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Rajasthan Highcourt : देश में GM खाद्य पदार्थों के लिए सुरक्षा और नियामक ढांचे का नहीं होना संविधान का उल्लंघन, केंद्र सरकार 6 माह में नियम बनाए

Rajasthan High Court Slams State Government Over Delay in Panchayat Elections

REPORTABLE JUDGMENT जयपुर, 15 अक्टूबर

Rajasthan Highcourt ने देश में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) खाद्य पदार्थों के लिए सुरक्षा मानक और नियामक ढांचे की तत्काल आवश्यकता पर जोर देते हुए अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में कहा हैं कि देश में GM खाद्य पदार्थों के लिए नियमों की अनुपस्थिति संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षित भोजन के अधिकार का उल्लंघन है.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में कहा हैं कि

पिछले दो दशकों में GM खाद्य पदार्थों के लिए कोई ठोस नियामक ढांचा नहीं बनाया गया है, जिससे जनता के खाद्य सुरक्षा के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) पर असर पड़ा है.

Rajasthan Highcourt ने FSSAI और केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे Food Safety and Standards Act, 2006 की धारा 22 के तहत GM खाद्य पदार्थों के लिए छह महीने के भीतर GM खाद्य पदार्थों के लिए नियम तैयार करें और अधिसूचित करें.

Rajasthan Highcourt ने कहा बिना नियमों के किसी भी GM खाद्य पदार्थ की निर्माण, बिक्री, वितरण या आयात की अनुमति नहीं दी जा सकती.

Rajasthan Highcourt ने स्पष्ट किया कि संसद की स्थायी समितियों और स्वास्थ्य मंत्रालय ने GM खाद्य पदार्थों के प्रभाव और नियामक जरूरतों पर कई बार रिपोर्ट दी है.

इनमें लेबलिंग, परीक्षण और सार्वजनिक जागरूकता को अनिवार्य बनाने की सिफारिशें शामिल थीं.

Rajasthan Highcourt ने इस मामले में FSSAI की की धीमी रफतार के खिलाफ सख्त टिप्पणी करते हुए समय पर नियम बनाने तथा उन्हें समय पर लागू करने के लिए आदेश दिया हैं.

Rajasthan Highcourt ने कहा कि देश में खाद्य सुरक्षा केवल नियामक मसला नहीं बल्कि संवैधानिक आवश्यकता है, और सरकार को जनता के स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे.

Rajasthan Highcourt के फैसले के मुख्य बिंदू

  1. FSSAI और केंद्र सरकार को छह महीने के भीतर GM खाद्य पदार्थों के लिए नियम बनाना अनिवार्य।
  2. किसी भी GM खाद्य पदार्थ की बिक्री, निर्माण, वितरण या आयात केवल नियम बनने के बाद ही संभव।
  3. सभी खाद्य आयात को “GM मुक्त” प्रमाणपत्र के साथ आयातित होना चाहिए.
  4. कस्टम और बंदरगाह प्राधिकरणों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा.
    5.2011 के नियम 6(7) को अदालत ने वैध माना, जो GM खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट लेबलिंग की मांग करता है।

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