशल कोर्ट ने 7 अर्जियों में से 5 जमानत अर्जियां 7 सितंबर 2022 को खारिज की थीं। बाकी दो अर्जियां 25 अप्रैल 2024 को खारिज कर दी गईं।

इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। लेकिन सितंबर 2024 में हाईकोर्ट ने भी उनकी जमानत अर्जियां खारिज कर दी थीं। इसके बाद जौहल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में दोबारा सुनवाई के लिए भेजा था मामला

15 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने जगतार सिंह से जुड़े इन सातों मामलों में जमानत पर दोबारा विचार करने के लिए मामला दिल्ली हाईकोर्ट को वापस भेज दिया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट ने इन सभी मामलों पर फिर से सुनवाई की। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 7 सितंबर 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अब 18 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने सातों मामलों में जौहल को जमानत दे दी।

जमानत मिली है, आरोप खत्म नहीं हुए

हाईकोर्ट से जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि जौहल को आरोपों से बरी कर दिया गया है। जमानत और बरी होना दो अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।

हाईकोर्ट का यह फैसला फिलहाल जमानत तक सीमित है। सातों मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और आरोप सही हैं या नहीं, इसका फैसला ट्रायल में होगा।

इस तरह 2017 में गिरफ्तारी के बाद करीब 9 साल से हिरासत में चल रहे जगतार सिंह जौहल को अब सातों मामलों में जमानत मिल गई है। यह फैसला फिलहाल उन्हें हिरासत से राहत देता है, लेकिन मामलों के अंतिम नतीजे का फैसला नहीं करता।

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