दिल्ली, 11 सितंबर
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए मृतक कर्मचारी के पारिवार के रूप में विवाहित बेटी को भी शामिल किया जाएगा.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें याचिकाकर्ता विवाहित महिला के दावे को केवल इसलिए ठुकराया गया था कि उसका विवाह हो चुका हैं.
यह मामला हिमाचल की सविता से जुड़ा है. सविता के पिता श्याम प्रकाश जिनका निधन अप्रैल 2012 में हो गया था जो शिक्षा विभाग में शिक्षक थे.
कई बार खारिज हुआ दावा
उनके बाद परिवार में पत्नी और तीन विवाहित बेटियां बचीं। सविता ने 2018 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, मगर उस समय की नीति में विवाहित बेटियों को पात्रता नहीं दी गई थी, इसलिए उनका आवेदन अस्वीकार कर दिया गया.
सविता का मामला पहले 2018 में और फिर 2023 में दोबारा खारिज किया गया। अधिकारियों ने कभी देरी का हवाला दिया तो कभी यह कहा कि परिवार की वार्षिक आय निर्धारित सीमा से अधिक है.
कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस ज्योत्सना रेवल दुआ ने कहा कि आवेदन में हुई देरी जायज़ थी, क्योंकि खुद सरकार का रुख ही यह था कि विवाहित बेटियां पात्र नहीं हैं. वहीं, आय सीमा की गणना अदालत ने “भ्रामक” बताई। सरकार ने परिवार को केवल दो सदस्य मान लिया, जबकि असल में परिवार में पत्नी और तीन बेटियां शामिल थीं।
फैसले में राकेश कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले का ज़िक्र किया गया। जिसमें विवाह के बाद बेटी पिता के परिवार से अपनी पहचान नहीं खोती। उसे केवल शादी की स्थिति के आधार पर बाहर करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है।
हाईकोर्ट ने सभी पुराने सरकारी आदेश निरस्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि छह हफ्तों के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन पर नए सिरे से विचार कर उचित आदेश पारित करें।