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Justice Ajay Rastogi : आरसीए के लोकपाल, क्रिकेट से जुड़े विवादों की करेंगे सुनवाई

Justice Ajay Rastogi Resigns as RCA Ombudsman, Resignation Pending for Two Months

जयपुर, 6 अक्टूबर

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस अजय रस्तोगी अब Rajasthan Cricket Association के नए लोकपाल होंगे।

Rajasthan Cricket Association की एड हॉक कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी को अपना लोकपाल बनाया है।

Rajasthan Cricket Association की ओर से लोकपाल नियुक्ति की जानकारी राजस्थान हाईकोर्ट को दी गई है।

आरसीए की जनरल बॉडी में अन्य फैसलों के साथ-साथ लोकपाल नियुक्ति का फैसला लेने का अधिकार भी सर्वसम्मति से एड हॉक कमिटी कन्वीनर डीडी कुमावत को सौंपा गया था।

लोकपाल नियुक्ति से यह साफ हो गया है कि राजस्थान क्रिकेट संघ से संबंधित सभी विवादों की सुनवाई अब लोकपाल के समक्ष ही की जाएगी।

आरसीए ने इस बात की जानकारी हाईकोर्ट को भी दे दी है।

जयपुर से त्रिपुरा और दिल्ली

फिलहाल दिल्ली में निवासरत जस्टिस अजय रस्तोगी मूल रूप से जयपुर के निवासी हैं।

मूलतः राजस्थान हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस अजय रस्तोगी को चार दशक का विधि और न्याय जगत का अनुभव है।

18 जून 1958 को जन्में जस्टिस अजय रस्तोगी ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम., एल.एल.बी. किया और 1982 में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए।

राजस्थान हाईकोर्ट में अपनी वकालत शुरू करते हुए उन्होंने संवैधानिक, सिविल सेवा और श्रम मामलों में काम किया। उनका विशेषज्ञता क्षेत्र सेवा और श्रम कानून रहा।

करीब दो दशक की सफल वकालत के बाद उन्हें 2 सितंबर 2004 को राजस्थान हाईकोर्ट में जज नियुक्त किया गया।

करीब 14 साल हाईकोर्ट में जज रहने के बाद 1 मार्च 2018 को उन्हें त्रिपुरा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

सुप्रीम कोर्ट का सफर

2 नवंबर 2018 को जस्टिस अजय रस्तोगी को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया।

करीब 5 साल के कार्यकाल के बाद 17 जून 2023 को वे सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए।

सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस अजय रस्तोगी ने महत्वपूर्ण 158 फैसले लिखे।

जल्लीकट्टू की प्रथा को चुनौती देने, व्यभिचार को अपराध से मुक्त करने और इच्छामृत्यु के अधिकार सहित कई ऐतिहासिक फैसलों वाली पीठों के सदस्य भी रहे।

जस्टिस अजय रस्तोगी ने सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी पद को लेने से इंकार किया था

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