नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में बड़ा और देशभर पर असर डालने वाला फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी दुर्घटना पीड़ित को Mediclaim या मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत इलाज का पैसा मिल चुका है, तब भी वह Motor Vehicles Act के तहत पूरा मुआवजा पाने का हकदार रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि सड़क दुर्घटना के पीड़ित को मिलने वाले मुआवजे से मेडिक्लेम (मेडिकल इंश्योरेंस) की राशि नहीं घटाई जा सकती।
अदालत ने कहा कि दोनों अलग-अलग कानूनी आधार पर मिलने वाले लाभ हैं, इसलिए इन्हें “डबल बेनिफिट” नहीं माना जा सकता। बीमा कंपनी यह नहीं कह सकती कि पीड़ित को पहले ही इलाज का पैसा मिल गया है, इसलिए उसका compensation घटा दिया जाए।
जस्टिस Sanjay Karol और जस्टिस Vipul M. Pancholi की बेंच ने यह फैसला देते हुए New India Assurance Company Limited की अपील खारिज कर दी।
किस मामले में आया फैसला?
यह मामला New India Assurance Company v. Dolly Satish Gandhi से जुड़ा था।
बीमा कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम (MACT) के तहत मिलने वाले मुआवजे से मेडिक्लेम की रकम नहीं काटी जा सकती।
अब मामला इस सवाल से जुड़ा था कि यदि दुर्घटना पीड़ित को पहले से मेडिकल Insurance company इलाज का पैसा दे चुकी हो, तो क्या वही रकम MACT यानी Motor Accident Claims Tribunal द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे से घटाई जा सकती है।
इस मुद्दे पर अलग-अलग हाईकोर्ट्स में विरोधाभासी फैसले आ चुके थे। कुछ अदालतों ने कहा था कि दोहरी राशि मिलने से बचाने के लिए Mediclaim reimbursement घटाया जा सकता है। वहीं कई हाईकोर्ट्स ने माना कि दोनों दावे अलग-अलग कानूनी अधिकार हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को खत्म करते हुए साफ कर दिया है कि Mediclaim reimbursement को compensation से नहीं घटाया जाएगा।
इसे ‘Double Benefit’ नहीं मान सकते: सुप्रीम कोर्ट
बीमा कंपनी की तरफ से दलील दी गई थी कि यदि किसी व्यक्ति को Mediclaim policy से मेडिकल खर्च मिल चुका है और वही खर्च Motor Accident Claim में भी दिया जाता है, तो यह “double benefit” होगा।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि Mediclaim policy कोई मुफ्त सुविधा नहीं होती, बल्कि व्यक्ति सालों तक प्रीमियम भरकर उसे खरीदता है। इसलिए दुर्घटना के बाद उसका लाभ मिलने पर उसे सजा की तरह compensation कम नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों तरह के लाभों में साफ अंतर बताया:
- मेडिक्लेम
- यह एक कॉन्ट्रैक्चुअल (Contractual) लाभ है।
- व्यक्ति अपने पैसों से प्रीमियम भरकर इसे लेता है।
- यह भविष्य की अनिश्चितताओं से सुरक्षा के लिए लिया जाता है
- मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मुआवजा
- यह एक कानूनी अधिकार (Statutory Entitlement) है।
- दुर्घटना में हुई गलती/नुकसान के कारण मिलता है।
- इसका उद्देश्य पीड़ित को “न्यायसंगत मुआवजा” देना होता है
इसलिए दोनों का आधार अलग है और एक को दूसरे से घटाया नहीं जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि सड़क हादसे का मुआवजा उस नुकसान की भरपाई के लिए दिया जाता है जो किसी दूसरे की लापरवाही से हुआ है, जबकि Mediclaim व्यक्ति की अपनी वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था होती है। इसलिए दोनों का आधार अलग है और एक को दूसरे से घटाया नहीं जा सकता।
‘Insurance लेने वाले को नुकसान में नहीं डाल सकते’
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि बीमा कंपनियों की दलील मान ली जाए, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उसी व्यक्ति को होगा जिसने समझदारी दिखाते हुए पहले से मेडिकल Insurance लिया था।
अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में या तो Insurance company को फायदा होगा या फिर दुर्घटना करने वाले वाहन की Insurance company को, लेकिन पीड़ित को उसका पूरा अधिकार नहीं मिलेगा।
कोर्ट ने कहा कि Motor Vehicles Act एक beneficial law है, जिसका उद्देश्य सड़क हादसे के पीड़ितों को “just compensation” देना है। इसलिए उसकी व्याख्या ऐसी नहीं हो सकती जिससे पीड़ित का वैधानिक अधिकार कम हो जाए।
SC ने वकीलों और अदालतों को भी दिया संदेश
फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग अदालतों में आ रहे विरोधाभासी फैसलों पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि एक ही कानूनी मुद्दे पर अलग-अलग फैसले आने से न्यायिक अनिश्चितता बढ़ती है और मुकदमेबाजी जटिल हो जाती है।
कोर्ट ने कहा कि वकीलों की जिम्मेदारी है कि वे अदालत को अपने पक्ष में और खिलाफ दोनों तरह के फैसलों की जानकारी दें। वहीं अदालतों को भी settled law के अनुसार consistency बनाए रखनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय व्यवस्था में Bar और Bench दोनों की साझा जिम्मेदारी है कि कानून में स्पष्टता और स्थिरता बनी रहे।
लाखों Accident Claims पर पड़ेगा असर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मेडिक्लेम/मेडिकल इंश्योरेंस से प्राप्त राशि को मोटर वाहन अधिनियम के तहत मिलने वाले मुआवजे से नहीं घटाया जाएगा।
यह फैसला देशभर में लंबित हजारों सड़क हादसा मुआवजा मामलों पर असर डालेगा। अब बीमा कंपनियों के लिए यह कहना मुश्किल होगा कि Mediclaim reimbursement मिलने के कारण compensation कम किया जाए।
यह फैसला खास तौर पर middle class और salaried लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो वर्षों तक हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भरते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इंश्योरेंस लेना किसी व्यक्ति के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
यह निर्णय आने वाले समय में Motor Accident Compensation मामलों में एक बड़ी कानूनी मिसाल माना जाएगा।