D.B. Special Appeal Writ No. 1295/2025 की जयपुर में लिस्टिंग पर विवाद, 1976 के राष्ट्रपति आदेश का दिया हवाला; सोशल मीडिया पर भी अधिवक्ताओं का विरोध
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में रजिस्टर्ड मुकदमों को जयपुर बेंच में सूचीबद्ध किए जाने को लेकर अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है।
मामला अब सोशल मीडिया और वाट्सऐप ग्रुपों की चर्चाओं से निकलकर औपचारिक स्तर पर पहुंच गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर और राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर ने संयुक्त रूप से एक्टिंग चीफ जस्टिस को प्रतिवेदन भेजकर 5 अगस्त 2026 के आदेश पर पुनर्विचार की मांग की है।
मामला D.B. Special Appeal Writ No. 1295/2025, Udaipur Development Authority बनाम Ashok Kumawat तथा उससे जुड़े अन्य मामलों की लिस्टिंग से संबंधित है।
बार एसोसिएशनों का कहना है कि ये मामले मूल रूप से राजस्थान हाईकोर्ट की प्रिंसिपल सीट जोधपुर में संस्थित हुए थे और जिन रिट याचिकाओं से ये अपीलें उत्पन्न हुईं, वे भी जोधपुर में रजिस्टर्ड और निर्णीत हुई थीं।
5 अगस्त के आदेश के बाद बढ़ा विरोध
संयुक्त प्रतिवेदन के 5 अगस्त 2026 को जब ये मामले एक्टिंग चीफ जस्टिस के समक्ष सूचीबद्ध हुए, तब इन्हें जयपुर बेंच में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।
इसके बाद जोधपुर के अधिवक्ताओं के बीच इस निर्णय को लेकर चर्चा और नाराजगी तेज हो गई।
विभिन्न वाट्सऐप और सोशल मीडिया ग्रुपों में अधिवक्ता इस मुद्दे पर खुलकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।
कुछ संदेशों में बार एसोसिएशनों की भूमिका और मामले को लेकर भी तीखी टिप्पणियां की गई हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर व्यक्त विचार संबंधित अधिवक्ताओं के व्यक्तिगत विचार हैं और इन्हें बार एसोसिएशनों की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं माना जा सकता।
1976 के राष्ट्रपति आदेश का हवाला
दोनों बार एसोसिएशनों ने अपने प्रतिनिधित्व में High Court of Rajasthan (Establishment of a Permanent Bench at Jaipur) Order, 1976, दिनांक 8 दिसंबर 1976, का हवाला दिया है।
प्रतिवेदन के अनुसार यह आदेश States Reorganisation Act, 1956 की धारा 51(2) के तहत जारी किया गया था।
एसोसिएशनों की ओर से जारी पत्र में बताया गया कि आदेश में जयपुर बेंच के क्षेत्राधिकार के लिए अजमेर, अलवर, भरतपुर, बूंदी, जयपुर, झालावाड़, झुंझुनूं, कोटा, सवाई माधोपुर, सीकर और टोंक जिलों का उल्लेख है।
आदेश में यह भी प्रावधान है कि चीफ जस्टिस अपने विवेक से किसी मामले या मामलों के वर्ग को जोधपुर में सुने जाने का निर्देश दे सकते हैं।
“आदेश जारी करते समय राष्ट्रपति आदेश पर ध्यान नहीं गया”
प्रतिवेदन में दोनों एसोसिएशनों ने कहा है कि 5 अगस्त को दिशा-निर्देश जारी करते समय संभवतः 8 दिसंबर 1976 के राष्ट्रपति आदेश में मौजूद प्रावधानों की ओर ध्यान नहीं गया, जिसके चलते इन मामलों को जयपुर बेंच में सूचीबद्ध करने का निर्देश जारी हुआ।
एसोसिएशनों का कहना है कि प्रिंसिपल सीट जोधपुर में रजिस्टर्ड मामलों को जयपुर में सूचीबद्ध करने से मामलों के क्षेत्रीय आवंटन को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और इससे जोधपुर बार में निराशा भी उत्पन्न होगी।
जोधपुर में ही लिस्टिंग की मांग
दोनों बार एसोसिएशनों ने एक्टिंग चीफ जस्टिस से 5 अगस्त 2026 के आदेश को संशोधित करने और D.B. Special Appeal Writ No. 1295/2025 सहित संबंधित मामलों को जयपुर बेंच के बजाय प्रिंसिपल सीट, जोधपुर में ही सूचीबद्ध करने का निर्देश देने की मांग की है।
9 अगस्त को यह प्रतिवेदन राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलीप सिंह उदावत एवं महासचिव डॉ. अरुण कुमार जांजरिया, राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी और महासचिव डॉ. विजय चौधरी की ओर से भेजा गया हैं.