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राजस्थान हाईकोर्ट: समय-सीमा कानून की आत्मा है, देरी माफ किए बिना समय-सीमा पार अपील पर सुनवाई नहीं, 44 साल बाद दाखिल अपील खारिज

जयपुर, 19 सितंबर

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में यह स्पष्ट किया है कि किसी भी समय-सीमा से बाहर दायर अपील को तब तक सुना ही नहीं जा सकता जब तक उसकी देरी विधिवत तरीके से माफ न की जाए।

जस्टिस अनूप कुमार धांध की अदालत ने बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा 44 साल की देरी से दायर की गई अपील को स्वीकार करने और 44 साल पुरानी डिक्री को निरस्त करने पर हैरानी भी जताई।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कानून द्वारा तय की गई समय-सीमा केवल तकनीकी औपचारिकता नहीं, बल्कि यह अपीलीय न्यायालय की अधिकारिता (ज्यूरिडिक्शन) तय करती है।

कोर्ट ने कहा कि यदि अपील देरी से दायर होती है, तो सबसे पहले यह तय करना अनिवार्य है कि क्या देरी को माफ किया जा सकता है।

देरी से दायर की गई अपील के कारण को माफ किए बिना अपील पर सुनवाई करना कानून के विपरीत है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने ये आदेश साबुद्दीन व अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए हैं।

44 साल पुरानी डिक्री निरस्त

मामला सवाई माधोपुर जिले से जुड़ा है, जहां उपखंड अधिकारी ने वर्ष 1964 में एक डिक्री पारित की थी।

इस डिक्री के खिलाफ 44 साल बाद, वर्ष 2010 में राजस्व अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर की गई।

लेकिन याचिकाकर्ता ने अपील के साथ देरी माफी (कंडोनेशन ऑफ डिले) का कोई आवेदन ही नहीं लगाया, फिर भी RAA ने अपील स्वीकार कर डिक्री को निरस्त कर दिया।

बाद में यह आदेश बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने भी सही ठहराया। इस पर याचिकाकर्ता हाईकोर्ट पहुंचे।

कानून के अनुसार नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलीय प्राधिकरण और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने इस बुनियादी कानूनी सिद्धांत की अनदेखी की है, इसलिए उनके आदेश कानून के अनुसार नहीं माने जा सकते।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि समय-सीमा कानून की आत्मा है और अदालत इसे नजरअंदाज कर अपील की सुनवाई नहीं कर सकती।

आदेश रद्द, लेकिन दी छूट

राजस्थान हाईकोर्ट ने इसके साथ ही राजस्व अपीलीय प्राधिकरण और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के दोनों आदेशों को रद्द करते हुए मामले को वापस राजस्व अपीलीय प्राधिकरण (RAA) के पास भेज दिया है।

हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को यह छूट भी दी है कि यदि प्रतिवादी उचित कारण बताते हुए देरी माफी का आवेदन पेश करते हैं और RAA उसे स्वीकार करता है, तो ही अपील पर मेरिट के आधार पर सुनवाई की जाएगी।

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