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जोधपुर उपभोक्ता आयोग में विवाद गहराया: हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने किया बहिष्कार का ऐलान, अध्यक्ष पर गंभीर आरोप

Jodhpur Consumer Commission Row Deepens: High Court Advocates Association Announces Boycott Over Allegations Against President

जोधपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-द्वितीय, जोधपुर में कार्यरत अध्यक्ष को लेकर विवाद गहरा गया है।

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर ने आयोग के अध्यक्ष के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए आयोग की कार्यवाही के बहिष्कार का निर्णय लिया है।

इस संबंध में एसोसिएशन ने राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग, जयपुर को विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

एसोसिएशन के महासचिव डॉ. विजय चौधरी द्वारा जारी पत्र में आरोप लगाया गया है कि जिला उपभोक्ता आयोग-द्वितीय, जोधपुर के पीठासीन अधिकारी का व्यवहार अधिवक्ताओं के प्रति अनुचित है और उनकी कार्यशैली न्यायिक गरिमा एवं निष्पक्षता के अनुरूप नहीं है।

पत्र में कहा गया है कि लगातार मिल रही शिकायतों के कारण अधिवक्ताओं में रोष और असंतोष का माहौल है, जिससे न्यायालय की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।

एसोसिएशन ने बताया कि हाल ही में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर आयोग-द्वितीय की कार्यवाही से अधिवक्ताओं के स्वैच्छिक रूप से दूर रहने का निर्णय लिया गया।

यह निर्णय तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक मामले में उचित प्रशासनिक और विधिक कार्रवाई नहीं होती।

शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई मामलों में कथित रूप से पक्षकारों और अधिवक्ताओं के साथ असामान्य व्यवहार किया गया।

एसोसिएशन का आरोप है कि आयोग में कार्यवाही के दौरान न्यायिक मर्यादाओं की अनदेखी की जा रही है तथा कुछ मामलों में आदेशों और प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायत के साथ कई मामलों के आदेशों और दस्तावेजों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।

पत्र में यह दावा भी किया गया कि कुछ प्रकरणों में बिना पर्याप्त आधार के कठोर टिप्पणियां की गईं, जबकि कुछ मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का पालन नहीं होने के आरोप लगाए गए हैं। अधिवक्ताओं ने कहा कि इससे आम पक्षकारों का भरोसा भी प्रभावित हो रहा है।

एसोसिएशन ने राज्य आयोग से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं, ताकि न्यायालय की गरिमा और अधिवक्ताओं का विश्वास पुनः स्थापित हो सके।

पत्र में यह भी कहा गया कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो विवाद और गहरा सकता है।

दूसरी ओर, शिकायत पत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों में कुछ पुराने आपराधिक और उपभोक्ता मामलों का भी उल्लेख किया गया है, जिनके आधार पर अध्यक्ष के आचरण और कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।

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