जयपुर, 11 सितंबर
बीकानेर में राजस्थान हाईकोर्ट की संभावित बेंच खोलने की चर्चाओं के बीच जोधपुर मुख्यपीठ के अधिवक्ताओं ने आपात बैठक की.
बैठक में बार काउंसिल के सदस्य, राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन और हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी और सीनियर एडवोकेट इस बैठक में मौजूद रहें.
जयपुर पीठ के अधिवक्ता भी बीकानेर में संभावित बेंच के विरोध में शुक्रवार को हड़ताल पर रहेंगे

बैठक में अधिवक्ताओं के सभी संगठनो के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं ने एकराय से बीकानेर में बेंच का विरोध जताया.
इसके विरोध में शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट के साथ ही अधिनस्थ अदालतों में सांकेतिक हड़ताल का ऐलान करते हुए न्यायिक कार्य का बहिश्कार किया हैं.
बीकानेर में राजस्थान हाईकोर्ट की संभावित बेंच खोलने की चर्चाओं के बीच जहां जोधपुर मुख्यपीठ के अधिवक्ताओं ने आपात बैठक कर विरोध जताया और शुक्रवार को हड़ताल का ऐलान किया.

गौरतलब है कि आगामी कुछ दिनों में देश के मुख्य न्यायाधीश का बीकानेर दौरे की बात सामने आयी हैं.
हाल ही में राजधानी जयपुर में आयोजित हुए एक पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान भी केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जूनराम मेघवाल ने मंच से कहा था कि देश के मुख्य न्यायाधीश सितंबर में बीकानेर आने वाले हैं.
सीजेआई के संभांवित दौरे और संभावित बेंच खोलने की चर्चाओं के बाद ही राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ के अधिवक्ता एकत्रित हुए.

जोधपुर – जयपुर में सांकेतिक हड़ताल
बीकानेर में राजस्थान हाईकोर्ट की संभावित बेंच खोलने की चर्चाओं के बीच जहां जोधपुर मुख्यपीठ के अधिवक्ताओं ने आपात बैठक कर विरोध जताया और शुक्रवार को हड़ताल का ऐलान किया.
वहीं राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ में विरोध भी शुक्रवार को सांकेतिक हड़ताल पर रहेंगे.
पूर्व सीजेआई ने कि थी वर्चुअल कोर्ट की बात
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 9 मार्च 2024 में भी महाराजा गंगासिंह विवि में ‘हमारा संविधान, हमारा सम्मान’ कैंपेन की रीजनल कांफ्रेंस में सीजेआई डॉ. डीवाई चन्द्रचूड़ ने कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल की मौजूदगी में बीकानेर में हाईकोर्ट की वर्चुअल बेंच खोलने के लिए कहा था.
रियासतकाल के दौरान बीकानेर में ही हाईकोर्ट थी और तत्कालीन बीकानेर राज्य में वर्ष, 1922 से लेकर 1950 तक बीकानेर हाईकोर्ट अस्तित्व में रही है.वृहद राजस्थान बनने के बाद उसे यहां से हटाया गया था
हाईकोर्ट बेंच खोलने की प्रक्रिया
किसी भी राज्य में हाईकोर्ट की बेंच खोलने के लिए राज्य सरकार, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट और केन्द्र सरकार की भूमिका रहती हैं.
राज्य सरकार की ओर से राज्य के मुख्य न्यायाधीश की सहमति और राज्यपाल से परामर्श के बाद हाईकोर्ट की बेंच के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाता है.
केन्द्र सरकार उस प्रस्ताव पर विचार कर सुप्रीम कोर्ट से परामर्श करती है. सुप्रीम कोर्ट की सहमति से केन्द्र सरकार बेंच खोलने का नोटिफिकेशन जारी करती है.
आसान नहीं राह
वृहद राजस्थान के समय जोधपुर को जयपुर को प्रदेश की राजधानी और जोधपुर को राज्य की न्यायिक राजधानी बनाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर रखा गया था.
बाद में एक लंबे संघर्श् के बाद 1977 में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच स्थापित कि गयी.
तब से ही यदा कदा बीकानेर में हाईकोर्ट बेंच खोलने की मांग कि जाती रही है. लेकिन केन्द्र में बीकानेर के सांसद अर्जूनराम मेघवाल के कानून मंत्री बनने के बाद इस मांग ने ज्यादा जोर पकड़ा.
लेकिन बीकानेर में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की राह इतनी भी आसान नहीं है.
बीकानेर में हाईकोर्ट बेंच आने पर प्रदेश के कोटा और उदयपुर जिलों में भी हाईकोर्ट बेंच खोलने की मांग बढेगी और एक नया आंदोलन शुरू हो सकता हैं.
कोटा और उदयपुर में नेता-मंत्री इस मामले में जनता और वकीलों के साथ आवाज उठाते रहे हैं.
दूसरी जगहों पर बेंच खुलने से न्यायिक राजधानी की पहचान खोने का डर जोधपुर के अधिवक्ताओं को एक करता हैं.
जोधपुर के अधिवक्ता बीकानेर में हाईकोर्ट की बेंच का पुरजोर विरोध कर रहे हैं.